मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
लगभग 20 लाख श्रद्धालुओं ने किये स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज का दर्शन
पांच किलोमीटर पहले से ही प्रशासन के डाइवर्जन से श्रद्धालुओं को हुई परेशानी
गुरु पूर्णिमा के पहले ही आश्रम पर लाखों की भीड़ देख प्रशासन हाई एलर्ट

श्री परमहंस आश्रम शक्तिषगढ़ में गुरु पूर्णिमा के तीन दिन पहले से ही लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देख प्रशासन हाई एलर्ट पर था। आज गुरु पूर्णिमा पर लगभग 20 लाख संत महात्माओं श्रद्धालुओं ने स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज का दर्शन किये। ब्रम्हबेला में उनके सत्यान्वेषी शिष्यगणों द्वारा उनकी पूजा-अर्चना, आरती वंदना के बाद बाद पूज्य श्री सत्संग हाल में 5 बजे विराजमान होकर दर्शन देना शुरू कर दिए थे। बीच-बीच में रुक- रूक कर देर शाम 7 बजे तक स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने दर्शन दिए। दर्शन व आशीर्वाद का कार्यक्रम सकुशल संपन्न हुआ। जगह-जगह आवश्यकतानुसार बैरिकेडिंग, डाइवर्जन, रेलिंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को कंट्रोल करके दर्शन कराया गया। बड़ी गाड़ियों व फोर व्हीलर गाड़ियों को गुरु पूर्णिमा के दिन पांच किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया जिससे श्रद्धालुओं को पैदल ज्यादा चलना पड़ा लेकिन पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की कृपा से मौसम भक्तों के दर्शनार्थ अनुकूल रहा। सूत्रों द्वारा ज्ञात हुआ कि तीन दिन पहले से ही श्रद्धालुओं की भीड़ को देख कर एलआईयू रिपोर्ट के आधार पर कोई कैजुअलिटी न हो प्रशासन हाई एलर्ट पर था, एहतियातन उसने पांच किलोमीटर पहले ही बस कार पिक अप इत्यादि गाड़ियों को रोक दिया। यथार्थ गीता जन-जन के हाथों में हो इसके लिए स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के आदेश से हर वर्ष की तरह अबकी बार भी यथार्थ गीता भजन किसका करें आत्मानुभूति एवं जीवनादर्श आदि कृतियां भारी छूट पर भक्तों को मिल रही थी। अबकी बार पूड़ी की जगह बिहारी पूड़ी ने शत-प्रतिशत स्थान ले लिया जिससे माताएं पूड़ी बेलने की सेवा से चूक गयी। आशीर्वाद व मन्नतों की पूर्ति हेतु धूना कई जगह बनाया गया था। हर वर्ष की तरह गीता भवन में महात्माओं द्वारा सत्संग प्रवचन किया गया जिसमें उन्होंने गीतोक्त
साधना, एक ईश्वर की आराधना, सद्गुरु का ध्यान, बहिर्मुख हो चुकी इन्द्रियों को अंतर्मुख करने का विधि-विधान, श्वास से भजन के उपाय, गृहस्थ से विरक्त की यात्रा आदि ईश्वरीय प्राप्ति के उपाय के विषय में विस्तार से समझाया। गीतोक्त साधना उपदेशकों में महात्मगणों में नारद भगवान, अकेलानंद जी महाराज, गुरुशरणानंद जी महाराज, बिल्लू महाराज, तानसेन जी महाराज, सोहं महाराज, तुलसी महाराज, सूरज महाराज, बच्चा महाराज, राजेश्वरानंद महाराज, गोविंद महाराज, गुलाब महाराज, चिंतन्मयानंद जी महाराज, रामरक्षा नंद महाराज, जयप्रकाश महाराज , भावानंद महाराज आदि महात्माजन रहे।






