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सम्पादक देवेन्द्र राय

May 3, 2026 5:25 pm

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देश की स्वतंत्रता के लिए 3 मई 1945 को शहीद हुए थे केसरी चन्द

देश की स्वतंत्रता के लिए 3 मई 1945 को शहीद हुए थे केसरी चन्द

 

देश गुलामी की जंजीरों से जकड़ा हुआ था ऐसे समय में जौनसार बावर का नवयुवक देश को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से सुभाष चंद्र बोस की सेना में शामिल होया, जिसका ब्रिटिश सरकार विरोध करती है, परिणाम स्वरूप 24 वर्ष 6 माह की आयु में इस वीर सपूत को 3 मई 1945 को फांसी पर लटका दिया गया।

जौनसार बावर के क्यावा गांव में केसरी चंद का जन्म 1 नवंबर 1920 को हुआ, पिता का नाम पंडित शिवदत्त एवं माता का नाम रायबेली था केसरी चंद सबसे छोटे पुत्र थे इनकी माता का स्वर्गवास जन्म के 6 माह पश्चात ही हो गया था परिणाम स्वरूप पिता ने हीं केशरीचंद को बड़े लाड प्यार से पढ़ाया। प्रारंभिक शिक्षा विकास नगर में हुई ।तत्पश्चात डीएवी कालेज देहरादून में अध्यनरत रहे, खेल में प्रारंभ से ही अच्छी रुचि थी ।

10 अप्रैल 1941 को रॉयल इंडिया आर्मी सर्विस कोर में भर्ती हो गए 1941 को फिरोजपुर में वायसराय कमीशन ऑफिस का कोर्स किया 19 अक्टूबर 1941 को इन्हें मलाया के युद्ध के मोर्चे में भेज दिया गया, 27 दिसंबर 1941 को इस साहासी नवयुवक को सूबेदार के पद पर पदोन्नत कर दिया गया ।

15 फरवरी सन 1942 को जापानी फौज द्वारा इन्हें बंदी बना लिया गया आजाद हिंद फौज की ओर से लड़ते हुए इंफाल के मोर्चे पर इन्हें ब्रिटिश फौज ने पकड़ लिया और दिल्ली के जिला जेल में रखा गया इन्हें आर्मी एक्ट की धारा 41 के अंतर्गत भारतीय दंड संहिता की धारा 121 की व्यवस्था के विरुद्ध ब्रिटिश सरकार के खिलाफ युद्ध करने के आरोप में दिनांक 12 दिसंबर 1944 व 10 जनवरी 1945 को लाल किले में जनरल कोर्ट मार्शल में ट्रायल किया गया, 3 फरवरी 1945 को जनरल सी .जे. आचिनलेक ने इनको मृत्युदंड की सजा देने की पुष्टि की।

24 वर्ष 6 माह की आयु में इस महान देशभक्त को 3 मई 1945 को प्रातः दिल्ली के जिला जेल में फांसी के तख्ते पर लटका दिया गया और देश के स्वतंत्र संग्राम में जौनसार बावर उत्तराखंड का नाम अमर कर दिया।

चकराता के समीप राम ताल गार्डन में प्रत्येक वर्ष 3 मई को इस शहीद की स्मृति में एक मेले का आयोजन किया जाता है जहा हजारों लोग शहीद की प्रतिमा के सम्मुख अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं ।

शहीद केसरी चंद मेला 1986 में प्रारंभ हुआ तब से अब तक निरंतर वर्ष प्रतिवर्ष और अधिक प्रगति के साथ बढ़ रहा है और हजारों लोग शहीद केसरी चंद को श्रद्धांजलि देने रामपाल गार्डन पहुंचने हैं।

 

साभार – “जौनसार बावर की दिवंगत विभूतियां” पुस्तक लेखक – भारत चौहान, डॉ राजकुमारी चौहान

NM News live
Author: NM News live

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