स्टेट ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
भगवान उठाते, बैठाते, सोवाते, जगाते हैं — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज
समय के महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज जी के श्रीमुख से अक्सर भक्तों के सामने प्रस्फुटित हो जाता है कि भगवान उठाते हैं बैठाते हैं सुलाते हैं जगाते हैं और आसन्न खतरों से अवगत कराते और बचाते भी हैं। ये उनकी तकिया कलाम वाणी हैं ये वाक्य जब वे बोलते हैं तो अद्भुत लगता है अटपटा लगता है अचंभा लगता है। लेकिन जब उनका दर्शन- पर्शन, उनकी टूटी-फूटी सेवा, उनका शरण-शानिध्य व उनके बताये मार्ग पर भक्त दो चार महीने चलता है तो उसे यह अक्षरशः सत्य प्रतीत होता है। ओम जप और स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज जी की कृपादृष्टि व ध्यान से जब भगवान भक्त के हृदय से रथी हो जाते हैं तो भगवान योगक्षेम करने लगते हैं भक्तों को उठाने बैठाने सुलाने व जगाने लगते हैं यहां तक कि भक्त के हर संकल्प के अनुसार निर्देशन देने लगते हैं। भक्त के भौतिक लौकिक जीवन की सारी जिम्मेदारी भगवान अपने ऊपर ले लेते हैं।
जाको रथ पर केशव ताको कौन अंदेशो” परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज बताते हैं कि भगवान जब भक्त के ह्रदय से रथी होकर बोलने लगते हैं योगक्षेम करने लगते हैं तो वही योगक्षेम ही सर्वोत्तम ग्रंथ है, सर्वोत्तम धर्म-शास्त्र है। यह निर्देशन तब तक चलता है जब तक कि भगवत्प्राप्ति नहीं हो जाता चाहे कई जन्म लग जाए। पूज्य स्वामी श्री बताते हैं कि कहीं भी कोई भी शंका हो उसके लिए यथार्थ गीता पढ़ें।






