National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

August 6, 2026 4:00 pm

National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

Follow Us

August 6, 2026 4:00 pm

दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ब्रम्हभोज पर यथार्थ गीता पाठ

अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”

दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ब्रम्हभोज पर यथार्थ गीता पाठ

बांकेलाल मौर्य ग्राम विकास अधिकारी के घर आयोजन


गृह प्रवेश हो या शादी विवाह, पूजा पाठ हो या तीज त्यौहार, जन्मदिन हो या ब्रम्हभोज सभी अवसरों पर भाविक जन यथार्थ गीता पाठ का आयोजन किया करते हैं । यहां तक कि सामाजिक धार्मिक राजनैतिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी यथार्थ गीता का आयोजन श्रद्धालुओं द्वारा कराया जाता है। इसी सुंदर परम्परा का अनुकरण करते हुए आज बूढ़नपुर तहसील अंतर्गत देउरपुर सराय निवासी ग्राम विकास अधिकारी बाबूलाल मौर्य के दिवंगत पिता तीर्थराज मौर्य की आत्मा की शांति हेतु ब्रम्हभोज पर यथार्थ गीता पाठ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भंडारे का आयोजन यथार्थ गीता वितरण किया गया। इस यथार्थ गीता आयोजन में श्री परमहंस आश्रम मुस्तफाबाद के भक्तगण ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सर्वविदित है कि यथार्थ गीता ईश्वरीय आदेश से विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित समय के महापुरुष कालजयी परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज द्वारा लिखी गई है। यथार्थ गीता महर्षि वेदव्यास कृत श्रीमद्भागवत गीता का भाष्य है । जिसे उस समय के महापुरुष महर्षि वेदव्यास ने श्रृति ज्ञान की परंपरा को तोड़ते हुए चौथी शताब्दी ईसा पूर्व अर्थात द्वापर युग में लिखा था । जिसमें कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों दोनों सेनाओं के मध्य युद्ध लड़ने में संशय ग्रस्त शिष्य अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण का उपदेश है। तब से लेकर आज तक 21 वीं सदी के इस धार्मिक झंझावात में पूज्य गुरुदेव भगवान द्वारा रचित यथार्थ गीता आज संसार को एक स्थिर, शास्वत,कालजयी निर्विवाद मानवमात्र का एकमात्र धर्म शास्त्र दिया है। जिसको पढ़ने से संसार धार्मिक प्रभामंडल से आलोकित होने लगता है। यथार्थ गीता संसार के जीवन में एक ऐसा चिराग है जिससे संसार का लौकिक और पारलौकिक जीवन सदा प्रकाशित रहता है। यथार्थ गीता में एक ईश्वर की आराधना, और उस एक ईश्वर को पाने की विधि विशेष का चित्रण, ओम जप, सद्गुरु का ध्यान , यज्ञ, कर्म, धर्म, जाति आदि की शास्वत व्याख्या निहित है। पूज्य गुरुदेव भगवान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज यथार्थ गीता को चार वार आवृत्ति पर बल देते हैं। चार बार आवृत्ति से भगवान उस भाविक के ह्रदय से रथी हो जाते हैं और उसको उठाने बैठाने जगाने सोवाने हर खतरों से अवगत कराने और उस खतरों से बचाते रहते हैं । चाहे कितना भी जन्म लगे परमात्मपर्यंत की दूरी तय होने तक भगवान हृदय से रथी रहते हैं। उसका साथ उसके हर जन्म तक उसके साथ रहते हैं।

NM News live
Author: NM News live

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *