आजमगढ़ ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
रामनवमी की आध्यात्मिक व्याख्या किये श्री श्रद्धा जी महाराज

विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्मशास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के कृपापात्र शिष्य श्री श्रद्धा महाराज जी आजमगढ़ जनपद के गजेन्धरपट्टी भेदौरा बाजार में 26 मार्च से 28 मार्च तक तीन दिवसीय श्री राम कथा कर रहे हैं । उन्होंने श्री रामनवमी की आध्यात्मिक व्याख्या की। उन्होंने रामनवमी की आध्यात्मिकता व्याख्या में बताया कि भारत में साल में दो बार नवरात्र आता है एक वर्ष के शुरुआत में चैत्र मास में जहां लास्ट दिन राम नवमी मनाया जाता है अर्थात भगवान राम के जन्मदिन के शुभ अवसर पर और दूसरा नवरात्र आता है साल के अंत में फाल्गुन में जब भगवान राम रावण को मारकर सिंहासनारुढ़ हो जाते हैं इस दिन हम दशहरा के नाम से नवरात्र मनाते हैं। प्रथम बार हम भगवान के हृदय से जाग्रत होने की खुशी में और दूसरी बार भजन की पराकाष्ठा पर जब भगवान मोह रुपी रावण का बध कर देते हैं । तो कहने का आशय है कि हमारी सनातन संस्कृति में साल की शुरुआत में हम एकमात्र परमात्मा के भजन से शुरुआत करते हैं और साल के अंत में हम भजन की पराकाष्ठा में पहुंचने के परिणाम को मनाते हैं। उन्होंने बताया कि सनातन संस्कृति एक आदर्श संस्कृति है हम अंग्रेज़ो की तरह केक काटकर मौज-मस्ती करके नववर्ष नहीं मनाते हैं बल्कि एक ईश्वर की आराधना करके सद्गुरु की शरण जाकर उनको रिझाकर हृदय से भगवान को जाग्रत कराकर मनाते हैं जिससे हम संस्कार बने और और संसार भी हमारा अनुकरण करके संस्कारी बनें।






