अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
तिलकोत्सव पूर्व यथार्थ गीता पाठ व भंडारे का आयोजन
विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करूणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के श्रीमुख से संसार के कल्याणार्थ निसृत प्रवाहमान ब्रम्ह विद्या यथार्थ गीता का पाठ आज तिलकोत्सव पूर्व सकुशल संपन्न हुआ। यथार्थ गीता पाठ पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की कृपा व आशीर्वाद से तहसील जलालपुर अंतर्गत कन्नूपुर निवासी भक्त एड्वोकेट सुनील सिंह के सौजन्य से संपन्न हुआ। लगभग 18 घंटे चले इस यथार्थ गीता पाठ में एक ईश्वर की आराधना , ओम जप सद्गुरु ध्यान, ज्ञान – भक्ति और कर्म की अनुपम संगम आदि का चित्रण है। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने यथार्थ गीता में बताया है कि ईश्वर की प्रत्यक्ष जानकारी का नाम ही ज्ञान है। कर्म का भावार्थ उन्होंने बताया है कि सद्गुरु के शरण में रहकर एक ईश्वर की आराधना ही कर्म है। मन , वचन और कर्म से सद्गुरु के हाथों यंत्रवत परमात्मपर्यंत की दूरी तय करने तक चलते रहने का नाम भक्ति है। जब तक रहनी आकाशवत न हो जाए तब तक श्वास का प्रश्वास में और प्रश्वास का श्वास में यजन ही यज्ञ है। ऐसे ही अनेकानेक प्रश्नोत्तरी व शंका समाधान गुरु – शिष्य संवाद यथार्थ गीता में भरा पड़ा है । श्रीमद्भागवत गीता भाष्य यथार्थ गीता शिष्य अर्जुन के शंकाओं का समाधान सद्गुरु श्री कृष्ण द्वारा किया गया है जो हर उस साधक की स्थिति का चित्रण है जो अर्जुन की तरह सशंकित है, रुढियों में जकड़ा है , उसका मोह परिवार में बंधा है। श्रीकृष्ण स्तर के सद्गुरु समय के महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ऐसे अनगिनत धर्ममय गुत्थियों को सुलझाने के लिए एकमात्र कुजी यथार्थ गीता को ईश्वरीय आदेश से लिपिबद्ध किया है। जिसकी लगातार आवृति करते रहने से संसार की समस्त भ्रांतियों का शमन हो जाता है।






