हनोल महासू देवता मंदिर प्रांगण में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
कथावाचक आचार्य विजय कृष्ण महाराज ने कहा – नशा मुक्ति और बलि प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।
16 मई, त्यूणी। हनोल स्थित महासू महाराज के मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा वाचक आचार्य विजय कृष्ण महाराज ने कहा है कि धर्म को जानने और समझने के लिए श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए।
कथा के तीसरे दिन आचार्य विजय कृष्ण महाराज ने सती प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहां है कि भगवान भोले का विवाह भी अद्भुत था। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। भगवान शिव की बारात में भूत-प्रेत, पिशाच, देव, दैत्य, गन्धर्व, नाग, किन्नर, यक्ष, ब्रह्मराक्षस, असुर आदि सभी शामिल थे। 
श्रीमद् भागवत कथा से जुड़े हुए उन्होंने अनेक संस्मरण सुनाएं। उन्होंने कहा कि श्रीमद भागवत कथा का आयोजन मुख्य रूप से आध्यात्मिक विकास, भगवान के प्रति भक्ति और ज्ञान को बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह कथा सुनने से मन शांत होता है और लोगों को जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
कथावाचक आचार्य विजय कृष्ण महाराज ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा सुनने से लोगों का आध्यात्मिक विकास होता है और उन्हें भगवान के प्रति अधिक प्रेम और भक्ति का अनुभव होता है।
उन्होंने कहा कि मन शांत और स्थिर होता है, जिससे लोग तनाव और चिंता से मुक्त रहते हैं।
श्रीमद् भागवत कथा की उपयोगिता के बारे में कहा कि कथा सुनने से मोक्ष और मुक्ति का मार्ग सुगम होता है। जो लोगों को आध्यात्मिक रूप से उन्नत बनाने और जीवन के सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर महासू देवता मंदिर समिति हनोल के सचिव मोहनलाल सेमवाल, देव वजीर दीवान सिंह, जयपाल सिंह पंवार, देवमाली हरिश्चंद्र नौटियाल, राजेंद्र नौटियाल, देवदत्त जोशी, वीरेंद्र जोशी, पूरण नाथ राजगुरु, विक्रम राजगुरु, रोशन, गौरव चौहान, मुकेश देवमाली, आचार्य विवेक शरण जोशी, आचार्य बृजेश जोशी, आचार्य आशीष शर्मा, आचार्य सुभाष बिजलवाण, रमेश डोभाल, जितेंद्र जोशी आदि सहित अनेक भक्तगण उपस्थित थे।






