लखवाड़ बांध प्रभावित/विस्थापित एससी/सेंट जनकल्याण समिति, के एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक श्री संदीप सिंघल वार्ता कि।
प्रधान सम्पादक देवेन्द्र राय
लखवाड़ बांध प्रभावित/विस्थापित एससी/सेंट जनकल्याण समिति, के एक प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक श्री संदीप सिंघल जी से उनके कार्यालय में बांध प्रभावित क्षेत्र लखवाड़ के प्रभावितों की समस्याओं के बारे में और मांगों के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। यह प्रतिनिधि मंडल जगमोहन सिंह चौहान अध्यक्ष, के नेतृत्व में समिति के वरिष्ठ सदस्य एवं संयोजक श्री भजन सिंह तोमर पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख कालसी , श्री श्याम दत्त नौटियाल, श्री नरेंद्र सिंह तोमर, श्री गुमान सिंह तोमर, श्री विश्व विजय सिंह चौहान, श्री सनी राज सिंह तोमर तथा टिहरी गढ़वाल, नैनबाग क्षेत्र से, लखवाड़ बांध विकास एवं श्रम समिति के संयोजक डॉक्टर वीरेंद्र सिंह रावत आदि लोग उपस्थित थे। 
उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक के साथ इस वार्ता में महाप्रबंधक(लखवाड़ बांध परियोजना) एसके सिंह, निदेशक ऑपरेशन उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड श्री बलूनी जी आदि ने प्रतिभा किया।
समिति द्वारा सर्वप्रथम परिवार गणना जो की 2013 के बाद बढ़ाई है उसका सत्यापन करने के लिए ग्राम सभा स्तर पर कैंप लगाया जाए, जिससे जो लोग किन्हीं कारणों से परिवार रजिस्टर में अपना परिवार अंकित नहीं कर पाए हैं उन्हें एक मौका मिलेगा।
2. सरकार द्वारा जो अनुग्रह अनुदान राशि को बढ़ाया गया है, बांध विस्थापितों में इससे असंतोष व्याप्त है, इसे पुनरीक्षित करते हुए आज के आरबीआई प्राइस इंडेक्स महंगाई दर के अनुसार स्टेट बैंक के इंटरेस्ट के अनुसार प्रति हेक्टेयर की दर से बढ़कर के भुगतान किया जाए, अथवा ली गई भूमि के सापेक्ष भूमि के बदले भूमि उपलब्ध कराई जाए।
3 बांध परियोजना के लिए जो शेष भूमि का अधिकरण होना है उसमें वर्ग 4 तथा पट्टाधारकों की भूमि भी है उनका भुगतान भी भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति 2013 के अनुसार समान दरों में किया जाए।
4. गौशाला पुनः निर्माण के लिए₹25000 की सहायता नियम अनुसार दी जाए, इसके साथ-साथ जिन संपत्तियों का भुगतान नहीं किया गया है और अब किया जाना है उन्हें पुनर्स्थापना नीति 2013 की धारा 29 के अनुसार बिना मूल्य हास के अनुसार तथा बाजार मूल्य पर 100% सौ प्रतिशत पोषण राशि के साथ किया जाए।
5. बांध प्रभावित परिवारों को उनके बड़े हुए परिवारों के अनुसार कृषि मजदूरी पुनरीक्षित करते हुए प्रत्येक नए परिवार को भुगतान किया जाए।*बढ़े हुए।
सन 2016 के बाद शेष जिन 39 पदों पर 9 सृजित पदों की भर्ती होनी है उसमें तुरंत कार्रवाई आरंभ की जाए तथा बयासी परियोजना में शीश 68 रिक्त पदों पर भी चयन प्रक्रिया आरंभ की जाए, इस पर प्रबंध निदेशक महोदय ने तुरंत कार्रवाई जल्दी से जल्दी करने की बात की है और आश्वासन दिया है कि कार्रवाई आरंभ करवाई जाएगी ।
7. अल्प लघु तकनीकी कार्यों की 5 लाख की राशि को पुनरीक्षित करके 20 लाख किया जाए तथा छोटी निविदाओं जिनकी लागत एक करोड़ से कम हो स्थानीय बांध प्रभावितों को आरक्षित करके दी जाए।
8. तहसील कालसी में प्रभावी जस्टिस पन्नालाल सेटलमेंट एक्ट, के नियमों के अनुसार वन भूमि में नुकसान को ग्राम सभाओं को दिया जाए, जिससे धनराशि का उपयोग उसे ग्राम सभा में विकास कार्यों एवं सघन वृक्षारोपण तथा अवैध खनन को रोकने में किया जा सके।
9. समिति ने सबसे महत्वपूर्ण मांग यहां उठाई है कि, लखवाड़ बांध प्रभावित समस्त क्षेत्र टिहरी और जनपद देहरादून के बांध विस्थापितों को 500 यूनिट तक की बिजली प्रति माह आजीवन निशुल्क देने का शासन आदेश किया जाए।
10. समिति ने यह भी मांग की है की लखवाड बांध परियोजना तथा जमरानी बांध परियोजना दोनों ही प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की बहुउद्देशीय परियोजनाएं हैं इसलिए जो नीति जमरानी बांध के लिए बनाई गई है, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए वही हमारे क्षेत्र में एक प्रदेश एक नीति के तहत लखवाड़ बांध मैं भी लागू की जाए। 
11. अंत में प्रबंध निदेशक महोदय से नैनबाग तहसील के सर्किल रेट को भूमि अधिग्रहण पुनर्वास नीति 2013 की धारा 26 के अंतर्गत वहां के सर्किल रेट कालसी में भी दिए जाएं। प्रबंध निदेशक ने आश्वासन दिया कि इस पर कार्रवाई गतिमान है, और आपकी समिति ने यह मांग 25 अगस्त को ऊर्जा सचिव जी की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में भी उठाई थी जिसकी कार्रवाई वर्तमान में गतिमान है इस बारे में आपको एक सैद्धांतिक सहमति पत्र से वह अवगत भी करवा चुके हैं इसलिए इसमें कार्रवाई जो भी होगी वह सकारात्मक ही होगी। इस पर समस्त उपस्थित बांध प्रभावितों के प्रतिनिधि मंडल ने उनका धन्यवाद ज्ञापित किया।
12. ज्ञापन के माध्यम से सबसे अंत में एमडी साहब से विशेष आग्रह किया गया कि जब तक हमारी उपरोक्त मांगे पूरी नहीं होती तब तक के लिए बांध प्रभावित क्षेत्र में कोई भी कार्य न करवाया जाए।
इस पर उन्होंने आश्वासन दिया है कि बहुत कम समय में आपकी उपरोक्त मांगों पर सकारात्मक कार्य वाही आरंभ हो जाएगी। समिति ने उनसे आग्रह किया कि जो लिखा पढ़ी आपके अस्तर से होनी है उसे आप शीघ्र से शीघ्र करके शासन को भेज देंगे तो, हम शासन स्तर पर जाकर के प्रयास करेंगे कि वह कार्य जल्दी से जल्दी हो जाए, और बांध प्रभावितों को राहत मिले






