National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

September 20, 2026 6:24 pm

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संपूर्ण वृतियों में ईश्वरीय प्रकाश का प्रकाशित होना ही दीपावली है — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 

वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”

 

संपूर्ण वृतियों में ईश्वरीय प्रकाश का प्रकाशित होना ही दीपावली है — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 

हमारे अनादिकालीन महापुरुषों ने दो दृष्टिकोण से त्योहार बनाए हैं एक इतिहास को कायम रखना और दूसरा संसार को अध्यात्मिकता का भान कराना। तो इसी क्रम में दीपावली भी एक महत्वपूर्ण पर्व है। दसों इंद्रियों का अपहृता मोह रुपी रावण के बध के बाद विजय दशमी का पर्व आता है दसों इंद्रियों पर हम विजय प्राप्त कर लेते हैं । जब तक दसों इंद्रियां रावणोन्मुख हैं संसारोन्मुख हैं रावण के अधीन रहती हैं अनुभव रुपी राम द्वारा रावण के बध के बाद ये ईष्टोन्मुख हो जाती हैं तब विजय दशमी आता है। उसके बाद धनतेरस आता है और धनतेरस के बाद दीपावली आता है। कहा गया है कि — *योग अगिन करि प्रकट करि शुभाशुभ लाय। बुद्धि शिरावे ज्ञान धृति ममता मल जरि जाए।। चित्त दिया भरि धरै दृढ़ समता दियट बनाए। भुत सिरावै ज्ञान धृत ममता मल जरि जाए।।* चित्त ही दीपक है, ईश्वरीय प्रकाश आयु के दिन रूपी तेल है, श्वास ही बाती है । यह त्रय तापों की ज्वाला में (दैहिक- दैविक -भौतिक) में जल रही है, काम क्रोध लोभ मद इत्यादि षडविकारो में जल रही है। दसों इंद्रियां व मन बुद्धि चित्त इन तेरहों जब ईश्वरीय प्रकाश से ओतप्रोत हो जाए तो इसी को धनतेरस कहा जाता है। आत्त्मिक संपत्ति ही स्थिर धन है । संसार धनतेरस के दिन खरीददारी करता है जब कि वो खुद आत्मिक संपत्ति से दलिद्र है। *कबिरा सभ जग निर्धना धनवंता नहिं कोय धनवंता सोइ जानिए जेके राम नाम धन होय।।* इसीलिए कहा गया है कि — *द्वार धनी के पड़ा रहे धक्का धनी के खाए कबहुं धनी नवाजिहैं द्वार छाडि नहिं जाए।।* संपदा दो हैं एक आसुरी संपदा दूसरा दैवीय संपद । तो हमारे सद्गुरु पूरनदाता होते हैं। उनकी कृपा से शरण-शानिध्य से धीरे धीरे आसुरी संपदा का शमन व दैवीय संपदा का बाहुल्य हो जाता है । धनतेरस के बाद ही दीपावली मनाई जाती है । ‘अवली’ माने पंक्ति होता है वैसे सद्गुरु कृपा से हमारे प्रत्येक वृतियों में ईश्वरीय प्रकाश प्रकाशित हो जाता है। यही दीपावली है एक भी वृत्ति इधर- उधर न जाए , ये पंक्तिबद्ध हो जाए, एकाकार हो जाए । तो प्रत्येक वृतियों में ईश्वरीय प्रकाश का संचार हो जाना ही दीपावली है । दीपक का पंक्तिबद्ध को ही दीपाली कहा गया है । तो ये सब आध्यात्मिक है लेकिन बाह्य जगत है तभी हम आध्यात्मिक की ओर सर्च करेंगे जब है ही नहीं तो पूछेगे कब? महापुरुषों ने दो दृष्टिकोण से त्योहार बनाए हैं । एक इतिहास को कायम रखना और दूसरा है आध्यात्मिक। परंपरागत दीपावली हम इतिहास के छाये में मना रहे हैं । जब हमें आत्मा के आधिपत्य में चलाने वाले सद्गुरु मिल जाए । आत्मा सत्य है सत्य के गूरु को ही सद्गुरु कहते हैं तो जब हम सत्य से जुडेंगे आश्रम से जुड़ेंगे तो इससे हमें भान होता है कि इससे हमारे जीवन में आत्मपरायणता में क्या लाभ है? इसीलिए कहा गया है कि — *राम नाम मनि दीप धरु जीह देहरी द्वार।*

*तुलसी भीतर बाहरेहु जो चाहसि उजियार।।* तुलसी दास जी का कहना है कि बाहर तो हम दीपक जला ले रहे हैं लेकिन अंदर तो अंधेरा ही अंधेरा है। लेकिन भीतर का प्रकाश कैसे होगा? तुलसीदास जी कहते हैं कि जो देहरी है उसका मुख उसमें भगवान का, राम नाम रूपी मणि का दीपक जलाएं तब भीतर भी उजाला दिखेगा । अभी क्या है? *भीतर तो हैया नहीं बाहर को प्रकाश। कह कबीर कब लौ हरी छपरा पर कै घास।।* दशो इंद्रियां संसार में संबंध बनाकर रख रही हैं वो हमारी आत्मा को अधोगति में लेकर जा रही है इसीलिए रावण से सब त्रस्त थे। तो दशरथ क्या है? दशरथ के लड़के थे राम । राम ही रावण को मार सकते हैं दूसरा कोई नहीं । तो विजयदशमी इसी को कहा गया है। दसवीं पर हम विजय पा गये दसों इंद्रियों पर हम विजय पा गये । कौन हरा सकता है? कौन मार सकता है? उसकी विधि कैसे मिलेगी? कि हम अपने अंदर के रावण को मार सके, तो वह बिधि राम से मिलेगी। राम माने एक परमात्मा । भजन तो सद्गुरु के पास है। राम है राम के अंदर ही सद्गुरु है राम भी वही है सद्गुरु भी वही है । सद्गुरु को भी ब्रह्म कहा गया *गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर: । राम को भी ब्रह्म कहा गया है ‘राम ब्रह्म परमारथ रूपा’ तो सब एक ही है । शिव के आराध्य राम और राम के अराध्य शिव। शिव ही आदि सद्गुरु है। शिव के अंतराल में जो क्षतता थी वही राम के अंदर भी थी । राम के भी आराध्य शिव थे । *इच्छित फल बिन शिव अवराधे । लही न कोटि योग सब साधे ।।* करोड़ों योग साधे बिना सद्गुरु के इच्छित फल नहीं मिल सकता। तो जब ओम जपने लगेंगे तो जो उनका स्वरूप है ओम में प्रतिष्ठित है वो अपने आप सद्गुरु का पहचान करा देंगे । इसीलिए गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि – **सुमरिय नाम रूप बिनु देखे। आवत हृदय सनेह बिसेषे।।* तो जहां नाम जपने लगेगा तो हमारे अंत: करण में तीनों मन -बुद्धि -चित्त दसों इंद्रियां में आत्मीक संपत्ति धीरे-धीरे आने लगेगा । इसीलिए माता मीरा ने कहा कि *पायो जी मैंने राम रतन धन पायो* तो अपने हृदय में ईश्वरीय प्रकाश (दीप) जलाने के लिए अपने हृदय में स्थित उस ईश्वर की शरण सद्गुरु के माध्यम से जाएं।

ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देऽर्जुन तिष्ठंति।

भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया।।

तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत।

तत्प्रसादात्परा॑ शांन्तिं स्थानं प्राप्स्ययसि शाश्वतम्।।गीता १८/६२-६३।।

ईश्वर का निवास सभी प्राणियों के हृदय में है किन्तु मनुष्य भ्रमवश मायारूपी यन्त्र में आरूढ़ होकर भटकता रहता है। किसी तत्त्वदर्शी महापुरुष की शरण जाकर निष्कपट भाव से उनकी टूटी फूटी सेवा और प्रश्न करने पर वह परमात्मा विदित हो जाता है –

तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।

उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्वदर्शिन:।। गीता ४/३४

सद्गुरु की शरण लेकर एक परमात्मा का भजन करने पर ज्ञान रूपी दीपक प्रज्वलित हो जाता है और उसका मार्गदर्शन परमात्मा द्वारा होने लगता है –

तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम्।

ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते।।

तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तम: ।

नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता।। गीता १०/१०-११

NM News live
Author: NM News live

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24 घंटे में घर चोरी का खुलासा, चार लाख के आभूषण व तीन स्मार्टफोन बरामद नशे की लत पूरी करने के लिए चोरी करने वाला आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने शत-प्रतिशत माल बरामद किया सहसपुर। कोतवाली सहसपुर पुलिस ने घर में हुई चोरी की घटना का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब चार लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण और तीन स्मार्टफोन बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, महमूदनगर रामपुर निवासी आकाश कुमार ने 17 सितंबर को कोतवाली सहसपुर में तहरीर देकर बताया था कि अज्ञात व्यक्ति ने रात के समय उसके घर से सोने-चांदी के आभूषण और स्मार्टफोन चोरी कर लिए। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक देहात और क्षेत्राधिकारी सहसपुर के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तथा संदिग्ध की तलाश के लिए मुखबिर तंत्र सक्रिय किया। 18 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घटना में शामिल आशिक पुत्र सलीम, निवासी महमूद नगर शंकरपुर, थाना सहसपुर, उम्र 27 वर्ष को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी किए गए आभूषण और तीन स्मार्टफोन बरामद किए। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी की गई। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह नशे का आदी है और नशे की पूर्ति के लिए उसने चोरी की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया। बरामद सामान: एक पीली धातु का मंगलसूत्र, एक जोड़ी पीली धातु के कानों के टॉप्स, चार जोड़ी सफेद धातु के बिछुए और तीन स्मार्टफोन। आरोपी का आपराधिक इतिहास: पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध वर्ष 2022 से 2026 तक चोरी, आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में पांच मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक जावेद हसन, कांस्टेबल नवबहार और कांस्टेबल अनुराग शामिल रहे।