National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

September 20, 2026 6:24 pm

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युग प्रवर्तक’ ‘युग महापुरुष’ ‘गाड’ (GOD) की भूमिका में स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ।

वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”

 

‘युग प्रवर्तक’ ‘युग महापुरुष’ ‘गाड’ (GOD) की भूमिका में स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ।

 

बिनु पग चले सुनहिं बिनु काना ।

कर बिनु करम करहिं विधि नाना।।

आनन रहित सकल रस भोगी।

बिन वाणी बकता बड़ जोगी।।

अर्थात महापुरुष अथवा सद्गुरु या ईश्वर शरीर से वे कहीं भी रहें लेकिन सूक्ष्म शरीर से वे संसार के अणु- अणु, कण-कण में विद्यमान रहते हैं, एक ही जगह से बैठे-बैठे वे सृष्टि में कहीं भी फंसे अपने भक्तों को आसन्न खतरों से अवगत कराते रहते हैं और बचाते रहते हैं । इसीलिए कहा गया है कि – *गुरु बसे बनारसी शिष्य लगावे नेह। *एक पल बिसरत नहीं एक हंस दो देह।।* ये सारे गुण आज समय के महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज में है। वे गाड GOD के रूप में कैसे कार्य करते हैं?

वास्तव में विभूतियों के तदनुरूप ईश्वर अनंत नामों से विभूषित हैं जैसे भगवान सद्गुरु महापुरुष ब्रम्हा परमात्मा आदि-आदि। बिना सद्गुरु के ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती वे ही भक्त और भगवान के बीच सेतु हैं। ईश्वर को इंग्लिश में GOD कहा जाता है अर्थात तीन अक्षर के संयुक्त नाम को ईश्वर कहा जाता है G से Genrator अर्थात उत्पत्तिकर्ता, O से Oprator अर्थात पालनकर्ता , D से Destroyer अर्थात संहारकर्ता जिन्हें क्रमशः ब्रम्हा विष्णु और महेश कहा जाता है। वास्तव में सद्गुरु अनंत विभूतियों का खजाना होते हैं उन्हीं अनंत विभूतियों में ये तीनों विभूतियां भी सम्मिलित हैं। GOD की भूमिका में समय के महापुरुष सद्गुरु परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज कैसे कार्य करते हैं? तो आइये इस पर बात किया जाए। अब जैसे उदाहरण के रूप में लें कि हम जिस भी अवस्था में हैं उसी अवस्था में सद्गुरु अर्थात परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के शरण सानिध्य में पहुंचे उनका दर्शन पर्शन किये जो भी कुछ बन पड़ा दंड प्रणाम किये अपने भाव को हमने उनके चरणों में अर्पित किया तो हम पर तुरंत तत्काल उनकी अनंत विभूतियां , उनकी दिव्य गुरुत्वाकर्षण शक्तियां भजन के परमाणु हम पर असर डालना शुरू कर देते हैं । ओम जप सद्गुरु सेवा ध्यान जो भी बताया गया उनके द्वारा वो हमारे अंतःकरण में गूंजती रहती है । हमारे हृदय के अंतराल में एक विशेष पावर के हलन- चलन का आभाष होने लगता है। चंद दिनों में ही हमें प्रत्यक्ष आभास होने लगता है कि हमारे हर कार्य में हर कदम पर हमको अंदर से कोई इंडिकेट कर रहा है इस इंडीकेशन का नाम ही अनुभव Experince है ; अर्थात सद्गुरु हृदय से रथी होकर मार्गदर्शन करने लगते हैं और हम उस इंडिकेशन उस अनुभव से चार प्रकार से इंडिकेट अर्थात निर्देशित होने लगते हैं- स्वप्न सुरा संबंधी अनुभव, स्थूल सुरा संबंधी अनुभव, सुषुप्ति सुरा संबंधी अनुभव और सम सुरा संबंधी अनुभव । (जिसकी जिस स्तर की साधना , त्याग, तपस्या संयम नियम होता है उसी स्तर से सद्गुरु उसे मार्गदर्शन करते हैं) इसी इंडिकेशन गाइड मार्गदर्शन के कारण ईश्वर अथवा सद्गुरु को G – Genrator अर्थात उत्पत्तिकर्ता, रचनाकार , रचयिता ब्रम्हा कहा जाता है क्योंकि वह शिष्य के हृदय से रथी होकर अनुभव को Genrate कर देता है इसी कारण उनका एक नाम Genrator है। इसी को गुरु – शिष्य संवाद गीता में सद्गुरु श्रीकृष्ण ने अपने शिष्य अर्जुन से कहा कि — तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तय:।

*नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता।।* अर्थात निरंतर ध्यान में लगे हुए साधकों पर पूर्ण अनुग्रह करते हुए मैं उनकी आत्मा से अभिन्न खड़ा होकर, रथी होकर अज्ञान से उत्पन्न हुए अंधकार को ज्ञान रूपी दीपक के द्वारा प्रकाशित कर नष्ट करता हूं। अब अगले चरण में साधक के संयम साधना भजन के अनुरूप सद्गुरु साधक का मार्गदर्शन के साथ- साथ योगक्षेम करने लगते हैं उठाने -बैठाने लगते हैं अंगुली पकड़कर चलाने लगते हैं प्रकृत के खोह-खंद से, द्वंद से, विभीषिका से बचाते हुए मां के रोल में उसे पालते हैं पोषते हैं। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के इस रोल को O से Oprator पालनकर्ता की संज्ञा दी गई है। इसी को गीता में सद्गुरु श्रीकृष्ण ने शिष्य अर्जुन से कहा – उपद्रष्टानुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वर:।

परमात्मेति चाप्युक्तो देहेस्मिन्पुरुष: पर:।। मैं हृदय में हाथ पांव जितना समीप होकर अपने शिष्य को’अनुमन्ता’ अर्थात अनुमति प्रदान करता हूं । ‘भर्ता’ – ‘भोक्ता’ भरण- पोषण करता हूं । कहने का आशय यह है कि सद्गुरु साधक के लौकिक और पारलौकिक जीवन की सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेते हैं। बस उसे केवल आपरेट (संचालित) होते रहने की जरूरत है जैसा उसका आपरेटर (पालनकर्ता/ संचालनकर्ता) अर्थात सद्गुरु आपरेट करे बस उसी के अनुसार वह परमात्मपर्यंत की दूरी तय करने तक यंत्रवत चलता रहे। अब प्रश्न उठता है कि प्रकृति के अनंत खोह -खंद से जन्म-जन्मांतर से चले आ रहे अच्छे-बुरे संस्कारों के सफर से, विकारों के दबाव से कैसे शिष्य निकलकर, सद्गुरु द्वारा Oprate होकर , संचालित होकर माया के परिक्षेत्र से परमात्मा के परिक्षेत्र में पहुंचता है? अनादिकालीन ऋषि-मुनियों का यह तर्क है उनका शोध है यह अनुभव है कि यदि एक भी अच्छे-बुरे संस्कार बाकी है तो तत्वज्ञान हो ही नहीं सकता। इसलिए तत्वज्ञान की प्राप्ति करनी है तो विकारों से संस्कारों से मुक्त होना पड़ेगा, उपराम होना पड़ेगा। अब विकार कटेंगे कैसे? विकारों/ संस्कारों को काटने की सद्गुरु/ ईश्वर की उस प्रशक्ति को D – Destroyer अर्थात संहारकर्ता कहते हैं। साधक के हृदय के अन्तराल में जन्म जन्मांतर के संस्कारों/ विकारों की रील को दीनदयाल सद्गुरु ही संहार करते हैं। बिना समय के महापुरुष सद्गुरु की कृपा के इन संस्कारों/ विकारों के संहार के भगवत्प्राप्ति नहीं हो सकती। हमारे जन्म-जन्मांतर के अच्छे- बुरे संस्कार हमारे जन्म-मृत्यु का कारण बनते हैं। एक भी संस्कार बाकी है तो हमें जन्म लेना पड़ेगा। वही जन्म सराहनीय है जिसके पीछे मृत्यु नहीं और वही मृत्यु सराहनीय है जिसके पीछे जन्म नहीं और यह स्थिति सद्गुरु कृपा से ही प्राप्त होगी। इसी को गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि —

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय।

अहं कृत्स्नस्य जगत: प्रभव: प्रलयस्तथा।।

 मृत्यु: सर्वहराश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम्।।

कीर्ति: श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृति: क्षमा।। और अंत में भगवान श्री कृष्ण निर्णय देते हैं कि — अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थिरम्।

भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च।। अर्थात मैं ही अर्थात सद्गुरु समस्त भूतों को उत्पन्न करने वाला, भरण-पोषण करने वाला और अंत में संहार करने वाला हूं; बाहर जन्म भीतर जागृति, बाहर पालन और भीतर योगक्षेम का निर्वाह, बाहर शरीर का परिवर्तन और भीतर सर्वस्व का विलय अर्थात भूतों के उत्पत्ति के कारणों का लय और लय के साथ ही स्वस्वरूप की प्राप्ति का कारण मैं ही हूं। तो ये है GOD ईश्वर की भूमिका में विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित ब्रह्मऋषि करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज । जो आज समय के महापुरुष हैं जिनको गीता भाष्य यथार्थ गीता को लिखने के लिए आकाशवाणी हुई और आज यथार्थ गीता पूरे विश्व की मानवता को ईश्वरीय ज्ञान के प्रकाश से आलोकित कर रही है। धर्म-कर्म के नाम पर फैली संसार की अनंत कुरीतियों रुढ़ियों को भष्मसात कर एक परमात्मा के मार्ग पर चलने के लिए पूरी मानवता को प्रशस्त कर रही है। एक रहने नेक रहने मानवता के छांव में, परमात्मा के वरदहस्त में रहने और उनको पाने के लिए गीतोक्त साधना करें मानव मात्र का एकमात्र धर्म शास्त्र यथार्थ गीता को अंगीकार करें, आत्मसात करें और अपने आप को आत्मार्पित करें ।

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Author: NM News live

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24 घंटे में घर चोरी का खुलासा, चार लाख के आभूषण व तीन स्मार्टफोन बरामद नशे की लत पूरी करने के लिए चोरी करने वाला आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने शत-प्रतिशत माल बरामद किया सहसपुर। कोतवाली सहसपुर पुलिस ने घर में हुई चोरी की घटना का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब चार लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण और तीन स्मार्टफोन बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, महमूदनगर रामपुर निवासी आकाश कुमार ने 17 सितंबर को कोतवाली सहसपुर में तहरीर देकर बताया था कि अज्ञात व्यक्ति ने रात के समय उसके घर से सोने-चांदी के आभूषण और स्मार्टफोन चोरी कर लिए। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक देहात और क्षेत्राधिकारी सहसपुर के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तथा संदिग्ध की तलाश के लिए मुखबिर तंत्र सक्रिय किया। 18 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घटना में शामिल आशिक पुत्र सलीम, निवासी महमूद नगर शंकरपुर, थाना सहसपुर, उम्र 27 वर्ष को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी किए गए आभूषण और तीन स्मार्टफोन बरामद किए। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी की गई। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह नशे का आदी है और नशे की पूर्ति के लिए उसने चोरी की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया। बरामद सामान: एक पीली धातु का मंगलसूत्र, एक जोड़ी पीली धातु के कानों के टॉप्स, चार जोड़ी सफेद धातु के बिछुए और तीन स्मार्टफोन। आरोपी का आपराधिक इतिहास: पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध वर्ष 2022 से 2026 तक चोरी, आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में पांच मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक जावेद हसन, कांस्टेबल नवबहार और कांस्टेबल अनुराग शामिल रहे।