ओसियां ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
कृतार्थ होने को आतुर है स्वामी अड़गड़ानंद जी की पावन जन्म भूमि
75 वर्ष पूर्व जिस मां ने जना, जिस मिट्टी में पले-बढ़े, जिन सखाओं में खेले कूदें, जिन सांसारिक शिक्षकों से पार्थिव शिक्षा प्राप्त किये, जिन आबोहवा की खुशबू ने उन्हें स्पर्श किया, जिन पास पड़ोस की अंगुलियों ने उन्हें चलना सिखाया, प्रतापनगर ओसियां राजस्थान के सभी स्वागताकांक्षी आज विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित ब्रह्मऋषि करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के चरण धूलि से कृतार्थ होने को आतुर है, वे सभी उनके एक झलक से अपने आप को ब्रम्हांड के अनंत शास्वत सुख में सराबोर होने को व्यग्र हैं, उनके लिए उनका हर एक पल हजारों वर्षों के बराबर है । वीरों के वीर महा शूरवीर, महापराक्रमी महाराणा प्रताप की इस बलिदानी मिट्टी प्रतापनगर ओसियां का पूरा विश्व सदैव ऋणी रहेगा। अज्ञान से आच्छादित संसार को यथार्थ गीता के ज्ञान से प्रकाशित करने वाले महापुरुष पूज्य श्री गुरुदेव भगवान का अपने जन्मभूमि पर पदार्पण भगवान बुद्ध की अपनी जन्मभूमि को कृतार्थ करने के समान हैं। १० तारीख को प्रतापनगर ओसियां में पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के स्वागत के लिए ब्रम्हांड के देवी-देवता, ग्राम देवी, व अनादिकालीन महापुरुष अपने सूक्ष्म शरीर से पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत करेंगे। दुनिया को सबसे सरल और स्पष्ट शब्दों में मोक्षप्रद ज्ञान से विभूषित करने वाले महापुरुष पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के स्वागत में उनकी जन्म भूमि न जाने क्या-क्या अपने दिलों में अरमान पाले होंगी। धन्य है वह धरती , धन्य है वे मां बाप, धन्य है वहां की आबो-हवा जिन्होनें पूरे विश्व को अमरता प्रदान करने का खुला आमंत्रण देने वाले ऐसे महापुरुष को जन्म दिया। पूरे विश्व के किसी भी मिट्टी को यदि ऐसे आलौकिक धर्मोपदेशक को श्रेय जाता है तो वह है राजस्थान की बलिदानी मिट्टी। राजस्थान में वीर सपूतों को जन्म देने वाली माताओं के लिए एक कहावत है कि “*हे मां ऐसा जन जैसा दुर्गादास*” लेकिन अब आज से राजस्थान में यह कहावत प्रचलित होगी कि “*हे मां ऐसा जन जैसा श्री स्वामी जी सरकार*”। अहोभाग्य मां प्रतापनगर ओसियां की मिट्टी को आज संसार के हम सभी भक्तों की तरफ से कोटि-कोटि नमन, साधुवाद, साभार।






