स्टेट ब्यूरो बांकेलाल निषाद प्रणव
ब्रम्हलीन हो गये श्री बच्चा महाराज जी के शिष्य पहाड़ी बाबा
मध्यप्रदेश — मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के सिमरनघाट के पास कुड़िया कुटी पर श्री पहाड़ी बाबा जी जिनकी उम्र 80 वर्ष थी कल उनका शरीर शांत हो गया। धरा धाम का त्याग कर वे भगवान के चरणों की असीम शांति में विलीन हो गये। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करें । आज उन्हें समाधि दी गयी । उन्हें हजारों भक्तों ने श्रद्धांजलि अर्पित की । श्री परमहंस आश्रम के वरिष्ठ संत उनके समाधी कार्यक्रम पर श्री राजाराम महाराज जी, श्री लाले महाराज जी , श्री संजयानंद महाराज जी , श्री विनोदानंद महाराज जी , श्री भरत बाबा जी उपस्थित रहे । इस अवसर पर सभी भक्तों को मानवमात्र का धर्मशास्त्र यथार्थ गीता भेंट किया गया। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज कहते हैं कि वह जन्म सराहनीय है जिसके पीछे मृत्यु न हो और वह मृत्यु सराहनीय है जिसके पीछे जन्म न हो और यह संभव है सद्गुरु की शरण और उनके द्वारा बताये दो-ढाई अक्षर का नाम ‘ओम्’ ‘राम’ अथवा ‘शिव’ के जप से। श्रद्धा से नाम जप और सद्गुरु का ध्यान जहां गति पकड़ा तो भगवान ह्रदय से रथी होकर मार्गदर्शन करने लगेंगे । पूज्य श्री गुरुदेव भगवान बताते हैं कि जब तक भगवत्प्राप्ति नहीं हो जाएगी तब तक भगवान आपका साथ नहीं छोड़ेंगे चाहे कितना भी जन्म लग जाएं। पहाड़ी महाराज जी या अन्य संत जो भी ब्रम्हलीन होते हैं उनका ईश्वरीय ज्ञान हर जन्म में स्मृति में रहता है अंततः जिस जन्म में उनका परमात्मा से साक्षात्कार होता है तो उस जन्म वाले शरीर को भवप्रत्यय योगी कहा जाता है। सो पूज्य श्री गुरुदेव भगवान कहते हैं कि ओम् जपें और सद्गुरु का ध्यान करें और यथार्थ गीता को पढ़ें धर्म विषयक सारी भ्रांतियां दूर हो जायेगी।






