अम्बेडकर नगर ब्यूरो मनोज तिवारी
तहसील जलालपुर अंतर्गत नसोपुर की घटना का पर्दाफाश, 
2018 में तनुज अग्रवाल ने ममता सिंह पत्नी राना सिंह के नाम गाटा संख्या 746 व 727 का बैनामा कर दिया। शिवचरन रामचरन राम अचल पुत्र गण वंशू व प्रेमशीला पत्नी शिवचरन आदि के हस्तक्षेप से जमीन को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। 2021 में सेक्शन 24 के तहत उस जमीन का पत्थल नसब हुआ उपरोक्त रामचरन आदि दबंगई दिखाते हुए हदबरारी से हुए पत्थल नसब के कुछ पत्थल को उखाड़ दिया । फिर ममता सिंह पक्ष रामचरन आदि के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश एसडीएम से कराया लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुआ ममता सिंह पक्ष दौड़ता रहा लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुआ । उधर रामचरन आदि उक्त हदबरारी के खिलाफ वाद दायर एसडीएम कोर्ट पर दिये साल भर वाद दायर पेंडिंग रहा । 12 जनवरी 2024 को वाद दायर स्वीकार हुआ एसडीएम जलालपुर ने वादयदार स्वीकार करते हुए स्टेटसको का आदेश भी दिया। जैसे ही एसडीएम जलालपुर ने स्टेटस को किया तुरंत जाकर शिवचरन आदि ने बाकी बचे पत्थल को उखाड़ कर उसको जोत लिए । 28 अगस्त 2024 एसडीएम जलालपुर द्वारा हदबरारी का आदेश हुआ और उन्होंने तहसीलदार को मार्क किया । तहसीलदार ने 5–6-सितम्बर को राजस्व निरीक्षक शिवपूजन सिंह के नेतृत्व में राजस्व टीम गठित कर पेमाइश कर फिर से पत्थल नसब कराया। 14 सितम्बर 2024 को ममता सिंह के ज्येष्ठ हनुमान सिंह ट्रैक्टर से उस जमीन की जुताई कर रहे थे। इसी दौरान शिवचरन आदि ने उन पर जानलेवा हमला किया, हल्ला गोहार के बाद रामसिंह भगवान सिंह जयसिंह आकर बीच बचाव किये। उसी दिन 4 बजकर 15 मिनट शाम को एफआईआर नंबर 355/ 24 धारा 191(2) , 115 (2), 118( 1, ) 351 (2) के तहत शिवचरन रामचरन राम अचल व प्रेमशीला के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया। और उसी दिन रामचरन आदि ने एफआईआर नंबर 0356 /24 धारा, 115 (2) , 74 , 324 (4) एससी एसटी 3(1)द, 3(1) हनुमान सिंह, व उनके साथ में बीच बचाव करने वाले राम सिंह भगवान सिंह पुत्रगण स्वर्गीय शिवमूरत सिंह, जयसिंह पुत्र स्वर्गीय सभाजीत सिंह के खिलाफ मुकदमा क्रास करा दिया। दुर्भाग्यवश 20 सितम्बर 2024 को अविनाश वर्मा की ब्रेजा गाड़ी से UP 45 AR 0236 से प्रेमशीला का एक्सीडेंट हो गया। वह केजीएमयू रेफर हो गई। एक हफ्ते बाद उसकी मृत्यु हो गई। शिवचरन आदि एक्सीडेंट को हनुमान आदि की साजिश बता दिये । जबकि अविनाश वर्मा एफिडेविट भी देने को तैयार हैं कि मेरा हनुमान आदि से कोई सरोकार नहीं है। अविनाश वर्मा एक सम्मानित सामाजिक और एलआईसी जलालपुर में डीओ के पद पर कार्यरत हैं। उनका हनुमान सिंह आदि से कोई लेना देना नहीं है। अब प्रश्न उठता है कि हनुमान सिंह आदि कानून न्याय का सम्मान कर रहे हैं कि राम चरन आदि। शुरू से कहानी को देखा जाए तो रामचरन आदि ने कानून को धता बता कर पत्थल उखाड़ा हनुमान आदि एफआईआर के लिए दौड़ते रहे लेकिन उनका एफआईआर नहीं हुआ। दोबारा एसडीएम स्टेटस को किये कि उभय पक्ष कोई वहां नहीं जायेगा तब भी राम चरन आदि जाकर बाकी बचे पत्थल को उखाड़ कर जमीन पर अतिक्रमण कर लिए। फिर दोबारा पत्थल नसब हुआ तो उसको हनुमान सिंह अपनी बैनामाशुदा जमीन को जोत रहे ही थे कि राम चरन आदि उन पर जानलेवा हमला कर दिए। फिर दोनों तरफ से एफआईआर दर्ज हो गया। जलालपुर तहसील की शिथिलता का यह परिणाम है कि आज कहानी यहां तक पहुंच गई। समय रहते यदि कार्यवाही हो गई होती तो शायद आज न तो हनुमान आदि जेल जाते और न ही कहानी यहां तक आती।
Author: NM News live
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