National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

March 23, 2026 6:53 pm

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श्री परमहंस आश्रम बलरामपुर में संतों के मुखारविंद से अमृत वर्षा।

जौनपुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”

श्री परमहंस आश्रम बलरामपुर में संतों के मुखारविंद से अमृत वर्षा।

जनपद जौनपुर श्री परमहंस आश्रम बलरामपुर चंदवक पर सत्यान्वेशी मोक्षदायिनी केंद्र शक्तेषगढ़ आश्रम से यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष कालजयी परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्यों का शुभागमन हुआ। हजारों की संख्या में भक्तगण, श्रद्धालु उक्त श्रीमान संतों का दर्शन पर्शन कर कृतार्थ हुए व आशीर्वचन प्राप्त किए । विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया था । जिसमें पूज्य श्री चिंतनमयानंद जी महाराज ने अपने उद्बोधन में बताये कि गीतोक्त कर्म क्या है ? उन्होंने कहा कि कुछ भी कर डालने का नाम कर्म नहीं है , निर्धारित किया हुआ कर्म ही वास्तविक कर्म है। और वो है स्वाश – प्रस्वास का यजन ही यज्ञ है और उसको चरितार्थ करना ही कर्म है । ओम या राम का जप करना चाहिए । पूज्य श्री तानसेन महाराज जी ने छोटे छोटे दृष्टांतों के माध्यम से एक ईश्वर के भजन चिंतन पर बल दिए । उन्होंने बताया कि महापुरुष के शरण सानिध्य से ही ईश्वरीय राह मिलेगी तभी कल्याण होगा । पूज्य श्री लाले महाराज जी बताये कि अपने मन को कैसे अंतर्मुखी करें ? उन्होंने कहा कि सबका मन संसार के भोगों में आसक्त है लेकिन उसको आत्म चिंतन में प्रवृत्त करने के लिए नाम, रूप ,लीला , और धाम में कहीं न कहीं मन को लगाये रखना चाहिए तभी मन का हलन चलन शांत होगा । ये तभी संभव है जब सद्गुरू हृदय से रथी हो जाएं और मार्गदर्शन देने लगें । यथार्थ गीता ही मानव धर्म शास्त्र है सबको अध्ययन करना चाहिए। पूज्य श्री कृष्णानंद महाराज जी ने बताये कि नवधा भक्ति क्या है? कैसे प्राप्त करें ? संतों के शरण सानिध्य की भक्ति की प्रथम सीढ़ी ॐ अथवा राम का जप करना तभी भगवान की अनुकूलता होगी और तभी मुक्ति संभव है । उन्होंने कहा कि घर घर यथार्थ गीता होनी चाहिए तभी संसार से पार पाया जा सकता है। उक्त सभी श्रीमान संतों ने पूज्य गुरुदेव भगवान की दिव्य व अलौकिक ईश्वरीय वाणी यथार्थ गीता के अध्ययन व उसके बताये मार्ग पर संसार को चलने के लिए प्रेरित किया और बल दिया कि पूज्य गुरुदेव भगवान समय के महापुरुष हैं कालजयी हैं उनकी यथार्थ गीता मानवमात्र का धर्म शास्त्र है न कि किसी विशेष देश, समुदाय, संप्रदाय का। उन्होंने बताया कि यज्ञ कर्म धर्म जाति भक्ति आत्मा सनातन आदि का शास्वत व्याख्या यथार्थ गीता में पूज्य गुरुदेव भगवान ने किया है जिसका पान कर संसार धार्मिक प्रपंचों से निकल कर अपने लौकिक और पारलौकिक जीवन को सार्थक कर सकता है। इस सुभ अवसर पर पूज्य श्री चिन्तनमयानंद जी महाराज, पूज्य श्री तानसेन जी महाराज पूज्य श्री लाले जी महाराज व कृष्णानंद जी महाराज आदि सत्यान्वेशी संत विद्यमान रहे।

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Author: NM News live

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