National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

September 20, 2026 8:49 pm

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गुरु पूर्णिमा पर गुरुदेव भगवान की पूजा करते हैं सत्यान्वेशी शिष्य — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 

वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”

 

गुरु पूर्णिमा पर गुरुदेव भगवान की पूजा करते हैं सत्यान्वेशी शिष्य — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 

 

त्रिकालज्ञ महापुरुष स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के दर्शनार्थ आयेंगे लाखों भक्त 

 

गुरु ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वर:।

गुरुरसाक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

 

भारत एक ऐसी तपोभूमि है जहां से अपने अंतःकरण में समुद्र मंथन कर महापुरुषों ऋषि-मुनियों ने संसार को ज्ञान गंगा में डुबकी लगाकर संसार रूपी समुद्र से भव सागर को पार करने का उपाय बताया है। केवल उपाय ही नहीं बताया बल्कि ब्रम्ह विद्या रूपी एक ऐसी आध्यात्मिक सूत्र का आविष्कार किया जिसके बताये मार्ग पर चल कर संसार अपने जीवन की जटिल गुत्थियों को सुलझाते हुए परमात्मा का दीदार कर सकता है। ब्रम्ह विद्या के आविष्कारक जन्म- जन्मांतर के संस्कारों को भस्मसात कर परमात्मा का दीदार कराने वाले उस खेवनहार का नाम ही सद्गुरु है और जो दीदार करते हैं वे ही सत्यान्वेशी शिष्य हैं जिन्हें महापुरुष भगवान इत्यादि विभूतियों से भी विभूषित किया गया है। गुरु – शिष्य परंपरा की यह अनुपम जोड़ी जन्म- जन्मांतर से तब तक चलती है कि जब तक शिष्य अपनी शिष्यता से गुरु के रुप में परिणत न हो जाए। गुरु – शिष्य परंपरा की अनंत व पवित्र पावन सफर में हर वर्ष आने वाली गुरु- पूर्णिमा शिष्य द्वारा अपने गुरु भगवान की पूजा का एक महापर्व है। जिसे महर्षि वेदव्यास के नाम पर व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। गुरु की आज्ञा से विरक्त व विचरण शील सत्यान्वेशी शिष्य गण दुनिया में कहीं भी रहें गुरु पूर्णिमा के दिन वे अपने गुरु भगवान की पूजा के लिए गुरु पूर्णिमा पर अवश्य आते हैं। सृष्टि के अनादिकाल से महापुरुषों संत महात्माओं ऋषि-मुनियों की हजारों श्रृंखलाओं में महर्षि वेदव्यास जिन्होंने श्रृति ज्ञान की परंपरा को तोड़ते हुए चार वेद छः शास्त्र अट्ठारह पुराणों की अद्भुत रचना कर दुनिया को जीवन की महत्ता मानवता का लक्ष्य लौकिकता को साधकर पारलौकिकता की पराकाष्ठा में विश्वास आदि महानतम विचारों को संसार के समक्ष न केवल प्रस्तुत किया बल्कि उस पर क्रियात्मक चलने का विधान भी बताया। ऋषि पाराशर के सुपुत्र महर्षि वेदव्यास ने सद्गुरु को एक पूजनीय पवित्र निर्विकार निर्मल शास्वत कालजयी अलमस्त सर्वज्ञ जैसे अनंत विभूतियों से विभूषित कर संसार के समक्ष परोस कर संसार को एक अद्वितीय मोक्षप्रद आइना दिखाया। जिस पर महात्मा कबीर मुहर लगाते हुए सद्गुरु के विषय में अपना अनुभव बताते हुए कहते हैं कि — गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए।। गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोक्ष। गुरु बिन लखै न सत्य को गुरु बिन मिटै न दोष।।

उपरोक्त लिखी महापुरुषों की वाणियां अक्षरशः सत्य है। सद्गुरु वह सत्ता है जिसकी कृपा मात्र से महान डकैत रत्नाकर वाल्मीकि बन गए। जिन्हें राम कहने नहीं आता था उन्होंने विश्व प्रसिद्ध राम के चरित्र को सर्वाधिक क्लिष्ट भाषा संस्कृत में “रामायण” लिखा। अंगुलिमाल जिनके आतंक से बड़े से बड़े राजा आतंकित रहते थे वे सद्गुरु की कृपा से आतंक के रास्ते को छोड़कर भगवान के रास्ते को पकड़ लिए और अरिहंत हो गये। सद्गुरु महिमा का असर अनपढ़ कबीर पर भी पड़ा- *मसि कागज छूयो नहीं कलम गह्यो नहिं हाथ। चारो जुग की महातम मुखन सुनाई बात।।*

कबीर की ऐसी वाणी निकली कि विश्वविद्यालयों के शोध छात्र आज भी रिसर्च करते हैं। रिसर्च करने के बावजूद भी उनके ज्ञान के तह तक नहीं पहुंच पाते। सद्गुरु की कृपा आज के महापुरुष विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म- शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के गुरुदेव भगवान पूज्य श्री स्वामी परमहंस परमानंद जी महाराज (दादा गुरु) पर भी पड़ा। कबीर रत्नाकर की तरह आप भी पार्थिव शरीर से पढ़े लिखे नहीं थे केवल तीन दिन विद्यालय का मुख देखें थे। लेकिन जब उनकी वाणी निकलती थी तो बड़े से बड़े वेदांती प्रोफेसर निरुत्तरित होकर अपनी विद्वत्ता के हथियार उनके चरणों में डाल कर प्रणत हो जाया करते थे। दादा गुरु कहा करें हो-

*रहिमन अगम बात कहन सुनन के नाहिं । जिन्ह देखा सो कहा नहीं कहा सो देखा नाहिं।।* दादा गुरु में वह क्षमता थी कि संसार को जो जिस भाषा में चाहे उसको उसी की भाषा में संकल्प पकड़ कर आध्यात्मिक ज्ञान प्रदत्त कर देते थे। उन्हीं की कृपा से उनके कमलवत चरणों में लोटकर कठिन तपस्या के बाद अवतरित उनके शिष्य जो आज संसार के लिए आईकान हैं परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज जिन्होंने मात्र कक्षा तीन तक पढ़े हैं लेकिन दादा गुरु की उनके ऊपर ऐसी ईश्वरीय गुणों की बरसात हुई कि उन्होंने यथार्थ गीता के दिव्य आलोक से पूरे विश्व को आलोकित किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने शंका समाधान लिखकर संसार के जटिल से जटिल गुत्थियों को सुलझाने का काम किया। कबीर दास की जटिल अनसुलझे पहेलियों को अमृतवाणी के रूप में सरलीकृत कर बारह भाग में संसार के समक्ष प्रस्तुत है। एकलव्य का अंगूठा, अंग क्यों फड़कते है? क्या कहते हैं? अपने गुरुदेव भगवान की तपस्यारत जीवन वृतांत को आत्मानुभूति एवं जीवनादर्श के नाम से प्रस्तुत किया। हिंदू जीवन पद्धति नहीं एक साधना है, पतंजलि योग शास्त्रीय प्राणायाम इत्यादि दर्जनों धार्मिक साहित्यों को लिखकर संसार को एक रहने नेक रहने का संदेश दिया। जिन पर आने वाले शोध छात्रों की पीढ़ियां रिसर्च करने को तैयार बैठी हैं। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज का शरण सानिध्य, उनके विराट आध्यात्मिक ज्ञान की आभा में यंत्रवत चलने वाले अनगिनत सत्यान्वेशी परमात्मा पथ के पथिक, परमात्मपर्यंत की दूरी तय करने में लगे हैं। कुछेक विरक्त उनकी शरण में हें कुछेक विरक्त उनके आदेश से विचरण में है और अधिसंख्य गृहस्थ जीवन में रहकर लौकिक जिम्मेदारी को निर्वहन करते हुए पारलौकिक जीवन को सुखमय बनाने में लगे हैं। गुरु पूर्णिमा महापर्व पर पूज्य गुरुदेव भगवान के जो विचरण शील शिष्य हैं या जो उनके आदेश से धरा- धाम में कहीं भी एकांत में भजन कर रहे हैं , वे सभी गुरुदेव भगवान की पूजा अर्चना के लिए इकट्ठे होते हैं; यहां तक कि जो गृहस्थ है वे भी गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुदेव भगवान के दर्शनार्थ देश- विदेश से आ जाते हैं। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान कहते हैं कि सद्गुरु वह शास्वत कालजयी अलमस्त सत्ता है जिसकी खुशबू को पाने के लिए बुद्ध महावीर राजा भर्तहरी पूरनमल गोपीचंद आदि चक्रवर्ती सम्राट अपने राज पाट के सुख का परित्याग कर दिया और सद्गुरु की आज्ञा में परमात्म पथ की दूरी तय कर लिया। इतना ही नहीं पूज्य गुरुदेव भगवान कहते हैं सद्गुरु अपने शिष्यों को गुरु बना के ही छोड़ते हैं न कि शिष्य और सद्गुरु के ज्योतिर्मय निर्झर ज्ञान के प्रकाश से सांसारिक समाज से बहिष्कृत को संत शिरोमणि का दर्जा मिला कबीर रैदास माता शबरी केवट आदि संत शिरोमणि इसके उदाहरण है। रामबोला जिसके जन्म लेते ही मां मर गयी पिता मर गये जो पाली वो भी मर गयी गांव के लोग उन्हें राक्षस कहते थे कोई उनके पास नहीं बैठता था। लेकिन सद्गुरु नरहर्यानंद जी महाराज की ऐसी कृपा हुई कि रामबोला महान तुलसी दास हो गया। रामचरितमानस लिखे जो संसार के समक्ष है। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान कहा करते हैं कि सद्गुरु एक अवस्था है रहनी है सद्गुरु साकार रूप में एक जगह विराजमान रहते हैं और अपनी निराकार रहनी से धरा- धाम पर रहने वाले शिष्यों भक्तों संत महात्माओं श्रद्धालुओं को संभालते रहते हैं और उनका योगक्षेम करते रहते हैं। इसलिए कहा गया है कि गुरु बसे बनारसी शिष्य लगावे नेह। एक पल विसरत नहीं एक हंस दो देह।।‌

बिनु पग चले सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करे विधि नाना।। आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु वाणी वकता बड़ जोगी।

ध्यान मूलं गुरु मूर्ति पूजा मूलं गुरु पदं मंत्र मूलं गुरु वाक्यं मोक्ष मूलं गुरु पदं।। गुरु महिमा में लिखी ये दिव्य उक्तियां सद्गुरु की महिमा को बखान करने में अल्प हैं। सद्गुरु अनंत और उनकी महिमा अनंत हैं। करोड़ों भक्तों के हृदय से रथी होकर वे क्या – क्या लीला करते हैं वह भक्त ही जानता है। कुछ लीलाएं कहने में तो आती है लेकिन कुछ को व्यक्त नहीं कर पाता वह भक्त। सद्गुरु का साधक के हृदय से रथी होकर विशेष जागृति का नाम ही अनुभव है जिसे शब्द भी कहा जाता है। शब्द की विशेषताओं पर महात्मा कबीर ने कहा है कि — शब्दै मारा गिर पड़ा शब्द छुड़ाया राज। जिन जिन शब्द विवेकिया तिनको सर गये काज।। उसी शब्द को पाने के लिए उसी शब्द में समाहित होने के लिए सद्गुरु की कृपा की आवश्यकता होती है जिसे चक्रवर्ती सम्राटों ने अपना राजपाट छोड़ दिया। उसी गुरु कृपा को पाने के लिए 10 जुलाई को 15 से 20 लाख की संख्या में श्रद्धालुओं भक्तों विभिन्न मठों के संत- महात्माओं का आगमन श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ में हो रहा है। जहां पर ब्रह्म बेला से ही पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की कृपा भक्तों पर बरसेगी। ऐसे उद्धारकर्ता गुरु भगवान के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम चरण वंदन।

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Author: NM News live

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24 घंटे में घर चोरी का खुलासा, चार लाख के आभूषण व तीन स्मार्टफोन बरामद नशे की लत पूरी करने के लिए चोरी करने वाला आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने शत-प्रतिशत माल बरामद किया सहसपुर। कोतवाली सहसपुर पुलिस ने घर में हुई चोरी की घटना का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब चार लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण और तीन स्मार्टफोन बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, महमूदनगर रामपुर निवासी आकाश कुमार ने 17 सितंबर को कोतवाली सहसपुर में तहरीर देकर बताया था कि अज्ञात व्यक्ति ने रात के समय उसके घर से सोने-चांदी के आभूषण और स्मार्टफोन चोरी कर लिए। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक देहात और क्षेत्राधिकारी सहसपुर के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तथा संदिग्ध की तलाश के लिए मुखबिर तंत्र सक्रिय किया। 18 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घटना में शामिल आशिक पुत्र सलीम, निवासी महमूद नगर शंकरपुर, थाना सहसपुर, उम्र 27 वर्ष को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी किए गए आभूषण और तीन स्मार्टफोन बरामद किए। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी की गई। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह नशे का आदी है और नशे की पूर्ति के लिए उसने चोरी की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया। बरामद सामान: एक पीली धातु का मंगलसूत्र, एक जोड़ी पीली धातु के कानों के टॉप्स, चार जोड़ी सफेद धातु के बिछुए और तीन स्मार्टफोन। आरोपी का आपराधिक इतिहास: पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध वर्ष 2022 से 2026 तक चोरी, आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में पांच मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक जावेद हसन, कांस्टेबल नवबहार और कांस्टेबल अनुराग शामिल रहे।