प्रयागराज ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
महाकुंभ की तैयारी को लेकर
पहुंचे श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ से संत
डाक्टर पीके यादव के गृह-प्रवेश पर संतों ने दिया आशीर्वचन
मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।
राम भक्ति जहं सुरसरि धारा। सरसइ ब्रम्ह विचार प्रचारा।।

चलता फिरता संतों का समाज ही प्रयागराज है। महाकुंभ प्रयागराज में देश विदेश से आ रहे संतो का आगमन शुरू हो गया है ईश्वर पथ के मार्ग को आसान बनाते हैं संत , उन पथ पर अपने शिष्य को चलाकर सुगम बना देते हैं। देश विदेश से आए हर विचारधारा के संतों का धार्मिक कैंप प्रयागराज में लगना शुरू हो गया है। इसी परिप्रेक्ष्य में मोक्षदायिनी ज्ञान गंगा केंद्र श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ के संत भी पहुंच कर कुंभ की स्थिति का जायजा लिए और श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ के तत्वावधान में लगने वाले यथार्थ गीता प्रचार – प्रसार कैंप सेंटर का जायजा भी लिए। जिसमें विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्य पूज्य श्री लाले महाराज जी, पूज्य श्री राकेशानंद जी महाराज, पूज्य श्री वरिष्ठानंद जी महाराज, पूज्य श्री अवधेशानंद जी महाराज, पूज्य श्री जयप्रकाशानंद जी महाराज, पूज्य श्री दिनेशानंद जी महाराज, पूज्य श्री प्रद्युम्न जी महाराज पहुंचे। महाकुंभ के बाद उक्त सभी सत्यान्वेशी संतों ने डाक्टर पीके यादव के झूंसी नव निर्मित गृहप्रवेश वाले आवास पर पहुंच कर सैकंडों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं भक्तों के बीच प्रयागराज की महिमा के विषय में विस्तार से जानकारी दी। तीर्थराज प्रयाग की महिमा संतों ने विधिवत बताये। 
मुद मंगलमय संत समाजू।
जो जग जंगम तीरथराजू।।संतों ने बताया कि चलता फिरता संत समाज ही प्रयागराज है। प्रेम ही प्रयागराज है। सद्गुरु के प्रति चाह ही प्रेम है। उन्होंने बताया कि ओम् अक्षय ब्रह्म का परिचायक है ओम का जप और सद्गुरु का ध्यान उठते बैठते सोते जागते हर दम आया करे तो उनकी कृपा से जन्म -जन्मांतर से चित्त पर विद्यमान संस्कार कट जायेंगे , जहां संस्कार कटा तहां हृदय में भगवान जो अविदित थे वो विदित हो जाएंगे। ऐसे ही परम सौभाग्यशाली साधक वेदवित कहलाने लगता है। ऐसे ही सद्गुरु भगवान से लगन लगाने वाले संत समाज जहां रहते हैं वही प्रयागराज बन जाता है। श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ से पधारे संतों ने बताया कि मोक्ष पाना हो या लौकिक पारलौकिक ऐश्वर्य पाना हो तो ओम का जप करें और और सद्गुरु भगवान का ध्यान करें, आपकी पुकार सुनकर सद्गुरु भगवान आपके हृदय में ईश्वरीय वैभव को जगा देंगे, वही जगी हुई वैभव आपके जीवन को लौकिक और पारलौकिक ईश्वरीय ऐश्वर्य में तब्दील कर देंगे। सभी संतों ने सद्गुरु भगवान और यथार्थ गीता के महात्म्य का गायन किया । उन्होंने बताया कि गीतोक्त साधना पर अमल करें और समय-समय पर श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ आकर सद्गुरु भगवान का दर्शन करें और जो जाने में सक्षम न हो वह घर पर ही बैठ कर सद्गुरु भगवान का ध्यान करें उन्हें बैठे- बैठे भगवान दर्शन दे देंगे। चूंकि गुरु बसे वनारसी शिष्य लगावे नेह।
एक पल विसरत नहीं एक हंस दो देह।।सद्गुरु भगवान सात समुंदर पार रहेंगे तो भी हृदय से जब साधक उनको याद करता है तो वे वहीं से मार्गदर्शन करने लगते हैं। योगक्षेम करने लगते हैं दादागुरु कहे हो जो मोरा रुपवा देखा कर मैं वहीं बैठे – बैठे भजन दूंगा। पूज्य गुरुदेव भगवान कहते हैं कि तुम्हारी श्रद्धा ही कृपा बनकर लौटेंगी , श्रद्धा से भगवान को याद करोगे तो तुम्हारी याद ही दया बन जायेगी ।






