मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद प्रणव
हरि भक्तन के पास न आवे भूत प्रेत पाखंड — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 
विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज से आज भक्तों द्वारा धर्म विषयक तरह तरह के प्रश्न किए गए और अपनी अपनी दुखड़ा भी सुनाए । उन भक्तों में से एक दाई माई ने बताया कि वह विगत तेरह वर्षों से भूत प्रेत बाधा से परेशान है। पूज्य गुरुदेव भगवान ने प्रश्नों का उत्तर देते हुए अपने उद्बोधन में बताया कि भूत प्रेत कुछ नहीं होता केवल जन्म जन्मांतर के संस्कार पीछा किए रहते हैं जो ओम् राम अथवा शिव दो ढाई अक्षर के किसी भी नाम जप करने के बाद सारे संस्कार जन्म जन्मांतर के कट जाते हैं। एक मात्र परमात्मा अर्थात एक हरी का भजन करने वालों के पास भूत प्रेत पाखंड नहीं आता है। हरि भक्तन के पास न आवे भूत प्रेत पाखंड। उन्होंने कहा कि भगवान सर्वत्र व्याप्त है श्रद्धा से उन्हें पुकारा जाय तो वे अवश्य मिलते हैं। भूत प्रेत की पूजा करने वाले भूत प्रेत योनि को प्राप्त होते हैं। जो एक परमात्मा को भजता है उसके ऊपर कोई बला काम नहीं करती।
उन्होंने अपने गुरु भगवान का एक दृष्टांत बताते हुए कहा कि एक बंगाला जादूगर की सारी विद्याएं फेल हो गयी गुरु भगवान के सामने फिर उसने अपने पेट के मामले को लेकर गुरु भगवान के सामने गिड़गिड़ाया तब जाकर दो सो मीटर जाने के बाद उसकी शक्तियां वापस आयी और फिर वह अनुसुइया में नहीं दिखा गुरु भगवान से आशीर्वाद चिट्ठी के माध्यम से लेता रहता था। यथार्थ गीता में गुरुदेव भगवान बताते हैं कि जीवित प्राणी को भूत कहा गया है अर्थात भूत माने जीवित प्राणी न कि भूत प्रेत। पूज्य गुरुदेव भगवान ने कहा कि ओझाओं सोखाओ ने समाज में विकृतियां पैदा की है इनका पूजा पद्धति अविधिपूर्वक क्षणिक है। भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि ऐसे लोगों को मै अनंत योनियों में भरमाता हूं।






