उत्तराखंड टीईटी में छूट के विरोध पर एससी-एसटी एम्प्लाइज फेडरेशन नाराज
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रघुवीर सिंह तोमर बोले—आरक्षित वर्गों को मिलने वाली रियायतों का विरोध बर्दाश्त नहीं, सरकार ने उत्तीर्णांक प्रतिशत से छेड़छाड़ की तो होगा आंदोलन
देहरादून। उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के उत्तीर्णांक प्रतिशत में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों को मिलने वाली छूट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस छूट का विरोध किए जाने पर उत्तराखंड एससी-एसटी एम्प्लाइज फेडरेशन के प्रांतीय अध्यक्ष रघुवीर सिंह तोमर ने नाराजगी जताते हुए विरोध की निंदा की है
रघुवीर सिंह तोमर ने कहा कि आरक्षण एवं पात्रता मानकों में नियमानुसार दी जाने वाली छूट का उद्देश्य सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना और वंचित वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। ऐसे प्रावधानों का विरोध करने के बजाय उनके संवैधानिक एवं कानूनी आधार को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार मिलने वाली रियायतों का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा का उद्देश्य योग्य शिक्षकों की पात्रता सुनिश्चित करना है। इसके लिए उत्तीर्णांक और पात्रता मानकों का निर्धारण राष्ट्रीय स्तर पर लागू नियमों, संबंधित दिशा-निर्देशों तथा राज्य सरकार के वैध प्रावधानों के अनुरूप किया जाता है। सामाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर की भावना को मजबूत करना सभी की जिम्मेदारी है।
फेडरेशन अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने टीईटी के उत्तीर्णांक प्रतिशत में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की, तो शिक्षक एवं कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार सामान्य वर्ग के कार्यरत शिक्षकों को भी उनके अनुभव के आधार पर उत्तराखंड टीईटी के उत्तीर्णांक में छूट प्रदान करती है, तो फेडरेशन इसका स्वागत करेगा।
तोमर ने स्पष्ट किया कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को नियमानुसार मिलने वाली छूट का विरोध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इन वर्गों के लोगों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय और समान अवसर के मुद्दे पर सभी को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।






