वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”
गुरु पूर्णिमा:– आध्यात्मिक संचार क्रांति के युग प्रवर्तक स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी की गुरु पूर्णिमा पर होगी विशेष कृपा

सृष्टि के अनादिकाल से चली आ रही गुरु शिष्य परंपरा का सनातन महापर्व २९ जुलाई के पावन गुरू पूर्णिमा पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में भक्तगण, संतगण, संत महात्माओं का आगमन श्री परमहंस आश्रम शक्तिषगढ़ में होगा। इस पावन पर्व पर पूज्य श्री परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज का चरण वंदना, पूजा- अर्चन, भक्तों संत महात्माओं श्रद्धालुओं द्वारा किया जायेगा । गुरु- शिष्य परंपरा का यह महापर्व महर्षि द्वैपायन वेदव्यास के समय से चला आ रहा है इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है । और गुरु शिष्य परंपरा का यह महापर्व श्री परमहंस आश्रम शक्तिषगढ़ में दादा गुरु अर्थात पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के गुरु महाराज परमहंस स्वामी परमानंद जी महाराज के समय से अनुसुइया आश्रम चित्रकूट से मनाया जा रहा है। २१ वीं सदी के भौतिक युग के इस दौर में विश्व संचार युग की क्रांति में है। आनलाईन सिस्टम से युक्त है। हमें कोई
भी त्वरित तात्कालिक जानकारी लेना हो तो हम इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम/ डिजिटल क्रांति , गूगल इत्यादि पर निर्भर हैं। लेकिन आज के हजारों वर्षों पूर्व भौतिक युग आफलाइन था। सांसारिक लोगों की त्वरित तात्कालिक जानकारी का कोई व्यवस्था नहीं थी, कोई वाई-फाई नहीं था। लेकिन आध्यात्मिक क्रांति समृद्धिशाली था । गुरु शिष्य के बीच ईश्वरीय संवाद का जो वाई-फाई, ब्लूटूथ- हाट स्पाट था वह था सद्गुरु कृपा ; जो तब भी था और आज भी है , जो बिना टावर, बिना तार का है। वह सद्गुरु कृपा केवल शिष्य और सद्गुरु ही जानता है अन्य कोई नहीं। सद्गुरु कृपा रुपी वाई- फाई, ब्लूटूथ, हाट स्पाट से शिष्य विचरण में माया से सावधान और सतर्क रहता था। सद्गुरु कृपा की ईश्वरीय कनेक्शन से वह बराबर चार्ज होता रहता था या यूं कहें कि सद्गुरु अपने दूरदराज विचरणशील शिष्य को बराबर अपनी दिव्य दृष्टि नेटवर्क से संभालता रहता था। वर्ष में एक बार गुरु पूर्णिमा के दिन सद्गुरु कृपा के कनेक्शन में शिष्य जहां भी कहीं रहता है वह आ जाता था। उस दिन अपने गुरु भगवान का पूजा करता था, चरण रज का पान करता और उनकी आरती वंदना करता था,। तत्पश्चात गुरु भगवान अपने अनन्य शिष्य को आशीर्वाद देते थे ,उन पर दृष्टिपात कर कृपा करते थे पूरे साल भर के भजन चिंतन के उतार चढ़ाव व अनुभवों को एक दूसरे से साझा करते थे। पुनः शिष्य गण परमात्मा की खोज में गुरु भगवान की आज्ञा में निकल लेते हैं और वर्ष भर सद्गुरु कृपा की वाई-फाई में कनेक्ट हो कर भजन चिंतन में लगे रहते थे। गुरु शिष्य के बीच इसी दिव्य ईश्वरीय कनेक्शन के वाई-फाई का पर्व गुरु पूर्णिमा हजारों वर्षों से परंपरागत चला आ रहा है जिसका ईश्वरीय पथ में विशेष महात्म्य है। इसे आध्यात्मिक संचार क्रांति कहा जाता है जो सांसारिक संचार क्रांति से कई गुना आगे है। पल -पल क्या हो रहा है यह सांसारिक संचार क्रांति है और एक पल एक क्षण के बाद क्या होने वाला है यह आध्यात्मिक संचार क्रांति है जो गुरु और शिष्य के बीच होता है भक्त और भगवान के बीच होता है। उसी आध्यात्मिक संचार क्रांति का परिणाम है कि बिना प्रचार प्रसार के लाखों की संख्या में देश विदेश से भक्तजन संतजन श्रद्धालु
मोक्षदायिनी ज्ञान गंगा केंद्र श्री परमहंस आश्रम शक्तिषगढ़ में समय के सद्गुरु हृदय सम्राट परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज को दर्शनार्थ पूजार्थ पहुंचेंगे। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ह्रदय सम्राट स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी के गृहस्थ और विरक्त शिष्यों का शुभागमन का हेतु वही आध्यात्मिक संचार की पराकाष्ठा का परिणाम है। परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज समय के महापुरुष हैं वे साक्षात भगवान हैं और इस धरा पर अनादिकालीन महापुरुषों का साक्षात प्रतिनिधित्व कर रहे हैं । भक्तों संत महात्माओं श्रद्धालुओं व अंतरंग शिष्यों पर गुरु पूर्णिमा के दिन उनकी विशेष कृपा बरसती है। उनमें दिव्य शक्तियों का अपार भंडारण है। वे समुद्रवत आकाशवत हैं जिस भक्त के अंदर जितनी संयमीय क्षमता है वह उतनी अधिक मात्रा में उनसे आशीर्वाद लेता है। हरि अनंत हरि कथा अनंता वे अनंत थाह की टोह उनका अंतरंग शिष्य ही लगा पाता है और उनकी अंतरंगता को प्राप्त करने की एकमात्र चाभी यथार्थ गीता है जो ब्रम्हविद्या है। तपस्यारत स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज को यथार्थ गीता ईश्वर ने उनके पीछे पड़कर लिखवाये। यथार्थ गीता वह ईश्वरीय सूर्य है जिसके तेज से अज्ञान से आच्छादित संसार को ईश्वरीय प्रकाश मिलता है। जप-तप, भक्ति-भाव, कर्म- धर्म, जाति-पाति , ऊंच-नीच, वर्ण -यज्ञ, देवी-देवता आदि विषयों पर स्पष्ट, शास्वत और यथार्थ व्याख्या है। गुरु पूर्णिमा पर परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज को दर्शनार्थ पहुंचने वाले गृहस्थ और विरक्त शिष्यों की देख-रेख सुव्यवस्था, भोजन प्रसाद, रहने आदि की व्यवस्था के लिए पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के ईश्वरीय आशीर्वाद के वातावरण में शासन प्रशासन व आश्रमीय यथार्थ सेवादार चाक-चौबंद रहेंगे।






