National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

September 10, 2026 5:13 pm

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धन्य हुई पावन जन्मभूमि, स्वामी अड़गड़ानंद जी को जी भरकर देखती रहीं आंखें। 

ओसियां ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”

 

धन्य हुई पावन जन्मभूमि, स्वामी अड़गड़ानंद जी को जी भरकर देखती रहीं आंखें। 

 

लगभग 22 वर्ष की युवावस्था में ईश्वरीय लक्ष्य की जिज्ञासा में गृहत्याग कर श्री परमहंस आश्रम अनुसुइया चित्रकूट में ब्रम्हनिष्ठ हो चुके दिगंबर परमहंस श्री परमानंद जी के विराट आध्यात्मिक छाया में कठोर तपस्या के बाद ईश्वरीय लक्ष्य का भेदन कर, संसार का कल्याण करते हुए अपने चरणधूलि से पावन जन्मस्थली प्रताप नगर ओसियां राजस्थान की बलिदानी मिट्टी को परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज धन्य- धन्य कर दिये। “*अहो भाग्य मुनि दर्शन दीन्हा*” ओसियां के भक्त से लेकर जीव-जंतु सब के सब पूज्य श्री के चरण पड़ते ही कृतार्थ हो गये। आज पूज्य श्री “परिवार बदल के रख देना” की यथार्थता को चरितार्थ करते हुए अपनी जन्मभूमि को कृतार्थ करते हुए पितृ- ऋण मातृ-ऋण, देव- ऋण, ऋषि- ऋण आदि ऋणों से मुक्त हो गये। वह जन्म सराहनीय है जिसके पीछे मृत्यु न हो और वह मृत्यु सराहनीय है जिसके पीछे जन्म न हो अर्थात जन्म- मृत्यु से परे कालबलि से मुक्त पूज्य श्री संसार को अमरता प्रदान करने का संदेश देते हुए आज अपने जन्मभूमि पर भी यही चिरस्थायी संदेश देने हेतु पदार्पण किये। भगवान राम १२ वर्ष के बाद अयोध्या में लौटे और उनका राज्याभिषेक हुआ और भगवान बुद्ध ईश्वरीय लक्ष्य को भेदने के बाद घर परिवार को दीक्षित किये और आज पूज्य श्री गुरुदेव भगवान अपने जन्मभूमि के लोगों को गीतोक्त साधना का उपदेश देंगे । किसे क्या चाहिए? वे किसे क्या देंगे? उनको मां शबरी और सुतीक्ष्ण जैसे किस भक्त को दिग्दर्शन देना है? “*बड़े भाग अंगद हनुमाना*” जैसे किस भक्त का भाग्य जगा है? भरत जैसा कौन सा भक्त भाई का अश्रुपात उन्हें खींचकर ले गया? किस भाविक भक्त के जन्म-जन्मांतर का पुण्य प्रताप जगा है कि पूज्य श्री को उनकी जन्मभूमि पर जाने को बाध्य कर दिया ये तो अन्तर्यामी साक्षात परमात्मस्वरूप पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ही जानते हैं। फिलहाल सभी भक्त गण पूज्य श्री के चरणों की सेवा में अहर्निश लगे हैं । पूरा प्रताप नगर ओसियां पूज्य श्री की चरणों की सेवा करके पूरे विश्व का ऋण उतारकर पुण्य से फलीभूत हो रहा है। आज प्रतापनगर ओसियां संसार को मजहबमुक्त करने व गीतोक्त साधना से पूरे संसार का कल्याण करने, सार्वभौमिक सत्य “*जीवो और जीने दो*” , *”बसुधैव कुटुंबकम्*” का साक्षी बन रहा है। धन्य है ऐसी परम सौभाग्यशाली जन्मभूमि, धन्य हैं पूज्य श्री गुरुदेव भगवान, जिन्होंने पूरी मानवता को उपदेशित किया ऐसे महापुरुष को कोटि-कोटि नमन।

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Author: NM News live

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