शक्तिषगढ़ ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
समय के महापुरुष स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के चमत्कार

सूक्ष्म शरीर से महापुरुष सदैव रहते हैं चाहे बुद्ध हो या भगवान राम हों या भगवान श्री कृष्ण, बजरंग बली हो या भगवान शिव,माता शबरी हों या माता मीरा सब सूक्ष्म शरीर से हर युग में विश्व के अणु अणु कण-कण में रहते हैं उन्हें याद करेंगे या उनका भजन करेंगे तो वे महापुरुष या भगवान समय के महापुरुष को लखा देंगे कि वे मेरे ही स्वरुप के हैं उनके पास जाओ उनसे ब्रह्मविद्या लो दीक्षा लो उनके शरण-शानिध्य में भजन करो, जो चाहोगे पा जाओगे। इसी से मिलता-जुलता एक चमत्कार विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित ब्रह्मऋषि करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज का है। एक बार नवम्बर 2009 की चमत्कारिक घटना है। मैं कुछ भक्तों के साथ श्री परमहंस आश्रम शक्तिषगढ़ के मुख्य गेट पर बाहर श्रद्धा भाव में खड़ा था। अकस्मात एक भगवाधारी बिना चरण पादुका के नंगे पांव हाथ में बिना तीर के धनुष लिए पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के दर्शनार्थ आकर खड़े हुए। वे अकस्मात बोलने लगे कि मैं देवी का पुजारी हूं मैं कामाख्या देवी, मां वैष्णो देवी, मां काली देवी, मां अष्टभुजी, मां विंध्यवासिनी, मां मैहर देवी भारत में जहां -जहां जितनी भी देवी मां के मंदिर है सबका दर्शन नंगें पांव पैदल कर चुका हूं और इसी उद्देश्य से दर्शन-पूजन देवी मां का किया हूं कि देवी मां मुझे दिव्य वाण देंगी जिससे मैं संसार के दुष्टों का सर्वनाश करुंगा । उसी दौरान आश्रम के ही एक संत ने उनसे विनोद की मुद्रा में पूछा कि आपके पास तो धनुष है परन्तु वाण नहीं है, देवी मां ने आपको वाण दिया नहीं तो बिना वाण के कैसे दुष्टों का संहार करेंगे? तो उन्होंने उत्तर भाव में बताया कि मैं जब भारत में बनें सब देवी माताओं का दर्शन-पूजन कर लिया तो एक दिन मैं सोया था तभी स्वप्न में दुर्गा मां ने मुझे दिव्य दर्शन दिया और मैंने संसार में दुष्टों के संहार हेतु उनसे वाण मांगा तो उन्होंने मुझे मातृत्व भाव से आदेश दिया कि पुत्र मैं तुम्हें वाण नहीं दूंगी । इस समय इस संसार में समय के महापुरुष स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज हैं उनके पास जाओ वही तुम्हें दिव्य वाण देंगे और उनके शरण-शानिध्य में रहकर उनके आज्ञापालन में अहर्निश चलो। तो उन्हीं की आज्ञा का अनुपालन करते हुए मैं पूज्य श्री गुरुदेव भगवान स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज की शरण में आया हूं। उनकी बात सुनकर उपस्थित भाविक गण व महात्माजन उनको पूज्य श्री से मिलने का समय बताये और पूज्य श्री के चरणों में वे देवी के पुजारी शरणागत हुए और परमात्मप्राप्ति हेतु प्रयासरत हैं। ऐसे तमाम उदाहरण है कि पूज्य श्री के शरणागत जितने भी उनके सत्यान्वेशी शिष्य हैं उन्हें भी आकाशवाणी हुई है या उन्हें पूज्य श्री की शरण में जाने के लिए स्वप्न हुआ है। यहां तक कि भूत प्रेत भी पूछने पर बताते हैं कि समय के महापुरुष इस धरा पर इस समय पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ही हैं।






