सतना ब्यूरो बांकेलाल निषाद प्रणव
यथार्थ गीता जागृति रथ यात्रा सत्संग,भंडारा, व संतों का दिव्य दर्शन

यथार्थ गीता एक ऐसी अप्रतिम धार्मिक कृति है जिसकी ज्योति से से पूरी दुनिया प्रकाशमान हो रही है । जिसकी धमक से धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे कर्मकांड पाखंड कुरीतियां धीरे धीरे अपने अपने पांव बटोरने लगी है। पूरी दुनिया में धार्मिक उजालें को फ़ैलाने का यह जिम्मा 21 वीं सदी में अवतरित एक ऐसा दिव्य महापुरुष विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज जी हैं जिनके दर्शन मात्र से दर्शनार्थी अपने आप में तृप्त हो जाता है। स्वामी जी पार्थिव शरीर से लगभग सौ वर्ष के हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद भी उनके शिष्य गण उनके भक्त गण पूरी दुनिया में उनकी ही कृपा से यथार्थ गीता के उपदेशों व उनकी विद्या के प्रचार प्रसार में लगे हैं। प्रचार प्रसार के इसी क्रम में यथार्थ गीता के उपदेशों व पूज्य गुरुदेव भगवान की विद्या के बारे में आज मध्यप्रदेश के सतना जिले
में यथार्थ गीता मंडली के सौजन्य से बूटी बाई स्कूल से नगर तक यथार्थ गीता जागृति रथ यात्रा निकाली गई। यथार्थ गीता मंडली के सौजन्य से सत्संग भंडारा यथार्थ गीता वितरण का कार्यक्रम हुआ और शक्तेषगढ़ आश्रम से आये हुए संतों द्वारा सत्संग का आयोजन भी हुआ। शक्तिषगढ़ से आये हुए संतों में पूज्य वरिष्ठता नंद महराज जी पूज्य लाले महाराज जी पूज्य कृष्णानंद महाराज जी पूज्य भुवनेश्वर महराज
जी व पूज्य राजमन महाराज जी ने यथार्थ गीता के उपदेशों का और पूज्य गुरुदेव भगवान की विद्या का विस्तार से हजारों की संख्या में उपस्थित भक्तों को बताया। पूज्य वरिष्ठता नंद जी ने भजन के माध्यम से ओम् जप व एक ईश्वर की आराधना पर विस्तार से भक्तों में चर्चा किए। पुज्य लाले महाराज जी ने बताया कि ओम् जप की चार श्रेणियों को कैसे जपा जाय? और साधक के अंतःकरण व बाह्य जगत में क्रमोन्नत की विस्तार से चर्चा की। पूज्य भुवनेश्वर महराज जी ने संकीर्तन व सत्संग के माध्यम से बताया कि कैसे सद्गुरु भगवान का ध्यान करते हुए संसार से विरक्त होकर भवसागर से पार हुआ जायेगा। वहीं पर पूज्य कृष्णानंद जी महाराज व राजमन महाराज जी ने सद्गुरु भगवान की तपस्या व उनके जीवनी पर प्रकाश डाला और यह भी बताया कि संसार में रहते हुए संसारिक कार्य करते हुए कैसे सद्गुरु भगवान के उपदेशों को अंगीकार करना है कैसे आत्मतृप्त होना है उन्होंने विस्तार से बताया। सभी संतों ने बताया कि यथार्थ गीता एक निर्विवाद धर्म शास्त्र है इसमें परमात्मा को पाने की विधि और उस एक ईश्वर को पाने के लिए क्या क्या ज़रुरी है इसके बारे में भी विस्तार से चर्चा किये। उन्होंने बताया कि यथार्थ गीता को चार बार पढ़ लेने से गुरूदेव भगवान हृदय से रथी हो कर साधक का योगक्षेम करने लगते हैं उठाते बैठाते सोवाते जगाते रहते हैं और बराबर परमात्मपर्यंत की दूरी तय होने तक हर क्षण हर पल साधक के साथ लगे रहते है।






