National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

March 25, 2026 2:15 pm

National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

Follow Us

March 25, 2026 2:15 pm

पूज्य श्री लाले महाराज, श्री वरिष्ठानंद महाराज, श्री राकेशानंद महाराज, श्री कृष्णा महाराज आदि संतों द्वारा हुआ त्रिशूल स्थापना।

प्रयागराज ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”

 

श्री परमहंस आश्रम श्री माड्डव ऋषि धाम यथार्थ गीता पाठ व त्रिशूल स्थापना 

 

पूज्य श्री लाले महाराज, श्री वरिष्ठानंद महाराज, श्री राकेशानंद महाराज, श्री कृष्णा महाराज आदि संतों द्वारा हुआ त्रिशूल स्थापना।

 

पूज्य गुरुदेव भगवान के शिष्य विजय महाराज जी है यहां के महंत 

 

भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा।* *तिन्हहि राम पद अति अनुरागा।।

तापस सम दम दया निधाना परमारथ पथ परम सुजाना।।

गंगा यमुना सरस्वती की पावन संगम पर बसा भगवान भरद्वाज, दुर्वासा ऋषि, व ऋषि पन्ना की ज्ञान स्थली प्रयागराज की पावन धरा पर श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ से विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी अलमस्त सर्वज्ञ सनातन संस्कृति के वाहक यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्य गण पधारे हैं। पूज्य गुरुदेव भगवान की कृपा व उनकी आज्ञा से ये शिष्य गण नव निर्मित श्री परमहंस आश्रम श्री मांडव ऋषि धाम मूर्तिहा दह मांडा खास में वैदिक मंत्रोच्चारण द्वारा त्रिशूल स्थापना किये । इस अवसर पर यथार्थ गीता पाठ , विशाल भंडारा व मुफ्त में यथार्थ गीता वितरण किया गया। हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे , उनको मुफ्त में पूज्य गुरुदेव भगवान द्वारा रचित भव सागर को पार करा देने वाली धार्मिक पुस्तकों को भी दिया गया। ज्ञातव्य हो कि पूज्य गुरुदेव भगवान का दो आश्रम प्रयागराज में हो चुका है। एक और आश्रम पावन पवित्र गंगा जी के तट पर श्री परमहंस आश्रम श्रृंगवेरपुर प्रयागराज में भी विगत कई वर्षों से पूज्य गुरुदेव भगवान की विद्या व गीतोक्त साधना का प्रचार प्रसार हो रहा है, और मानवता का कल्याण हो रहा है। इस आश्रम के महंत पूज्य गुरुदेव भगवान के शिष्य विजय महाराज जी ने बताया कि सब कुछ गुरुदेव भगवान की कृपा से सकुशल संपन्न हो गया। सत्संग प्रवचन में पूज्य श्री लाले महाराज जी ने हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं भक्तों को बताया कि संत महापुरुषों के शरण सानिध्य से ही ईश्वरीय पथ प्राप्त होता है,। *संत संग अपवर्ग कर, कामी भव कर पंथ*। *कहहि संत कवि कोविद, श्रुति पुरान सद्ग्रंथ।।*

संतों का संग ही धीरे धीरे जन्म और मृत्यु की परिधि से छुटकारा दिलाता है। कामी भव कर पंथ जो कामनाओं से ग्रसित हैं वे संसार में बांधने का मार्ग प्रशस्त कराते हैं , एक ईश्वर के चिंतन में प्रवृत्त होने के लिए सद्गुरु का ध्यान ओम जप करना होगा, मन सहित इंद्रियों का संयम करना पड़ेगा, तब धीरे धीरे आत्मचिंतन में प्राप्त होने वाली ईश्वरीय विधा की जानकारी मिलेगी। पूज्य श्री राकेशानंद जी महाराज जी ने कहा कि मार्ग से कुमार्ग पर जाते देर नहीं लगती उसके लिए शास्त्र ही एक संबल है शास्त्र का अध्ययन करना चाहिए शास्त्र के अनुसार चलने का प्रयास करना चाहिए, वह शास्त्र है यथार्थ गीता जो मानव मात्र का धर्म शास्त्र है जो श्री मद्भागवत गीता भाष्य यथार्थ गीता है। पूज्य श्री वरिष्ठानंद जी महाराज ने कहा कि मानव तन की सार्थकता क्या है? मानव तन मिला है चाहे स्त्री हों या पुरुष हो सबको एक ईश्वर का भजन करना चाहिए,।

ममैवांशो जीवलोके जीवभूत सनातन। मन: षष्टानीन्निद्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति

उन्होंने बताया कि मानव मात्र का धर्म शास्त्र यथार्थ गीता में सब कुछ है। यह संपूर्ण धर्म शास्त्र है। इसका पठन पाठन सबको करना चाहिए तब जाकर भगवान की कृपा मिलेगी। नवधा भक्ति का दृष्टांत देते हुए उन्होंने बताया कि प्रथम भगति संतन कर संगा दूसरि रति मम कथा प्रसंगा।

भगवान को पाना है तो संतों के शरण सानिध्य में रहकर उनकी सेवा करें उनके मार्गदर्शन में चलें। ज्ञातव्य हो कि प्रयागराज पूज्य गुरुदेव भगवान के गुरु महाराज पूज्य श्री स्वामी परमानंद जी महाराज की भी तपोस्थली रही है यहीं पर पावन पवित्र गंगा तट पर समकालीन महापुरुष हरिहर दास महाराज जी द्वारा उन्हें महापुरुष के रूप में पहचान लिया गया था । यहीं पर गंगा की बीच धारा में कुछेक कर्मकांडियों से उनका शास्त्रार्थ हुआ था तभी भगवान ने उनके जीत की पुष्टि करते हुए छिद्र युक्त लोटा में से पानी गिरना बंद हो गया था । यहीं पर संगम मेलें में पंगत में भोजन कर रहे दादा गुरु ने वारिस बंद कराकर इंद्र को खरी खोटी सुनाई थी, इत्यादि आलौकिक चमत्कार उनके द्वारा हुआ था।

NM News live
Author: NM News live

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *