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सम्पादक देवेन्द्र राय

March 27, 2026 9:49 pm

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सर्वग्राही , सर्वसमाज, सर्वहारा व वंचितों के लिए सर्वसुलभ है यथार्थ गीता — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 

मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल “प्रणव”

 

सर्वग्राही , सर्वसमाज, सर्वहारा व वंचितों के लिए सर्वसुलभ है यथार्थ गीता — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज

 

विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने अपने उद्बोधन में बताया कि यथार्थ गीता सृष्टि के अनादि काल के इतिहास में एक ऐसा आलौकिक धर्म ग्रंथ का अवतार हुआ जो समूचे विश्व को विना राग द्वेष के आलोकित कर रहा है। यथार्थ गीता समूचे विश्व के मानव को बिना ऊंच -नीच, छोटे –बड़े, छूआछूत का विभेद किये ही गले लगाने को आतुर है। सहज सुलभ सरल ढंग से संसार के लिए उपलब्ध है। निश्चल निर्मल अविरल धारा की तरह अवाध गति से मानवता के कल्याणार्थ यथार्थ गीता संसार को सहज ही पवित्र करने को आतुर है। आज अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर आज दैनिक अखबार के वरिष्ठ पत्रकार शिवकुमार पांडे उर्फ झन्नन पांडे ने भंडारे का आयोजन किया था। उन्होंने गुरुदेव भगवान व उनके सैकड़ों शिष्यों को अंगवस्त्र, फल, रूद्राक्ष, फूल आदि भेंटकर उनका सपरिवार सहित आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने अमूल प्रोडक्ट आइसक्रीम को भी खिलाया। इस अवसर पर अम्बेडकर नगर के मूल निवासी देश के वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह के भाई दिव्यांशु सिंह प्रिंस ने भी स्वामी जी का आशीर्वाद लिया। पूज्य गुरुदेव भगवान् ने आज हजारों की संख्या में उपस्थित अपने भक्तों को अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान सर्वत्र रहते हैं ओम् राम अथवा शिव का जप करो भगवान जान जाएंगे कि तुम भगवान को याद कर रहे हो भगवान हर तरफ से तुम्हें देखते हैं संभालते हैं तुम्हारे ऊपर पहाड़ जैसा दुख आने वाला है तो भगवान उसे राई सम कर देंगे दुःख के रूप में तुम्हारे जन्म जन्मांतर के संस्कार ही तुम्हारा पीछा करते रहते हैं जिसे भगवान अल्प समय में ही मिटा देते हैं । पूज्य गुरुदेव भगवान ने कहा कि भगवान सद्गुरु और माया सर्वत्र रहते हैं। पूज्य गुरुदेव भगवान ने कहा कि भगवान को कुछ नहीं चाहिए। भगवान को पाने के लिए भाव होना चाहिए “*भावे विद्यते देवा”* भाव से परम तत्व परमात्मा विदित हो जाता है। उठते बैठते सोते जागते शौच करते खाना खाते हर दम ओम, राम अथवा शिव को जपते रहना चाहिए और सद्गुरु के रूप का ध्यान करना चाहिए । नाम और रूप ही एक न एक दिन परम देव परमात्मा को विदित करा देंगे। पूज्य गुरुदेव भगवान ने कहा कि भगवान योगक्षेम करने लगते हैं उठाते हैं बैठाते हैं सोवाते है और जगाते हैं यहां तक कि बतियाते भी हैं और अपने भक्तों को संभालते भी हैं । पूज्य गुरुदेव भगवान ने कहा कि भगवान अंतर्यामी होते हैं तुम क्या सोचने वाले हो, क्या सोच रहे हो, उसके पहले की स्थिति जान जाते हैं *सबके उर अंदर बसे जाने भाव कुभाव* भगवान भक्त के आगे-पीछे चलते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान को ही सद्गुरु शिव राम परमात्मा आदि कहते हैं उनके उनकी विभूतियों के अनुसार अनंत नाम है जैसे शिव प्रकृति की असीम सीमाओं की अतीत अवस्था, शंकाओं से उपराम अवस्था ही शिव है , राम “*रमन्ते योगिन यस्मिन स: राम:* ” अर्थात भगवान घट घट में रहते हैं सबके हृदय में रहते हैं योगियों के हृदय में जो रमण करता है वही राम है । संपूर्ण वैभव से युक्त है इसलिए भगवान का एक नाम विभू है सबके हृदय में वास करता है इसलिए आत्मा, सबमें रहते हुए सबसे परे है इसलिए परमात्मा आदि ऐसे अनंत नामों से भगवान जाने जाते हैं। पूज्य गुरुदेव भगवान ने कहा कि भगवान से कुछ मत मांगो केवल उन्हें श्रद्धा से भजो वे जानते हैं कि तुम्हारा कल्याण किसमें है तुम्हें वही देंगे । तुम सीधे भगवान को मांग लो भगवान जहां रहेंगे तहां सारी समृद्धि और शास्वत शांति व खुशहाली रहेगी।

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Author: NM News live

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