मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
समय के महापुरुष हैं परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज — नारद महाराज
परम पावन धर्मप्राण देश भारत अनादिकाल से महापुरुषों के अवतरण का केंद्र रहा है, चाहे चौथी शताब्दी के वैदिक ऋषियों-मुनियों का काल हो, या छठवीं शताब्दी ईसा पूर्व में बुद्ध महावीर का काल हो या चौदहवीं सदी के कबीर रैदास तुलसी आदि, या 19 वीं सदी के स्वामी रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानंद स्वामी दयानंद सरस्वती आदि महापुरुषों की एक लंबी फेहरिस्त हो, हर काल खंड में भारत भूमि पर समय काल परिस्थिति के अनुसार महापुरुषों का अवतरण हुआ है। पूज्य श्री नारद महाराज जी ने कहा कि परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज 21वीं सदी में अवतरित समय के महापुरुष हैं,। उन्होंने बताया कि पूर्णत्व प्राप्ति के बाद पूज्य श्री स्वामी जी को यथार्थ गीता लिखने का ईश्वरीय आदेश हुआ । और पूज्य श्री स्वामी जी ने उस शास्वत सनातन ज्ञान की शास्वत व्याख्या की जिसको महाभारत काल में युद्ध क्षेत्र में तत्समय के महापुरुष भगवान श्रीकृष्ण ने अपने शिष्य अर्जुन को उपदेशित किया था। उन्होंने बताया कि आज यथार्थ गीता विश्व के हर कोने में बसे
मानवता के लिए वरदान साबित हो रहा है। यथार्थ गीता पूरी दुनिया को ज्ञान रुपी प्रकाश से गुलजार कर रहा है। उन्होंने चैलेंज किया कि पूरी दुनिया में बसे कोई भी यथार्थ गीता को चार बार यदि आवृत्ति कर ले तो सद्गुरु भगवान उसके हृदय से रथी होकर उसका मार्गदर्शन करने लगेंगे और वह एक न एक दिन गीतोक्त साधना की नैया से भव सागर पार हो जायेगा। उन्होंने कहा कि आज हर घर में यथार्थ गीता का पाठ हो रहा है, जन्मदिन हो या शादी विवाह गृह-प्रवेश, ब्रम्हभोज, हर मांगलिक कार्यों में यथार्थ गीता का वाचन हो रहा है। पूज्य नारद महाराज जी ने कहा कि पूज्य श्री गुरुदेव भगवान यथार्थ गीता के अतरिक्त अन्य दर्जनों पवित्र धार्मिक पुस्तकों को लिखा है, जैसे आत्मानुभूति एवं जीवनादर्श, भजन किसका करें? अंग क्यों फड़कतें हैं क्या कहते हैं? सनातन का स्वरूप, पुनर्जन्म व हृदय, भजन किसका करें? एकलव्य का अंगूठा, द हिंदू, आर्य हिन्दू सनातन की शास्वत व्याख्या इत्यादि।
Author: NM News live
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