मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
संसार से विमुख, मन के ध्यानस्थ होने के बाद भजन का आरंभ ही गणेश जन्म है — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज
श्रद्धा और विश्वास से मन में भजन की चाह पैदा होना ही गणेश का जन्म है —- स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज
गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा की जाती है गणेश क्या है ?
गणेश का अर्थ होता है गण, गण कहते हैं इंद्रियों को, इसका स्वामी जो है वह है मन , मन भजन कब करता है ? जब मन में विश्वास और श्रद्धा होती है तब, भगवान के प्रति। इसलिए गणेश जी के माता-पिता कौन थे? शिव और पार्वती । शिव और पार्वती कौन है? हमारे आपके हृदय में ईश्वर के प्रति जो विश्वास है वह शिव है और जो श्रद्धा है वह पार्वती है। गोस्वामी तुलसीदास जी श्रीरामचरितमानस में कहते हैं भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति शिद्दा: स्वान्त:स्थीमीस्वर:।।
श्रद्धा और विश्वास ही मनुष्य में शिव और पार्वती है। इनके वगैर कोई भी मनुष्य परमात्मा को नहीं पा सकता। श्रद्धा और विश्वास हृदय में आ जाता है तो, मन में भजन करने की चाह पैदा हो जाती है गणेश जी का जन्म हो जाता है । उनके भाई थे कार्तिकेय जिस दिन श्रद्धा और विश्वास हो जाता है भगवान के प्रति, तो संसारिक कर्मों का त्याग होने लगता है, मन संसारिक भावनाओं को छोड़ कर जब ध्यान में लगने लगता है भजन का आरंभ हो जाता है यही गणेश का जन्म होना है।, अब श्रद्धा और विश्वास आकाश में पैदा तो होगा नहीं उसका कोई माध्यम होता है। माध्यम है, या तो पूर्व जन्म का हमारा पुण्य उदय हो, या विश्वास स्वरूप सद्गुरु उनको शिव कहा गया है ऐसे संत मे विश्वास भरपूर होता है श्रद्धा होती है भगवान के प्रति, इसलिए गोस्वामी
तुलसीदास जी आगे लिखते है कि बंदे बोधमयं नित्यं गुरुं शकर रूपिणम्। जो संत सद्गुरु होते हैं शंकर के रूप में हैं क्या है उनमें?, उनमें बोधमयं नित्यं सदैव हृदय में भगवान का बोध करते रहते हैं दर्शन करते रहते हैं नित्यम ” हमेशा उनके सानिध्य में कोई भक्त पहुंच जाता है तो उसके भीतर भी ईश्वर के प्रति विश्वास पैदा हो जाता है।
Author: NM News live
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