वाराणसी ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
यथार्थ गीता समापन पर संतों का आगमन
विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के कृपापात्र शिष्य गण वाराणसी स्थित दानगंज के सन्निकट तरांव भक्त सतीश सिंह के घर यथार्थ गीता पाठ के आयोजन के समापन पर श्री परमहंस आश्रम शक्तिषगढ़ के संतों द्वारा अमृतमय मोक्षमय प्रवचन सत्संग व विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। इस शुभ अमृत बेला पर श्री लाले महाराज जी, श्री राकेशानंद जी महाराज, श्री वरिष्ठानंद जी महाराज श्री शिवानन्द महाराज जी, श्री मनीष महाराज जी, श्री विनोद महाराज जी उपस्थित रहे। श्री राकेशानंद जी महाराज ने पिंडदान के औचित्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने पिंडदान के आध्यात्मिक स्वरूप की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि जब एक शरीर छूटा और दूसरा तैयार है जब दोनों जन्मों के बीच में गड्ढा है ही नहीं है तो पिंडदान का कोई मतलब ही नहीं हो सकता। श्री लाले महाराज जी ने बताया कि तेरे घट ही में राम तू काहे भटके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सबके अंतःकरण में भगवान विद्यमान हैं लेकिन जब तक योग प्रक्रिया नहीं करेंगे मन सहित इंद्रियों का संयम नहीं करेंगे गीतोक्त साधना पर चलने का प्रयास नहीं करेंगे तब तक हृदयस्थ ईश्वर हैं तो सबके हृदय में , लेकिन
कोई देख नहीं पाता जिस प्रकार दूध में मक्खन घी दही इत्यादि है लेकिन जब तक वो प्रकिया नहीं अपनाएंगे तब तक घी नहीं निकल सकता है इसी प्रकार हृदयस्थ ईश्वर जानने के लिए गीतोक्त विधि के अनुसार चलना पड़ेगा। संत श्री वरिष्ठानंद महाराज जी ने बताया कि पूजा का वास्तविक स्वरूप क्या है? पूजा के नाम पर बाह्य आडंबर फैले हुए हैं, । यज्ञ के नाम पर तरह – तरह के कर्मकांड चल रहे हैं लेकिन वास्तविक पूजा जब तक उस परम तत्व परमात्मा को विदित करने वाली जानकारी नहीं होगी जब तक उस परमात्मा तक पहुंचने वाली विधि को अपनाएंगे नहीं तब तक पूजा निरर्थक है। उन्होंने कहा कि शिव तत्व में स्थित सद्गुरु ही पूजनीय है । संतों के सत्संग के पूर्व संत श्री विनोदानंद जी महाराज ने भजन प्रस्तुत कर पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की वाणी को लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने परमात्मा के प्रति विरहपूर्ण भजन गाकर लोगों में भगवान के प्रति विरह वेदना की संवेदना व्यक्त की। संत समागम में श्री शिवानन्द जी महाराज और श्री मनीष बाबा भी उपस्थित रहे । इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया और यथार्थ गीता वितरण किया गया।






