धारकुंडी ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
धारकुंडी तत्ववेत्ता की षोडषी संपन्न, स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज भी पधारे
धारकुंडी आश्रम के तत्ववेत्ता श्री- श्री १००८ श्री स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज की षोडषी में उनके अनुज गुरु भाई विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित ब्रह्मऋषि करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने पहुंचकर उनकी गरिमामई अखंड समाधि स्थल को प्रणाम कर उनको नमन किया। त्याग तपस्या के प्रतिमूर्ति महान तपस्वी, आध्यात्मिक ऊर्जा के भंडार, साधना शिखर के शिरोमणी ब्रम्हलीन स्वामी श्री सच्चिदानंद जी महाराज अपने सूक्ष्म शरीर से संसार के कण-कण में व्याप्त हो चुके हैं। उनको जो जहां से याद करेगा वे वहीं से उसका मार्गदर्शन करेंगे। लाखों श्रद्धालुओं भक्तों संत महात्माओं को स्वामी श्री सच्चिदानंद जी महाराज की अद्भुत आलौकिक छवि धारकुंडी आश्रम के चहुंओर आभाष करा रही थी
। हर संत भक्त गण इस आलौकिक उपस्थिति का भान कर रहे थे। परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज अपने बडें गुरु भाई की समाधि को मत्था टेके और पुष्पांजली अर्पित किये, व उनकी दिव्य फोटो पर माल्यार्पण कर उनका चरण वंदन किये। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने लाखों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं भक्तों संत महात्माओं को सत्संग प्रवचन कर लोगों को आशीर्वाद दिया। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान संसार की निस्सारता और परमात्मा की शास्वतता पर बोलते हुए बताये कि महापुरुष उसी दिन शरीर से मुक्त हो जाते हैं जिस दिन उनका साक्षात्कार परमात्मा से हो जाता है। उन्होंने बताया कि श्री -श्री १००८ श्री स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज गुरु महाराज के रहते स्वरूपस्थ हो चुके थे, गुरु महाराज जी के आदेश से ही वे धारकुंडी आश्रम में पधारे। पूज्य श्री स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के साथ, श्री नारद महाराज, श्री आशीष महाराज, श्री राकेशानंद जी महाराज आदि संतो ने भी श्री श्री १००८ श्री स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज की समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर चरण वंदन किये।






