उत्तराखंड
प्रमुख सम्पादक देवेन्द्र राय
उपनल गठन के उपरांत से हजारों उपनल कर्मचारी 10-20 वर्षों से अपने जीवन का ऊर्जावान समय अति न्यून वेतन में राज्य के विभिन्न विभागों/निगमों इत्यादि में देने के बाद भी जब हम उपनल कर्मचारियों में से अधिकतर कर्मचारियों की उम्र 45 से 50 वर्ष होने को है।
आतिथि तक न तो उपनल कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन दिया जा रहा है और न कोई सुरक्षित भविष्य हेतु नियमावली बनाई गयी है। समय-समय पर विभिन्न विभागों द्वारा 10 से 15 वर्ष कार्य कर चुके उपनल कर्मचारियों को अकारण नौकरी से हटा दिया जा रहा है। जिनमें से कई उपनल कर्मचारियों द्वारा अपने माता और पत्नी के आभूषण बेच कर माननीय न्यायालयों के अधिवक्ताओं की फीस देकर अपनी नौकरी बचाई है, मरता क्या न करता एक तो अति न्यून वेतन उसके उपर से उच्चाधिकारियों के शोषणात्मक आदेशों से अपने आत्मसम्मान को बचाने और अपने परिवार के भरण पोषण के लिए उपनल कर्मचारी को मजबूरन ये सब करना पड़ रहा है क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि किसी भी स्तर पर उपनल कर्मचारियों की सुनवाई करने वाला राज्य में कोई नहीं है। राज्य सरकार द्वारा राज्य गठन के उपरान्त समय समय पर हजारों संविदा इत्यादि के कर्मचारियों को नियमावली बनाकर नियमित किया गया लेकिन जब-जब भी नियमित करने हेतु नियमावली बनाई गयी किसी में भी उपनल कर्मचारियों को सम्मिलित नहीं किया गया, जबकि उपनल कर्मचारियों को भी उतना ही समय विभागों में कार्य करते हुए हो चुका है और उपनल कर्मचारी भी वही सब कार्यों को पूर्ण निष्ठा के साथ विभागों/निगमों में सम्पादित कर रहे है जो कि संविदा/नियत वेतन/दैनिक वेतन इत्यादि के कर्मचारियों द्वारा किये जा रहे है। 
वर्तमान में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा मा0 उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में राज्य के विभिन्न विभागों में दैनिक वेतन, नियत वेतन, अंशकालिक, संविदा कार्मिकों की सेवायें विनियमित किये जाने हेतु नियमावली बनाये जाने की कार्यवाही गतिमान है। जिसमें उपनल कर्मचारियों को सम्मिलित किए जाने हेतु निम्न महत्वपूर्ण बिन्दु हैः-
मा0 उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका संख्या-116/2018 कुन्दन सिंह बनाम उत्तराखण्ड राज्य में दिनांक-12.11.2018 को उपनल कर्मचारियों को नियमित किये जाने के आदेश दिये गये थे, किन्तु राज्य सरकार द्वारा मा0 उच्च न्यायालय के उक्त आदेश का अनुपालन न कर, आदेश के विरूद्व मा0 सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अपील संख्या-2388/2019 योजित कर, उक्त विशेष अपील की पैरवी हेतु नामित अधिवक्ताओं की फीस पर अभी तक लाखों रूपये का खर्च किये जा रहे है।
महाधिवक्ता, उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, नैनीताल के पत्र दिनंाक-26.08.2023 द्वारा भी राज्याधीन आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्त अस्थायी कार्मिकों के लिये विनियमतिकरण के लिये नीति बनाये जाने का परामर्श मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड सरकार को दिया गया है।
याचिका संख्या-167/2021 में मा0 उच्च न्यायालय की डबल बैंच द्वारा भी दिनंाक-12.06.2024 को मा0 उच्चतम न्यायालय में योजित विचाराधीन विशेष अपील के निर्णय होने तक उपनल कर्मचारियों से नियमित रूप से कार्य कराये जाने के निर्देश दिये गये है, फिर भी कई विभागों (राज्य कर, कृृषि इत्यादि) में उपनल कार्मिकों की सेवाओं को बाधित रखा हुआ है एवं बाधित किया जा रहा है। 
उपनल कर्मचारियों की पीड़ा को महसूस करते हुए राज्य के विभिन्न विभागों में दैनिक वेतन, नियत वेतन, अंशकालिक, संविदा कार्मिकों को विनियमित किये जाने वाली प्रस्तावित नियमावली में उपनल कार्मिकों को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए। 
लंबे संघर्ष के बाद भी जब उपनल कर्मचारियों की कोई सुध नही ले रहा है ऐसे में उपनल कर्मचारी अत्यंत आक्रोशित है आक्रोश के चलते आज उपनल कर्मचारियों ..………………… पर आकर ये बताना चाहते है कि जिस उत्तराखंड की परिकल्पना उन्होंने की थी वो कहीं से कहीं तक साकार होते हुवे नही दिखाई दे रही है। ऐसे में हम अपने माननीयों और अपने उच्चाधिकारियों को यहाँ से आगाह करना चाहते है कि अभी समय है उपनल कर्मचारियों की व्यथा को समझिए कहीं ऐसा न हो कि आपके समझने में देर न हो जाय।






