फतेहपुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
श्री परमहंस आश्रम भीटौरा घाट पर संतों का भव्य स्वागत/सत्संग
श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ से पहुंचे संत।
पूज्य श्री ध्यानानंद जी महाराज की वार्षिक पुण्यतिथि पर हुआ भव्य सत्संग
तीरथ करे एक फल संत मिले फल चारि।
सद्गुरु मिले अनंत फल कहैं कबीर विचार।।
अनंत विभूषित कालजयी अलमस्त सर्वज्ञ सनातन संस्कृति के वाहक, अनादिकाल से अवतरित महापुरुषों के ब्रम्ह विद्या के संदेशवाहक यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के अखंड दरबार का पोषित फलित संत समाज का आगमन आज फतेहपुर जिले के श्री परमहंस आश्रम भीटौरा घाट में हुआ जहां उनका भव्य स्वागत वंदन हुआ। आज ही के दिन इस दिव्य आश्रम पर पूज्य श्री स्वामी जी के शिष्य ध्यानानंद जी महाराज का पंचभौतिक शरीर की यात्रा पूर्ण हुई थी और पूज्य श्री स्वामी जी ने अपने चरणों में इन्हें स्थान देकर इनकी आत्मा को कृतार्थ किये थे। इसी उपलक्ष्य में आज उनकी याद में इस आश्रम के सौभाग्यशाली शिष्यों द्वारा पुण्यतिथि मनाई जा रही है और इस पुण्यतिथि में पूज्य श्री स्वामी जी के आदेश से उनके शिष्य पूज्य श्री लाले महाराज जी, पूज्य श्री राकेश महाराज जी, पूज्य श्री वरिष्ठानंद जी महाराज, व श्रृंगवेरपुर से पधारे पूज्य श्री बृजविहारी महाराज जी ने पहुंचकर इस पावन धरा धाम को पवित्र करने का किया है। उक्त सभी शिरोमणि संतों ने अमृत वाणी के माध्यम से सैकड़ों की
पूज्य श्री ध्यानानंद जी महाराज की वार्षिक पुण्यतिथि पर हुआ भव्य सत्संग
संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं भक्तों को आशीर्वचन प्रदान किए । पूज्य श्री लाले महाराज जी ने कहा कि मन की गति बहुत तीव्र होती है इसे नाम रूप लीला धाम में कहीं न कहीं लगाये रखें तभी यह बस में होगा। पूज्य श्री राकेश महाराज जी ने कहा कि संसार से परे परमात्मा को भजने के लिए ओम जप सद्गुरु का ध्यान व गीतोक्त साधना में रत होना होगा तभी इस आत्मा का उद्धार होगा। पूज्य वरिष्ठानंद जी महाराज ने बताया कि षडविकारों पर विजय पाने के लिए सद्गुरु के शरण में जाकर उनके बताए मार्ग पर चलकर परमात्मपथ की दूरी तय की जा सकती है। पुज्य श्री बृजविहारी महाराज जी ने कहा कि भगवान को पाना है तो सांसारिक जीवन से इतर अध्यात्मिक जीवन में चलना होगा उन्होंने कहा कि जन्म जन्मांतर तक साधना करने से सद्गुरु की कृपा से भगवान मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि दादा गुरु को सात जनम लगे, श्री कृष्ण को 13 जनम लगे बुद्ध को 200 जनम लगे ऐसे ही महावीर को 24 जनम लगे, इसलिए सद्गुरु भगवान के अध्यात्मिक कक्षा में जल्द से जल्द प्रवेश पा लें। सभी संतो ने ओम जप सद्गुरु ध्यान सेवा सुश्रुषा यथार्थ गीता का नियमित पाठ व गीतोक्त साधना पर चलने का बल दिया।






