गुरु पूर्णिमा पर परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज का दिव्य दर्शन
मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
आज गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री
अड़गड़ानंद जी महाराज का दिव्य दर्शन प्रातः 2:30 बजे से शुरू हुआ । सर्वप्रथम उनके शरण सानिध्य में भजन कर रहे हजारों की संख्या में सत्यान्वेशी शिष्यों ने उनकी अर्चना वंदन चरण दर्शन कर कृतार्थ हुए। श्री गुरु पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिव्य दृष्टि हिय होती।। तत्पश्चात देश विदेश से आए लाखों की संख्या में आये संत महात्माओं श्रद्धालुओं को 
पूज्य गुरुदेव भगवान ने सत्संग हाल में दर्शन दिये । परंपरागत विगत कई वर्षों से पूज्य गुरुदेव भगवान जब तक एक भी श्रद्धालु बाकी है तब तक आसन पर बैठे रहते हैं। प्रशासन बिल्कुल चाक चौबंद है और चौकन्ना है जगह-जगह सीसीटीवी कैमरा लगा भारी संख्या में पुलिस बल जगह जगह तैनात हैं। महिला सुरक्षाकर्मी भी तैनात हैं। पैरामिलिट्री फोर्स भी जगह जगह लगी है। एक तरफ श्रद्धालुजनों को दर्शन की सुविधा है तो दूसरी तरफ भोजन प्रसाद
की व्यवस्था चाक-चौबंद है। यथार्थ गीता भारी छूट पर उपलब्ध है । “यथार्थ गीता” एक ऐसा दिव्य आलौकिक अप्रतिम महापुरुष का संदेश है जो धरा धाम पर बसे मानव मात्र के लिए ईश्वर द्वारा इंसान के लिए पूज्य गुरुदेव भगवान के द्वारा एक ईश्वरीय संदेश है। इस पवित्र पावन धर्म शास्त्र में एक ईश्वर को अरदास करने का विधान है। यह धरा धाम पर बसे मानवता को यह संदेश देता है कि ईश्वर को
पाना है तो करोड़ों देवताओं के मकड़जाल से निकलना होगा। अनंत योनियों के सफ़र से मुक्त होना हो या जीवन को साध कर साध्य ईश्वर को पाना हो तो बुद्ध महावीर वैदिक ऋषियों-मुनियों कबीर रैदास दादा गुरु या स्वयं गुरुदेव भगवान के
पदचिन्हों पर चलना होगा खुद को मायापति बनना पड़ेगा। अविद्या जो माया की ओर मोड़ती है उधर न जाकर विद्या की ओर जो परमात्मा की ओर उन्मुख करती है उधर ही चलना पड़ेगा। पूज्य लाले महाराज जी ने कहा कि संसार को गीतोक्त साधना पर चलना होगा यथार्थ गीता सबको पढ़ कर उस पर क्रियात्मक चलना पड़ेगा तभी संसार को एक सूत्र में बांधा जा सकता है।
Author: NM News live
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