वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”
ब्रम्हलीन हुए पूज्य श्री स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्य जैश्री महाराज

विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के पुराने शिष्य जैश्री महाराज जी आज ब्रम्हलीन हो गये। वे 78 वर्ष के थे। पूज्य गुरुदेव भगवान से वे जगतानंद आश्रम से ही जुड़े थे। पूज्य गुरुदेव भगवान की आध्यात्मिक आभा, और उनकी दिव्य चमत्कारी रहनी को देख वे पूज्य गुरुदेव भगवान के चरणों में प्रणत होकर श्री परमहंस आश्रम जगतानंद में वे उनकी सेवा में लग गए। पवित्र गंगा नदी के किनारे स्थित श्री परमहंस आश्रम जगतानंद की सेवा में वे ऐसा रमें कि फिर वे घर नहीं गये, पूज्य गुरुदेव भगवान के चरण सेवा में लग गए। पूज्य गुरुदेव भगवान उनके हृदय से रथी होकर यथार्थ गीता में ऐसा डुबकी लगवाये कि उन्हें यथार्थ गीता जुबानी कंठस्थ हो गया वे हमेशा चलते- फिरते उठते- बैठते सोते -जागते यथार्थ गीता के
उपदेशों को सुनते रहते थे। पूज्य गुरुदेव भगवान के प्रति सेवा हो या पुराने आश्रमादि जैसे शक्तेषगढ़ आश्रम जगतानंद आश्रम पालघर आश्रम मुंबई, फरीदाबाद आश्रम दिल्ली इत्यादि आश्रमों में उनके द्वारा की गयी सेवा अविस्मरणीय रहेगा । वे लगभग 40 साल के पुराने महात्मा थे। पूज्य गुरुदेव भगवान के चरणों में उनका विशेष स्नेह था। पूज्य गुरुदेव भगवान की श्री परमहंस आश्रम जगतानंद आश्रम से श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ की आध्यात्मिक प्रवास की यात्रा में वे शामिल रहे। वे आध्यात्मिक अनुशासन के कड़े समर्थक थे। पूज्य गुरुदेव भगवान के नये शिष्यों के लिए वे अनुकरणीय रहे। आज पूज्य गुरुदेव भगवान की सेवा करते हुए उनके चरणों में ही उन्हें स्थान मिला। जन्म – जन्मांतर की आध्यात्मिक यात्रा के सफर में हमसफ़र होने में प्रयासरत पूज्य गुरुदेव भगवान के शिष्य पूज्य श्री जैश्री महाराज जी आज ब्रम्हलीन हो कर आने वाली शिष्यत्व पीढ़ियों के लिए वे अविस्मरणीय अनुकरणीय रहेंगे । श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ के पूज्य गुरुदेव भगवान के शिष्यों ने उन्हें जगतानंद आश्रम के किनारे गंगा जी में जलसमाधि देकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
Author: NM News live
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