मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद ‘”प्रणव”
बाबा बागेश्वर धाम परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज का किये दर्शन
सतुआ आश्रम के संतोष दास भी किये दर्शन
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो।
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।।
चित्रकूट के धाम पर भई संतन की भीड़।
तुलसीदास चंदन घिसैं तिलक देत रघुवीर
सोशल मीडिया पर चर्चा के आदी बाबा बागेश्वर धाम धीरेंद्र शास्त्री आज श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ पहुंच कर विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज जी के पास पहुंच कर आशीर्वाद प्राप्त किए । सत्संग हाल पर बागेश्वर बाबा पण्डित धीरेन्द्र शास्त्री पूज्य श्री स्वामी जी का दर्शन किये और पूज्य श्री स्वामी जी के आदेश से उन्हें यथोचित आसन दिया गया । पंडित धीरेंद्र शास्त्री के आने की सूचना सुबह से ही सोशल मीडिया पर चल रही थी जिसको लेकर भक्तों संत महात्माओं श्रद्धालुओं में काफी उत्सुकता व उत्साह था। हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं भक्तों संत महात्माओं के बीच मंच पर पूज्य श्री स्वामी जी द्वारा उन्हें स्थान देने के बाद सत्संग/प्रवचन सुनाना सुरू किये। सद्गुरु ज्ञान बदरिया बरसे।
गंगा में बरसे यमुना में बरसे ताल तलैया तरसे।।
विस्तार से पूज्य श्री स्वामी जी ने कबीर दास के इस जटिल और उलटवासी दोहे की यथार्थ व्याख्या किये। इसके बाद अंदर भजन कक्ष में पूज्य श्री स्वामी जी के साथ बाबा बागेश्वर धाम गये जहां पर सनातन धर्म, गीतोक्त साधना पर विस्तार से चर्चा हुआ। सतुआ आश्रम के संतोष दास महाराज जी भी पूज्य श्री स्वामी जी का दर्शन किये । सत्संग हाल में पुज्य श्री स्वामी जी का सत्संग चल ही रहा था कि इसी दौरान बृहस्पतिवार की शाम 5:36 बजे सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ बाबा बागेश्वर धाम पहुंचे। सत्संग के दौरान भक्तों की काफी भीड़ का जमावड़ा लगा रहा, इस दौरान पूज्य श्री स्वामी जी की जय का उद्घोष किया गया। बाबा बागेश्वर धाम पंडित धीरेंद्र शास्त्री स्वामी जी के द्वारा सद्गुरु ज्ञान बदरिया
बरसे को सुना फिर उन्हें स्वामी जी के साथ झूले के पास ले जाया गया। यहां पूज्य गुरुदेव भगवान ने उन्हें गीतोक्त साधना के विषय में विस्तार से बताया । यथार्थ गीता में वर्णित धर्म शास्त्र, कर्म, सनातन, जाति, यज्ञादि पर विस्तार से चर्चा हुआ। पूज्य श्री स्वामी जी ने यह भी बताया कि महापुरुष बनने में विगत कई जन्मों के संस्कार काम करते हैं हमारे गुरु महाराज जी कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि वे एक दिन साधू बनेंगे। लेकिन उनके जन्म जन्मांतर के संस्कार उन्हें साधू बनने के लिए बाध्य कर दिये। समय से उन्हें उनको गुरू महाराज मिल गये उन्हें आकाशवाणी हुई और भजन में लग गए, अहर्निश भजन चलता रहा अंततः निवृत्ति हुई और
भगवान के आदेश से वे जनम भर अनुसुइया चित्रकूट में पड़े रहे और वहीं से उनके चरणों से मानवता के कल्याण की अविरल धारा प्रवाहित होती रही। पूज्य गुरुदेव भगवान के एक -एक शब्द को बाबा बागेश्वर धाम पंडित धीरेंद्र शास्त्री हृदयांगम किये।






