संपादकीय द्वारा वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”
पूज्य श्री स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के समक्ष अंतर्राष्ट्रीय बांसुरी वादक मुकेश “मधुर” व छोटेलाल की भव्य प्रस्तुति

महापुरुष खुद एक राग है, जो संसार के लिए एक अद्भुत दिव्य अनमोल खजाना हैं, उनके चरणों से अविरल निर्मल कलरव करती हुई निकली दिव्य अनहद नाद की धारा पूरे संसार को राग रानियों में डुबो रही है जिसे वही सुन रहा है वही अनुभूति कर रहा है जिस पर गुरुदेव भगवान कृपा वर्षा रहे हैं । इस अनहद नाद के उस्ताद कोई संसारी गुरु नहीं बल्कि खुद गुरुदेव भगवान हैं। अनादिकाल से ऋषि-मुनियों के आध्यात्मिक ज्ञान का संवर्धन- संरक्षण व प्रचार करने वाले विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज को, देश -विदेश के अगणित कलाकार अपनी शानदार
प्रस्तुति से पूज्य गुरुदेव भगवान की सेवा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अपनी गायन – वादन की कला से भगवान को रिझाने- मनाने की कला पुरातन है महर्षि नारद, सूरदास , माता मीरा, तुलसीदास आदि जैसे शिरोमणि महापुरुष इसके उदाहरण हैं। इसी क्रम में 21 सदीं के समय के महापुरुष पूज्य गुरुदेव भगवान का सद्गुरु दरबार श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ गीतकार, संगीतकार, बिरहा गायक पत्रकार आदि से भरा पड़ा रहता है। अपनी हुनर कला की शानदार प्रस्तुति से वे पूज्य गुरुदेव भगवान को रिझाकर, प्रसन्न कर उनके कमलवत चरणों में डूबकर भक्ति का गोता लगाने का काम करते हैं। ऐसे कलाकारों में मशहूर हास्य-व्यंग्य फिल्म इंडस्ट्री कलाकार राजू श्रीवास्तव जो आज हमारे बीच नहीं हैं, मशहूर विरहा गायक विजय लाल यादव, ओमप्रकाश यादव, उजाला यादव , भजन गायक ओपी मिश्रा मुंबई, अनुराग मिश्रा बरचर,वाराणसी कलाकार बृजमोहन सिंह , मोहक अंदाज की प्रस्तुति के मालिक मोहन यादव,
मुंबई बॉलीवुड कलाकार पंकज, पांडे जी लखनऊ, शिवतांडव करने वाले गौरव बाबा, आदि कलाकार शामिल हैं। इसी क्रम में डाक्टर राम मनोहर लोहिया की क्रांतिकारी धरती के निवासी अंतरराष्ट्रीय सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक दूरदर्शन व आकाशवाणी कलाकार मुकेश प्रजापति “मधुर” व आस्था चैनल के पुराने कलाकार छोटेलाल निषाद “प्रणव” ने भी अपनी शानदार प्रस्तुति की, जिसमें मुकेश “मधुर” की अपने जीवन काल की पूज्य गुरुदेव भगवान के दरबार में पहली प्रस्तुति थी और छोटेलाल “मृदुल” की चौथी। दोनों कलाकार लगभग एक बजे दिन में पहुंच चुके थे सर्वप्रथम वे पहुंचकर धूना पर प्रणाम किये, तत्पश्चात पूज्य गुरुदेव भगवान से झूला पर पहुंच कर उनका दर्शन किये और अपना परिचय देकर अपनी कला प्रस्तुति की आज्ञा ली । पूज्य गुरुदेव भगवान प्रसन्न मन से उन्हें आशीर्वाद दिया । दोनों कलाकार भोजन- प्रसाद के बाद अपनी कला प्रस्तुत किये। मुकेश प्रजापति “मधुर” एकल बांसुरी वादन करते हुए लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायक छोटेलाल “मृदुल” के मधुर भजन पर शानदार संगत करते हुए श्रोतागणों को भावविभोर कर दिया। राग यमन पर आधारित श्री कृष्ण भजन *””श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवाय”* व राग भूपाली पर आधारित *”गोविंद बोलो हरी गोपाल बोलो”* पर उन्होंने शानदार प्रस्तुति की। गायक छोटेलाल “मृदुल” वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव” द्वारा लिखित गुरु वंदना-
“ओसियां से जो निकली है ग़गा अनुसुइया में संगम हुआ है”।
“निकली चित्रकूट से जो चिनगारी इस धरा पर वो ज्वाला बनी है।।” गाकर सुनाये। तत्पश्चात पूज्य गुरुदेव की आध्यात्मिक ज्ञान को परिभाषित सुंदर भजन “घट ही में दियना जलैबै बाहेर हम काहे के जइबै” गाकर सुनायें । पूज्य गुरुदेव भगवान की आध्यात्मिक ज्ञान की दिव्य आभा में बैठे हजारों की संख्या में श्रद्धालु, संत – महात्माओं के बीच पूज्य श्री लाले महाराज जी की *चित्त वृत्ति ही नारी है का सत्संग भी चला* । दोनों कलाकारों की प्रस्तुति सुन उनकी कला की सराहना के बाद पूज्य गुरुदेव भगवान ने उन कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजन की आध्यात्मिक व्याख्या भी की। उन्होंने अपने उद्बोधन में बताया कि सद्गुरु एक स्थिति है जिस स्थिति को पाने के लिए किसी तत्व द्रष्टा महापुरुष के शरण में जाकर उनसे ज्ञान सीखकर उनके संरक्षण में भजन -सेवा करने के बाद ही संभव है। यह पूरी तरह क्रियात्मक है जिस पर चलकर ही पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर को कैसे पायें? सद्गुरु का ध्यान आदि कैसे करें? क्रिया कैसे जाग्रत होगी ? यह सब विस्तार से यथार्थ गीता में मिलेगा जो पूर्णरूपेण ईश्वरीय आकाशवाणी वाणी है। सत्संग प्रवचन के बाद आर्त भक्तों ने परम पिता परमेश्वर पूज्य गुरुदेव भगवान से अपनी-अपनी व्यथा सुनाई सबको पूज्य गुरुदेव भगवान ने आशीर्वाद दिया। तत्पश्चात वरिष्ठ पत्रकार बांकेलाल निषाद “प्रणव” के साथ आये कलाकारों को पूज्य गुरुदेव भगवान ने अंगवस्त्र भेंटकर उन्हें आशीर्वाद दिया ओम जप गीतोक्त साधना की विधि बताये। पूज्य श्री मेघई महाराज जी, पूज्य श्री नारद महाराज जी, पूज्य श्री तानसेन महाराज जी, पूज्य श्री लाले महाराज जी, पूज्य श्री सोहम महाराज जी, पूज्य श्री राकेश महाराज जी , पूज्य श्री दीपक महाराज , जी पूज्य श्री फक्कड़ महाराज जी, पूज्य श्री राजीव महाराज जी, पूज्य श्री कुंवर महाराज जी, पूज्य श्री साहब महाराज जी, पूज्य श्री प्रेम महाराज जी, पूज्य श्री जयराम महाराज जी आदि पूज्य गुरुदेव भगवान के दर्जनों शिष्यों से कलाकारों ने मिलकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किये। पहली बार आये मुकेश प्रजापति “मधुर” को श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ का कल्चर बहुत भाया। पूज्य गुरुदेव भगवान की विराट
आध्यात्मिक आभा से वे अभिभूत हो गये। संतों की रहनी, आश्रम की मर्यादा, पूज्य गुरुदेव भगवान की बनाई ईश्वरीय अनुशासन से वे आत्मतृप्त हो गये। मुकेश “मधुर” ने कहा कि इतने दिव्य सुंदर प्राकृतिक रमणीय आश्रम पर बांसुरी वादन करके तन – मन नवीन ऊर्जा और आनंद से भर गया। ह्रदय में नवस्फूर्ति का संचार हो उठा और ऐसे महापुरुष का साक्षात दर्शन करके मेरा जीवन धन्य हो गया।






