National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

March 23, 2026 2:00 pm

National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

Follow Us

March 23, 2026 2:00 pm

नवीनानंद (नया महाराज जी) की पुण्यतिथि पर गीता पाठ व विशाल भंडारा ।

अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”

 

नवीनानंद (नया महाराज जी) की पुण्यतिथि पर गीता पाठ व विशाल भंडारा ।

 

जनपद अम्बेडकर नगर के तहसील जलालपुर अंतर्गत श्री परमहंस आश्रम मुस्तफाबाद भुजगी में आज पूज्य नवीनानंद जी महाराज (नया महाराज जी) की पांचवीं पुण्यतिथि भक्तों द्वारा मनायी जा रही है । आज ही के दिन 14 अगस्त को पूज्य नया महाराज जी ब्रम्हबेला में अपने पंचतत्व की शरीर से मुक्त हुए थे। श्री मद्भागवत गीता के भाष्यकार जो यथार्थ गीता के रूप में धरा धाम पर बसे मानवता को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज कहते हैं कि शरीर तीन होते हैं स्थूल शरीर, कारण शरीर व सूक्ष्म शरीर। यह शरीर पूर्ण रूप से संस्कारों पर निर्भर है जब तक एक भी संस्कार बाकी है तब तक शरीर की यात्रा करना ही पड़ता है। पूज्य नया महाराज जी लगभग 77 वर्ष की अवस्था में पंचतत्व में विलीन हुए थे। साधना की सात भूमिकाओं में वे किसी भूमिका में थे तो गुरुदेव भगवान ही जानें लेकिन उनकी रहनी उनकी विभूतियों से ऐसा लगता था कि वे पूज्य गुरुदेव भगवान की आज्ञा में शत् प्रतिशत रहने का प्रयास करते थे। पूज्य गुरुदेव भगवान का चाहे कोई साक्षात आदेश हो या अंतःकरण में कोई सूक्ष्म शरीर से कोई आदेश हो , हर आदेश का वे पालन करते थे और आने वाले भाविकों से वे जोर देकर कहते थे कि गुरूदेव भगवान की आज्ञा का पालन हर हाल में करना चाहिए। आश्रम में रहते उन्होंने पूज्य गुरुदेव भगवान की विद्या का खूब प्रचार प्रसार किया और श्री परमहंस आश्रम मुस्तफाबाद के विकास और विस्तार में भी उनका विशेष योगदान रहा । पूज्य नवीनानंद जी महाराज आज हम लोगों के बीच नहीं हैं लेकिन भक्त मंडली हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर यथार्थ गीता पाठ ,भोजन प्रसाद भंडारा के माध्यम से उन्हें और उनकी रहनी व उनके चमत्कार के माध्यम से चर्चा परिचर्चा कर उन्हें याद करते हैं। पूज्य नया महाराज जी अक्सर पूज्य श्री गुरूदेव भगवान के कृतित्व और व्यक्तित्व के बारे में भक्तों को बताया करते थे। पूज्य गुरुदेव भगवान कहा करते हैं कि यह शरीर संस्कारों पर आधारित है । संस्कारों को खत्म करने में कई जन्मों की यात्रा करनी पड़ती है।* *प्रयात्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धिकिल्बष:*।*

अनेकजन्मसंसिद्धिस्ततो याति परां गतिम।।

भजन के पराकाष्ठा में पूज्य श्री स्वामी जी के सारे संस्कार कट गये थे लेकिन एक संस्कार बाकी था यथार्थ गीता लिखना। पूज्य गुरुदेव भगवान सोचे कि हमें पढ़ने लिखने से क्या मतलब । इस संस्कार को भी भजन से काट देंगे लेकिन पुनः आकाशवाणी हुई यथार्थ गीता लिखना ही है अंततः पूज्य गुरुदेव भगवान को भगवान का आदेश मानना ही पड़ा। अक्षरशः भगवान के आदेश से उन्होंने यथार्थ गीता लिखा और आज संसार के सामने है। आत्मा अजर-अमर है शास्वत सनातन है

नैनं छिन्दन्ति वस्त्रादि नेनं दहति पावक: ।

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुति:।। इस अवसर पर पूज्य बलराम महाराज जी पूज्य गुजराती महाराज जी विनय महाराज जी उपस्थित होकर पूज्य नया महाराज जी को याद किए और उनकी आत्मा के कल्याण हेतु उनकी समाधि पर जाकर पूज्य गुरुदेव भगवान से प्रार्थना किये।

NM News live
Author: NM News live

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *