वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”
जलालपुर तहसील:– कोर्ट चलाने के दृष्टिगत बार – बेंच से वार्ता करेंगे डीएम

महीनों बीत जाय , न्याय की आश में वर्षों से जलालपुर तहसील के कोर्ट का चक्कर लगाते – लगाते चप्पल घिस जाय, मुकदमें में पैरवी कर रहे वकीलों को फीस देकर हताश-निराश मुवक्किल जब अपने घर – परिवार में जब वापस पहुंचता है तो परिवार को जवाब मिले कि कोर्ट नहीं चला। परिवार वाले सुनकर फिर न्याय की आश में अगली डेट का इंतजार करें फिर कोर्ट न चलने की अगली डेट फिर डेट, डेट पर डेट कहां का डेट तो ऐसे डेट पर डेट वाले न्याय की वेदी का नाम है जलालपुर तहसील । कोर्ट न चलने का इस तहसील का रेकार्ड है। फिलहाल आज तहसील दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने आश्वासन दिया है कि बार और बेंच से वे वार्ता करेंगे और कोर्ट रेगुलर चले इसके लिए कोई न कोई स्थाई हल निकालेंगे। उन्होंने बताया कि राजस्व संहिता वाद का निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से है। माननीय मुख्यमंत्री जी का राजस्व निस्तारण वाद पर काफी जोर है, उनका समाधान सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से है । उन्होंने चार दिन पहले माननीय मुख्यमंत्री जी के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों, एडीएम उपजिलाधिकारियों, तहसीलदार नायब तहसीलदार सभी को एक निर्देश जारी किया है कि राजस्व संहिता से संबंधित मामलों को त्वरित निस्तारित किया जाय। और
इसके साथ ही साथ वे ये भी देख रहे हैं कि कौन से जिले में किस तहसील में और किस कोर्ट पर कितने मामले निस्तारित किए जा रहे हैं। इसी आधार पर यह देखा जा रहा है कि किस प्रकार के मुकदमें कितनी तेजी से निपटाये जा रहे हैं निस्तारण के संबंध में किस जिले का कितना पर्सेंट है उन्हें टेन, टाप टेन, बाटम तल की रैंकिंग भी दी जा रही है। और इसके साथ -साथ सीएम डेस्क बोर्ड की जो रैंकिंग निकलती है उसमें भी राजस्व वालों को स्थान दिया गया है। इसी के दृष्टिगत उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले मैंने जिले के सभी एसडीएम सीओ को एक लेटर जारी किया है कि प्रतिदिन वे कम से कम दो घंटे कोर्ट करें जिससे दूर -दराज से आए मुवक्किलों को न्याय मिल सके , उन्हें हताश-निराश होकर वापस न जाना पड़े। उन्हें न्याय देना और उनके साथ न्याय करना ये हमारी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि बार अध्यक्ष से और तहसील के एसडीएम आदि से मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा किया जायेगा और कोर्ट को चलवाया जायेगा। उन्होंने चार मिनट एक सेकेंड तक, प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि आज इस तहसील में देखा गया कि कोर्ट न चलने का तो मामला है ही उसके साथ- साथ यहां आबादी संबंधित मामले 95% हैं । हालांकि कि आबादी संबंधित मामले सिविल का होता है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने बताया कि गांव में कसीदगी न हो इसके दृष्टिगत राजस्व अधिकारियों और पुलिस को यह निर्दिष्ट किया गया है कि वे गांव में जांय और बैठकर सुलह समझौते के आधार पर मामलों को निस्तारित करें। फिलहाल डीएम द्वारा बार और बेंच के बीच वार्ता कितनी असरदार होगी? मुवक्किलों के साथ कितना न्याय होगा? यह अभी समय के गर्भ में है।






