जौनपुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद प्रणव”
शक्तेषगढ़ से पहुंचे संत, सत्संग की गंगा में डुबकी लगाये भक्त ।

बजाओ ढोल स्वागत में मेरे घर राम आये हैं, यह पवित्र भजन बजते ही कर्णकुहरें सुखानुभूति की गोते लगाने लगती हैं और यदि जिसके घर चलता फिरता संत समाज तीर्थ राज प्रयागराज ही पहुंच गया हो तो कल्पना करिए कि वह आज किस आनंद में डूबा होगा? उसका परिवार, उसका पड़ोसी, उसकी माटी धन्य धन्य हो गयी होगी और यदि यह संत समाज शक्तेषगढ़ आश्रम से कालजयी समय के महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज की आज्ञा से उनके ही सत्यान्वेशी अखाड़े से उनकी विद्या के संदेश वाहक पूज्य लाले महाराज जी, पूज्य कृष्णानंद जी महाराज, अंकुश महाराज शर्मा बाबा और विनोद बाबा पदार्पण किये हों तो फिर सोने पर सुहागा हो जाता है। और आज जिन महात्माओं का पदार्पण जिनके घर हुआ वे हैं सौभाग्यशाली भक्त जौनपुर के जमालापुर पट्टी निवासी पंकज सिंह। चलते फिरते तीर्थ राज प्रयागराज संतों का चरण वंदन के बाद उनके मुखारविंद से अमृत वाणी का प्रस्फुटन हजारों भक्तों के बीच हुआ और वे श्रवण कर कृतार्थ हुए। पूज्य श्री लाले महाराज जी बताये कि मन का निरोध और संयम कैसे होगा,? मन की बहिर्मुखता कैसे समाप्त होगी? मन अंतर्मुखी कैसे होगा? उन्होंने कहा कि जब तक एक ईश्वर के नाम का जप नहीं करेंगे तब तक भजन में मन नहीं लगेगा ज्यों ज्यों नाम जपते जाएँगे ॐ अथवा राम का और सद्गगुरु के स्वरूप का ध्यान करते जाएँगे तब भजन में मन स्थिर होता चला जायेगा। उन्होंने कहा कि नाम रुप लीला और धाम में कहीं न कहीं मन को लगाये रखना चाहिए अगर मन को छुट्टी देंगे तो माया में ही भागेगा । इसलिए अहर्निश नाम जप करना चाहिए तभी मन बस में हो सकता है। यथार्थ गीता धर्म शास्त्र के बिषय में भी उन्होंने बताया कि यथार्थ गीता के अनुसार चलेंगे तो समाज में जो फैली कुरीतियाँ हैं उनसे छुटकारा मिलेगा। जाति पाँति भेद भाव छुआ छूत की जो दरारें है उनसे मुक्ति मिलती जाएगी और अंत में लाले महाराज जी ने बताया कि ईश्वर एक , पाने की विधि एक, और प्राप्ति वाली स्थिति भी एक ही है और वो विधि है गीतोक्त विधि। यथार्थ गीता के अनुसार विधि जब अपनायेंगे तो इसी में पूरे संसार का कल्याण होगा और श्री कृष्णानन्द महाराज बताये कि भक्ति क्या है? उन्होंने नवधा भक्ति के विषय में बताया कि प्रथम भक्ति सन्तन कर संगा ।। कि भक्ति के श्रोत संत- महापुरुष होते हैं उनके द्वारा भक्ति प्राप्त होती है । श्री शर्मा बाबा उर्फ़ अंकुश महाराज बताये कि दान पुण्य किए रहो तब उद्धार होगा। दान पर विशेष बल वो दिये कि दान परमात्मा की तरफ़ और संग्रह संसार की तरफ़ ले जाता है उन्होंने कहा कि संतों को दान करना ही महान कार्य है अंत में हज़ारों भक्तों ने आशीर्वचन और आशीर्वाद प्राप्त किए । पंकज सिंह यथार्थ गीता पाठ का आयोजन भी किये और यथार्थ गीता भी वितरित किए और भोजन प्रसाद की व्यवस्था भी सुचारु रूप से प्रदान किये । भंडारा देर रात तक चला। हज़ारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया ।






