अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
विक्रय- बंधक से प्रतिबंधित होगा बाबा गोविंद साहब मंदिर की जमीन — महन्त भगेलू दास
भारत एक धर्मप्राण देश है। यह देश महान संत महात्माओं ऋषि-मुनियों महापुरुषों की जन्मस्थली रहा है। इसी क्रम में महान संत बाबा गोविंद साहब, एक ऐसे महापुरुष हुए जिनके नाम से दर्जनों धर्म प्रचारक केंद्र मठ मंदिर के रूप में अन्य जनपदों से भी संचालित हो रहा है जहां रहकर उनके अनुगामी शिष्य गण बाबा गोविंद साहब के विचारों का भक्तों में प्रचार प्रसार करते चले आ रहे हैं। ऐसे ही महान संत बाबा गोविंद साहब के शिष्य गणों की लंबी फेहरिस्त में एक नाम बाबा भगेलू दास जी का है । जिन्होंने बाबा गोविंद साहब के यश-कीर्ति में उत्तरोत्तर वृद्धि में योगदान दिया। अभी हाल ही में उन्होंने लगभग सौ बीघा जमीन बाबा गोविंद साहब मठ के नाम अपने अथक परिश्रम और बाबा गोविंद साहब की कृपा से कराया है जिसकी विक्री बंधक अब कोई संत भेषधारी असंत नहीं कर सकता । यहां तक कि उन्होंने ऐसी विधिक बाध्यता कर दी है कि उसका विक्रय बंधक हो ही नहीं सकता । जिससे हर वर्ष लगने वाले सुप्रसिद्ध बाबा गोविंद साहब के सवा महीने चलने वाले मेले को विस्तार दिया जा सके और भक्तों के भारी भीड़ को सुव्यवस्थित, शासन-प्रशासन कर्मीयों को विशेष सुविधा प्रदान किया जा सके; यहां तक कि मेला पीरियड के इतर भक्तों संत महात्माओं व दूरदराज से आने वाले भाविकों के लिए रचनात्मक, सृजनात्मक, सेवा व संवर्द्धन किया जा सके। बाबा भगेलू दास जो वर्तमान में श्री गोविन्द साहब मंदिर के अध्यक्ष/ महंत हैं वे उन मठाधीशों संतो से अलग हैं जिन्होंने बाबा गोविंद साहब के नाम जमीनों की विक्री कर अपनी आत्मा को अधोगति में पहुंचाते हुए सांसारिक दृष्टिकोण से मालामाल तो होते रहे लेकिन जगत मिथ्या के मकड़जाल में फंसते रहे। इतना ही नहीं ऐसे आत्मघाती मठाधीश बाबा गोविंद साहब के निर्मल/ विमल यश-कीर्ति को ठेस पहुंचा कर आत्मोन्नत में प्रयासरत भक्तगणों को दिग्भ्रमित करते रहे । लेकिन बाबा गोविंद साहब के शिष्यों की लंबी फेहरिस्त में बाबा कोमल दास व बाबा रामभजन दास के संरक्षण में बाबा भगेलू दास अपनी आध्यात्मिक विद्या की शिक्षा-दीक्षा ग्रहण किये और अपने आप को बाबा गोविंद साहब के चरण रज के पीयूष को पान कर कृतार्थ करते रहे । धर्मा पट्टी गांव का एक बालक जिसके ऊपर से लगभग सात वर्ष की आयु में ही माता-पिता की छत्रछाया उठ गया । अपने जन्म-जन्मांतर के भक्तिमय संस्कारों से फलीभूत उस बालक पर कृपा कर सद्गुरु बाबा गोविंद साहब उसे अपने चरण सेवा का अवसर प्रदान किया। बाबा कोमल दास व बाबा रामभजन दास के विराट आध्यात्मिक वट वृक्ष की छाया में शिक्षा-दीक्षा की पाठशाला से आगे निकल कर वह बालक अपनी पैतृक संपत्ति की विक्री कर आजमगढ़ जनपद में सेनपुर स्थित औघड़ बाबा की कुटी जो महान तपोस्थली थी योगीपुर में उस पर वृहद आश्रम का निर्माण अपने दिशानिर्देश में कराया और वहीं बाबा गोविंद साहब की कृपा से अपने आत्मकल्याण के लिए धूनी रमाया । कुछ दिन बीतने पर वही बालक बाबा भगेलू दास के नाम से सुविख्यात हुआ और महान आयुर्वेदाचार्य हुआ। भक्तों के आध्यात्मिक कल्याण के साथ- साथ रुग्ण भक्तों के कल्याणार्थ अपने आप को समर्पित कर दिया। वही सात वर्ष का बालक आज बाबा भगेलू दास के नाम से जाना जाता हैं। 2017 से माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश से बाबा श्री गोविंद साहब मंदिर का महन्त/ प्रबन्धक नियुक्त हुए । अध्यक्ष के रूप में आपके द्वारा विभिन्न प्रकार के बाबा गोविंद साहब मठ के हितार्थ व भक्तों संत महात्माओं श्रद्धालुओं के कल्याणार्थ तमाम सृजनात्मक व रचनात्मक कार्य किये गये हैं जिससे आपको क्षेत्र में विशेष प्रसिद्धि मिली है । उन विभिन्न विशेष सृजनात्मक रचनात्मक कार्यों में एक काम ये भी है कि बाबा गोविंद साहब मठ के नाम लगभग सौ वीघा जमीन हो जाने पर अब कोई अनाधिकारी उसकी विक्रय बंधक नहीं कर सकता। अपने 85 वर्ष की आयु में इतना आत्मबल तेज और बाबा गोविंद साहब की अपार कृपा से सुशोभित ऐसे संत को कोटि-कोटि प्रणाम ।






