National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

March 23, 2026 2:00 pm

National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

Follow Us

March 23, 2026 2:00 pm

बिहारी लाल स्मारक महाविद्यालय के संस्थापक की पुण्यतिथि पर यथार्थ गीता पाठ।

अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
बिहारी लाल स्मारक महाविद्यालय के संस्थापक की पुण्यतिथि पर यथार्थ गीता पाठ।
पितृपक्ष में पुण्यतिथि पर यथार्थ गीता पाठ का हो रहा है आयोजन
पितृपक्ष चल रहा है चौदह दिन तक रहेगा । पितृपक्ष के नाम पर भ्रांतियां समाज में फैली हुई हैं, खासकर विश्व गुरु भारत में। जैसे हर धार्मिक भ्रांतियों का समाधान यथार्थ गीता है ठीक उसी तरह पितृपक्ष के नाम पर फैली भ्रांति का समाधान भी यथार्थ गीता है। इसीलए आज पितृपक्ष के अवसर पर यथार्थ गीता की महत्ता के समक्ष प्रणत/ वंदन करते हुए सेनपुर भटपुरवा निवासी बिहारी लाल स्मारक महाविद्यालय के प्रबंधक स्वर्गीय जयप्रकाश यादव के छोटे भाई वेद प्रकाश गोपाल द्वारा यथार्थ गीता पाठ का आयोजन कराया गया। यह यथार्थ गीता पाठ उनके पिता बिहारी लाल स्मारक महाविद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय तीर्थराज यादव की पुण्यतिथि पर संपन्न हुआ। ज्ञातव्य हो कि वेद प्रकाश गोपाल कुल पांच भाई हैं जिसमें इन दोनों भाइयों के अतरिक्त दो अन्य भाई सत्य प्रकाश, ज्ञान प्रकाश व ओमप्रकाश है जो महाविद्यालय के अलग-अलग विभागों के प्रबंधक हैं। इन पांचों भाइयों व उनके पिताजी की अमूल्य धरोहर इस विद्यालय से आज पूरा छेत्र जिला समाज उत्तम शिक्षा से आलोकित हो रहा है। यह पूरा परिवार पूज्य श्री स्वामी जी का विगत कई वर्षों से भक्त है और पूज्य श्री स्वामी जी के वचनों के पालनार्थ पितृपक्ष में पिता जी की दिवंगत आत्मा की शांन्ति हेतु यथार्थ गीता पाठ का आयोजन करा रहा है। अब जो सबसे जटिल प्रश्न है जिसमें लोग भ्रांति में है पितरों को पानी दे रहे हैं उनकी मुक्ति की कामना कर रहे हैं, जीते जी पिताजी की उपेक्षा अवहेलना वृद्धावस्था में वृद्धा आश्रम में भेजना, श्रवण रोल को छोड़ तरह तरह की पिताजी के सामने मुसीबतें पैदा करना इत्यादि समस्या और मृत्यु के बाद पानी देकर उनकी आत्मा की मुक्ति की कामना करना ये सब धार्मिक भ्रांतियों की ही देन है। अब विश्व गुरु भारत में इन भ्रांतियों का समाधान विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी अलमस्त सर्वज्ञ सनातन संस्कृति के वाहक परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज कृत यथार्थ गीता में है। अब प्रश्न उठता है कि *पितर क्या है?* पूज्य श्री स्वामी जी कहते हैं कि अतीत के संस्कार ही पितर हैं। जब हम परमात्मस्वरूप सद्गुरु के प्रति समर्पित होकर साधना करने लगते हैं तो ये संस्कार तृप्त होने लगते हैं अर्थात कटने लगते हैं। यही पितरों का उद्धार है। हमारा जन्म संस्कारों पर आधारित है जो संस्कार बचा है उसको भोगने के लिए जन्म लेना पड़ता है। जब तक अंतिम संस्कार बाकी है तब तक शरीर की यात्रा करनी ही है अर्थात जन्म और मृत्यु के बीच कारण संस्कारों की श्रृंखलाएं हैं। संस्कारों का नया सृजन न हो और जन्म जन्मांतर के संस्कारों से हमें मुक्त होना हो तो शिवस्वरूप सद्गुरु की शरण में हमें जाना पड़ेगा। ज्यों ज्यों सद्गुरु के ज्ञान का प्रकाश साधक के अंतःकरण को प्रकाशित करेगा त्यों त्यों संस्कार तृप्त होते जायेंगे अर्थात कटते जायेंगे, और एक दिन सद्गुरु कृपा से जन्म जन्मांतर के इन संस्कारों का शमन हो जायेगा। तो फिर *चिदानंद रूप: शिवोहम शिवोहम* की स्थिति आ जाती है।
NM News live
Author: NM News live

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *