अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह के निजी आवास पर यथार्थ गीता पाठ
भाजपा नेता दिव्यांशु सिंह प्रिंस के सौजन्य से हुआ संपन्न
जनपद अम्बेडकर नगर के जलालपुर तहसील अंतर्गत देश के वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता बाबू बब्बन सिंह के सुपुत्र रामकृपाल सिंह के घर गौरा पलिवाली में यथार्थ गीता पाठ का आयोजन किया गया जिसमें उनके भाई अनिल सिंह काका, भाजपा युवा नेता व जिला सहसंयोजक राष्ट्रीय सदस्यता अभियान भाजपा दिव्यांशू सिंह प्रिंस ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और इनका विशेष योगदान रहा। यथार्थ गीता पाठ कल लगभग 11 बजे से शुरू हुआ और संपन्न आज प्रातः 5 बजे हुआ। यथार्थ गीता वाचन में समय लगभग 18 घंटे लगता है। यथार्थ गीता पाठ का आयोजन परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद महराज जी के शिष्य संत, महात्मा , श्रद्वालु, भक्तगण
किसी विशेष अवसर पर जैसे गृह प्रवेश, शादी विवाह, जन्मदिन, ब्रह्मभोज आदि अथवा अनिष्टकारी शक्तियों से बचने के लिए कराया जाता है। यथार्थ गीता पूर्णरूपेण मजहब मुक्त मानव मात्र का धर्म शास्त्र है। यह पूर्ण रुप से ब्रम्हविद्या है गुरु शिष्य संवाद है। भगवान श्री कृष्ण सद्गुरु महापुरुष थे और अर्जुन उनका सत्यान्वेषी प्रिय शिष्य था।आज से लगभग 52 सौ वर्ष पहले कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों सेनाओं के बीच शिष्य अर्जुन के युद्ध न करने के निर्णय पर सद्गुरु श्री कृष्ण ने शिष्य अर्जुन को उपदेश दिया था उसके शंकाओं का समाधान कर उसे युद्ध के लिए प्रेरित किया। यहां तक कि भगवान श्री कृष्ण ने शिष्य अर्जुन के समाधान के लिए अपना विराट चतुर्भुज स्वरूप दिखाया। पूज्य गुरुदेव भगवान ने यथार्थ गीता में वर्णित किया है कि मनुष्य के अंतःकरण में ही कुरुक्षेत्र – धर्मक्षेत्र, आसुरी संपदा – दैवीय संपदा, विद्या – अविद्या उसके संस्कार के अनुसार पायी जाती है। जब साधक सद्गुरु के शरण में जाता है तो उनकी कृपा से अंतःकरण में कौरव-पांडव की जंग छिड़ जाती है। सद्गुरु कृपा से साधक आसुरी संपदा की प्रतीक कौरवों की सेना को परास्त कर धर्मधुरंधर दैवीय संपदा के प्रतीक पांडवों का राज्याभिषेक हुआ। जिस तरह से भगवान श्री कृष्ण पांडवों को हर खतरों से बचाते रहे ठीक इसी प्रकार सद्गुरु महापुरुष अपने साधक शिष्य को परमात्मपर्यंत की दूरी तय करने तक संभालते रहते हैं और हर खतरों से अवगत कराते रहते हैं। पूज्य गुरुदेव भगवान स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज यथार्थ गीता को चार बार आवृत्ति करने के लिए
कहते हैं जिससे मानवमात्र के धर्म विषयक भ्रांतियों का निवारण हो सके। इस अवसर पर समाज सेवी विजय प्रताप सिंह, प्रिंसिपल रवीन्द्र सिंह, डाक्टर रामजन्म सिंह , विनय सिंह , सप्लाई इंस्पेक्टर ओम् चंद सिंह भाजपा नेता अंशुमान सिंह ऋषभ आदि भक्तगण उपस्थित रहे।






