बाबा गोविंद साहब मेले में फक्कड़ बाबा द्वारा बांटा गया यथार्थ गीता
बाबा गोविंद साहब मठ के मठाधीश भगेलू महाराज जी व मेलार्थियों पुलिसकर्मियों को दिया गया यथार्थ गीता

विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्य पूज्य श्री फक्कड़ महाराज जी ने पूर्वांचल के सुप्रसिद्ध मेला बाबा गोविंद साहब में यथार्थ गीता का वितरण किये। यथार्थ गीता के साथ- साथ भजन किसका करें?, देवी पूजन की वास्तविकता क्या है? , हिन्दू जीवन पद्धति नहीं साधना है, वर्ण -व्यवस्था जाति- व्यवस्था, आर्य हिंदू सनातन, सद्गुरु व महापुरुष इत्यादि पूज्य गुरुदेव भगवान द्वारा रचित धार्मिक पुस्तकों को बांटा गया। बाबा गोविंद साहब मठाधीश भगेलू महाराज जी व उनके गुरु भाई , मेला प्रभारी कोतवाल राजेंद्र प्रसाद, मां जानकी इंटर कालेज अर्नव गुलजार कप्तानगंज के विद्यार्थियों को, व श्रद्धालुओं मेलार्थियों व पुलिस कर्मियों को दिया गया। खजले वाले दुकानदारों को भी उक्त धार्मिक पुस्तकों को बांटा गया, महिला पुलिस कर्मियों जल पुलिस कर्मियों आदि लोगों को यथार्थ गीता का वितरण किया गया। पूज्य श्री फक्कड़ महाराज जी ने कहा कि एक परमात्मा का भजन करें ओम का जप करें गीतोक्त साधना पर चलें । पूज्य श्री फक्कड़ महाराज जी ने बताया कि ओम जप जब करेंगे और पूज्य श्री स्वामी जी का ध्यान करेंगे तो तीन से चार महीने में आपके हृदय से पूज्य गुरुदेव भगवान रथी हो जायेंगे और आपका मार्गदर्शन करने लगेंगे, आपको लगेगा कि कोई आपके आगे पीछे रहकर आपका मार्गदर्शन कर रहा है। यह है पूज्य गुरुदेव भगवान की भगवत्ता का प्रताप । उन्होंने बताया कि यथार्थ गीता पूरे विश्व के लिए है , यह पौरूषेय (मानव
लिखित) नहीं है यह विशुद्ध अपौरुषेय (ईश्वरीय वाणी) वाणी है। उन्होंने बताया कि भगवान पूज्य श्री स्वामी जी के पीछे पड़ कर लिखवाये हैं,। भगवान पूज्य गुरुदेव भगवान के श्रीमुख से बोलते गये और एक टेपरिकार्डर के माध्यम से उसे रेकार्ड कर लिया गया और उसे बाद में एक शिक्षक द्वारा लिपिबद्ध कर दिया गया। पूज्य श्री फक्कड़ महाराज जी ने बताया कि जब यथार्थ गीता समाज के सामने पहुची तो कौतूहल का विषय बन गयी लोग पूछने लगे कि कौन लिखा? कौन लिखा? धीरे-धीरे पूज्य गुरुदेव भगवान ने समाज के सारे कौतूहल को शांत कर दिया और आज यह धर्म संबंधित कौतूहल विश्वव्यापी स्थायी समाधान में बदल गया। पूरा संसार आज नेट के माध्यम से पूज्य गुरुदेव भगवान की वाणी सुनकर अपने आध्यात्मिक पिपासा को शांत कर रहा है। पूज्य श्री फक्कड़ महाराज जी ने बताया कि गीतोक्त साधना एक ऐसी विधि है जिसमें रूढ़िगत प्रपंच की आवश्यकता नहीं है। विशुद्ध अपौरुषेय ईश्वरीय वाणी मजहब मुक्त यथार्थ गीता के मार्ग को पकड़े। लक्ष्य (परमात्मा) जो अविदित है वह विदित हो जायेगा।






