डाकपत्थर महाविद्यालय में प्राकृतिक रंगों, भूगतिकी और बायोएंजाइम पर विशेष व्याख्यान
डाकपत्थर, 18 मार्च 2026।
वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में आयोजित एक विशेष व्याख्यान सत्र में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण संरक्षण और सतत जीवनशैली पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की सीमाओं के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान की श्रेष्ठता पर जोर दिया गया।
सत्र का शुभारंभ डॉ राकेश जोशी ने किया, जिन्होंने ‘Dying of Wool Fibers with Some Natural Dyes and Environment Impact’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रकृति से प्राप्त प्राकृतिक डाईज (रंगों) जैसे पौधों, फलों और खनिजों से निकले रंगों के गुणों पर विस्तार से चर्चा की। डॉ जोशी ने ऊन के रेशों को रंगने की विभिन्न प्रक्रियाओं जैसे किण्वन, उबाल और स्थिरीकरण के बारे में बताया। उन्होंने पर्यावरण पर कृत्रिम रसायनों के हानिकारक प्रभाव को रेखांकित करते हुए प्राकृतिक रंगों को इको-फ्रेंडली विकल्प बताया। विशेष रूप से, उन्होंने चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर पूर्ण निर्भरता संभव नहीं, क्योंकि यह मानवीय अनुभव और स्थानीय ज्ञान की कमी छोड़ देती है।
डॉ श्री कृष्ण नौटियाल ने ‘Geodynamics & Quest for Sustainable Infrastructure in the Himalaya’ विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप जैसे अंधाधुंध निर्माण से उत्पन्न विनाशकारी प्रभावों पर प्रकाश डाला। भूस्खलन, बाढ़ और भूकंप जैसे खतरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सतत अवसंरचना के लिए एआई और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय की वकालत की। डॉ नौटियाल ने पारंपरिक ज्ञान को सर्वोत्तम बताया, क्योंकि इसमें संस्कार, संस्कृति और पीढ़ियों का अनुभव समाहित होता है। सत्र का समापन डॉ रुचि बहुखंडी के व्याख्यान ‘Bioenzyme for Sustainable Living’ से हुआ। उन्होंने बायोएंजाइम्स फलों के छिलकों से बने प्राकृतिक क्लीनर के उपयोग से घरेलू सफाई, कृषि और पर्यावरण संरक्षण में योगदान पर चर्चा की।
मंच संचालन डॉ आराधना ने कुशलतापूर्वक किया। इस अवसर पर प्रोफेसर राधेश्याम गंगवार, प्रोफेसर अरविंद अवस्थी, डॉ पूजा राठौर, डॉ नीलम ध्यानी, डॉ मीनाक्षी राना, डॉ मंजू गौतम, डॉ रुचि बहुखंडी, डॉ ए एम पैन्यूली, डॉ रोहित वर्मा, डॉ केस्टवाल, डॉ परवेज आलम, डॉ प्रेम सिंह चौहान, अभिषेक गौड़, डॉ विनोद सिंह रावत, डॉ डीके भाटिया, डॉ माधुरी रावत, डॉ दीप्ति बगवाड़ी, डॉ सीमा पुंडीर आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने पर्यावरण जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया।






