जयपुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
नहीं रहे पूज्य श्री स्वामी जी के समर्पित भक्त श्री भगवान सिंह।
राजस्थान समेत पूरे देश के क्षत्रियों को यथार्थ गीता अपनाने के लिए किया था आह्वान
पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के समर्पित भक्त शिरोमणि क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक भगवान सिंह रोलसाहबसर आज हम सभी भक्तों को यथार्थ गीता के नक्शे कदम पर चलने की नसीहत देकर, बीच में ही हमें छोड़ कर चले गये । उनका जाना हम लोगों के लिए यह संदेश है कि जाओ तो भक्त भगवान सिंह की तरह पूज्य श्री गुरुदेव भगवान को भा के जाओ। ताकि पूज्य श्री ऐसे भक्तों को अपने चरणों में स्थान दे सकें। भगवान सिंह जैसे भक्त की एक ही इच्छा रहती है कि जन्म- जन्मांतर – युगों-युगों तक पूज्य श्री का शरण- सानिध्य मिलता रहे। भक्त भगवान सिंह समय – समय पर पूज्य श्री गुरुदेव भगवान का शरण -सानिध्य प्राप्त कर लिया करते थे;, उनकी सेवा में समर्पित रहते थे; उनका दर्शन – पर्सन कर लिया करते थे। अनंत भक्तों की तरह पूज्य श्री के भक्ति का दरवाजा उनके लिए हमेशा के लिए खुला रहता था। वैसे तो विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म -शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करूणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी
महाराज के भक्त शिरोमणि की संख्या अनंत है। स्वर्गीय भगवान सिंह उन सर्वोपरि भक्तों में एक वो भक्त थे थे जो कोटिश नामों में एक होता है। वे क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक थे । देश – प्रदेश के दिग्गज नेताओं समाजसेवी कार्यकर्ताओं ने उनको भावभीनी श्रद्धांजलि दी । उनकी अपूर्णीय क्षति हम सब के लिए भरना बड़ा मुश्किल होगा । इस अपूर्णीय क्षति को पूज्य श्री गुरुदेव भगवान उनके विराट पारिवारिक , सामाजिक, राजनैतिक साह्यचर्य को सहने की शक्ति प्रदान करें। भक्त श्री भगवान सिंह जी पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के बताये मार्ग के पथिक थे। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान उनके हृदय से रथी होकर उनका पग – पग पर मार्गदर्शन करते थे । जीवन की जटिल गुत्थियों की उलझनों में सफर के दौरान भी वे बराबर पूज्य श्री गुरुदेव भगवान से परामर्श लिया करते थे। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की विद्या गीतोक्त साधना में वे रत रहते थे । साधना की बैट्री डिस्चार्ज होने के बाद वे त्वरित अध्यात्म के पावर हाउस पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के चरणों का दर्शन कर तृप्त हो जाया करते थे। ईश्वरीय वाणी यथार्थ गीता को उन्होंने पूरे राजस्थान के क्षत्रिय समाज को अपनाने, अंगीकार करने व आत्मार्पित करने का आह्वान किया। यथार्थ गीता हमेशा उनके राजनीतिक , सामाजिक, धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का एक अंग था। राजनैतिक मंचों से अक्सर उनके भाषण में पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की गीतोक्त साधना प्रस्फुटित हो जाया करती थी। आज से वे हमारे लिए अतीत हो चुके हैं लेकिन भक्त के रूप में वे हमेशा हमको वर्तमान की आहट से आभास होते रहेंगे और भविष्य की आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। हम सभी भक्तों की कामना है कि पूज्य श्री गुरुदेव भगवान उनको अपने चरणों में स्थान प्रदान करें। ओम श्री गुरुदेव भगवान की जय।







