National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

March 23, 2026 8:54 am

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भगवान बातें करते हैं, उठाते – बैठाते एवं संभालते हैं — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 

मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव” 

 

भगवान बातें करते हैं, उठाते – बैठाते एवं संभालते हैं — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 

विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज आज मोक्षदायिनी ज्ञान गंगा श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ में हजारों भक्तों संत महात्माओं को बताया कि भगवान बोलते हैं बातें करते हैं उठाते – बैठाते हैं, जगाते हैं खिलाते- पिलाते हैं। इन सब की स्थिति पाने के लिए केवल श्रद्धा की आवश्यकता है। श्रद्धा से ओम, राम अथवा शिव दो- ढाई अक्षर के किसी भी नाम का जप करें और यथार्थ गीता में बताये मार्ग पर चलें; इतने मात्र से ही भगवान ह्रदय से रथी होकर मार्ग दर्शन करने लगेंगे। अनंत विभूषित करुणा के सागर पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने कहा कि भगवान कहीं दूर नहीं बसे हैं, कहीं पथरा पहाड़ में नहीं हैं वे आप सबके हृदय देश में निवास करते हैं , वे इतने नजदीक है कि जितना हमारा आपका हाथ पांव। भगवान मित्रवत आपको संभालेंगे बसर्ते कि आपकी पुकार शबरी मीरा कबीर रैदास आदि महापुरुषों की तरह हो। पतित- पावन पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने कहा कि भगवान आपको आने वाले हर खतरों से बचायेंगे। पहाड़ जैसे दुख को राई में बदल देंगे । मौत आनी हो तो खुद सुरक्षा कवच बन कर अपने भक्तों को सकुशल बचा लेते हैं। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने बताया कि भगवान पतित- पावन हैं। कितना भी घोर से घोर पापी ही क्यों न हो जब भगवान उसे अपना लेते हैं तो उसे अपना स्वरूप प्रदान कर देते हैं। उसके पाप को न देखकर उसके श्रद्धा पूरित हृदय को देखते हैं जैसे अंगुलिमाल को देखे वाल्मीकि को देखे। रामायण कालीन पात्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि रावण द्वारा लात खाकर अपनी शरण में आये विभीषण को उन्होंने गले लगाया और उसे लंकेश बना दिया। घोर पापी बाली को उन्होंने अपनी पवित्र पावन चरण में स्थान दिया। सुग्रीव जो बालि के प्रकोप से मारा- मारा फिर रहा था उसे भगवान गले लगाये और मित्र की गौरवशाली गरिमा में उसे रखे । अज्ञान से आच्छादित संसार को ज्ञान रुपी प्रकाश से प्रकाशित करने वाले साक्षात परमात्मा पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने बताया कि मैंने श्रीमद्भागवत गीता का यथावत भाष्य यथार्थ गीता के रूप में जो आज संसार के समक्ष है उसे भगवान के आदेश से लिखा है। उसे कम से कम चार बार आवृत्ति करें उसको अमल में लायें ; जहां इतना भर हुआ तहां भगवान ह्रदय से रथी होकर आपके लौकिक और पारलौकिक जीवन की जिम्मेदारी स्वयं ले लेंगे और पूर्ति पर्यंत साथ बने रहेंगे।

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Author: NM News live

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