मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
सवा लाख मुफ्त यथार्थ गीता वितरण पर स्वामी अड़गड़ानंद जी के शिष्य सोहम बाबा को प्रशस्ति-पत्र
अयोध्या के राजा साहब व श्रीराम जन्मभूमि के महासचिव चंपतराय द्वारा सोहम बाबा को मिला प्रशस्ति-पत्र 
22 दिसम्बर को भगवान राम की पवित्र नगरी अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह के उपलक्ष्य में सवा लाख “यथार्थ गीता” मुफ्त में वितरण किए जाने के दृष्टिगत “यथार्थ गीता” के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्य सोहम महाराज को दो – दो प्रशस्ति-पत्र दिया गया है जिसमें एक प्रशस्ति पत्र श्री राम
जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपतराय द्वारा और दूसरा प्रशस्ति-पत्र अयोध्या के राजा साहब विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र ने दिया। दोनों प्रशस्ति-पत्र को पूर्व एमएलसी मनोज सिंह ‘गुड्डू” ने श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ जाकर पूज्य गुरुदेव भगवान के श्री चरणों में समर्पित किया और उन प्रशस्ति-पत्र को पूज्य श्री गुरूदेव भगवान को पढ़कर सुनाया गया । लगातार तीस वर्षों से विश्व के विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध श्रीमद्भागवत गीता भाष्य “यथार्थ गीता” जो साक्षात ईश्वरीय वाणी के रूप में अवतरित पूज्य गुरुदेव भगवान के श्री मुख से निसृत है। उस पवित्र धार्मिक ग्रंथ “यथार्थ गीता” को और पूज्य श्री गुरुदेव भगवान को श्री राजा साहब और महासचिव चम्पतराय ने कोटि-कोटि धन्यवाद साधुवाद ज्ञापित करते हुए उनके कमलवत चरणों में प्रणाम किया।
पूज्य गुरुदेव भगवान के शिष्य सोहम महाराज जी द्वारा लगातार दो महीने यथार्थ गीता समेत स्वामी जी द्वारा रचित अन्य पुस्तकें भजन किसका करें?, आत्मानुभूति एवं जीवनादर्श पेनड्राइव लाकेट आदि पवित्र धार्मिक पुस्तकें ,संत महात्माओं, श्रद्धालुओं, कर्मचारियों, अधिकारियों, पुलिस कर्मियों, सुरक्षाकर्मियों ,राजनेताओं, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मीडियाकर्मियों, अधिवक्ता बंधुओं ,शासन प्रशासन के उच्चाधिकारियों व देश विदेश से आए गणमान्य श्रद्धालुओं को दिया गया। पूज्य सोहम महाराज जी ने पूछने पर बताया कि पूज्य गुरुदेव भगवान समय के महापुरुष हैं । उन्होंने “यथार्थ गीता” ईश्वरीय आदेश पर लिखा है और यथार्थ गीता पूरे विश्व में समाहित है और पूरा विश्व यथार्थ गीता में
समाहित है । इस पवित्र वाणी के जनक पूज्य गुरुदेव भगवान आज धरा धाम पर बसे मानवता को नियंत्रित करने, पालन करने और आसुरी शक्तियों का संहार करने में सक्षम हैं । उनमें सृजनात्मक शक्ति, रचनात्मक शक्ति और संहारक शक्ति सहज प्रवाहित है। उन्होंने बताया कि अनादि काल से महापुरुषों की लंबी श्रृंखलाओं में भगवान राम, भगवान श्रीकृष्ण, बुद्ध, महावीर ,कबीर आदि महापुरुषों में जो लक्षण पाए गए वो सब लक्षण पूज्य गुरुदेव भगवान में समाहित है। इसलिए संसार को अपना लौकिक और पारलौकिक जीवन सुखी बनाना हो, जीवन की सार्थकता जाननी हो, मोक्ष की प्राप्ति लेनी हो तो मोक्षदायिनी केंद्र श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ में आयें और पूज्य गुरुदेव भगवान का शरण सानिध्य प्राप्त करें , जीवन का कल्याण करें।






