National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

September 21, 2026 1:32 am

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मिर्जापुर।पर्वों में सर्वश्रेष्ठ पर्व है गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज

 

पर्वों में सर्वश्रेष्ठ पर्व है गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज

 

गुरुर ब्रम्हा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वर:।
गुरुरसाक्षात्परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

श्री गुरु पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिव्य दृष्टि हिय होती।।

मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”

सृष्टि के अनादि काल से महापुरुषों, संत महात्माओं, ऋषियों-मुनियों की हजारों श्रृंखलाओं में महर्षि वेदव्यास जिन्होंने श्रुति ज्ञान की परंपरा को तोड़ते हुए चार वेद छः शास्त्र अट्ठारह पुराणों की अद्भुत रचना कर दुनियां को जीवन की महत्ता, मानवता का लक्ष्य, लौकिकता को गौड़ रख कर पारलौकिकता की पराकाष्ठा में विश्वास आदि महानतम विचारों को संसार के समक्ष न केवल प्रस्तुत किया बल्कि उस पर क्रियात्मक चलने का विधान भी बताया। ऋषि पाराशर के सुपुत्र महर्षि वेदव्यास ने सद्गुरु/ गूरु को एक पूजनीय पवित्र निर्विकार निर्मल शास्वत कालजयी अलमस्त सर्वज्ञ जैसे अनंत उपाधियों से शुसोभित कर
संसार के समक्ष परोस कर संसार को एक अद्वितीय मोक्षप्रद आइना दिखाया। जिस पर महात्मा कबीर मुहर लगाते हुए भगवान से भी श्रेष्ठ दर्जा देते हुए सद्गुरु के विषय में अपना अनुभव बताते हुए कहा —-
गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए।।
गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष।
गुरु बिन लखै न सत्य को गुरु बिन मिटै न दोष।।

उपरोक्त लिखी महापुरुषों की वाणियां अक्षरशः सत्य है सद्गुरु/ गुरु वह सत्ता है जिसकी कृपा मात्र से महान डकैत रत्नाकर वाल्मीकि हो गये जिन्हें राम कहने नहीं आता था उन्होंने विश्व प्रसिद्ध राम चरित्र सर्वाधिक क्लिष्ट भाषा संस्कृति में'”रामायण” लिखा और अंगुलिमाल जिनके आतंक से बड़े से बड़े राजा आतंकित रहते थे वे गुरु कृपा से आतंक के रास्ते को छोड़कर भगवान के रास्ते को पकड़े और अरिहंत हो गये। सद्गुरु महिमा का प्रभाव अनपढ़ अनगढ़ कबीर पर भी पड़ा मसि कागज छूयो नहीं कलम गह्यें नहिं हाथ चारो जुग की महातम मुखन सुनाई बात
धरती तो कागज करु लेखन सब बन राय
सात समुंदर मसि करु गुरु गुण लिखा न जाय
कबीर की ऐसी वाणी निकली कि विश्वविद्यालयों के क्षात्र आज भी रिसर्च करते हैं । रिसर्च करने के बावजूद भी उनके ज्ञान के तह तक नहीं पहुंच पाते हैं। सद्गुरु/गुरु की कृपा आज समय के महापुरुष विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के गुरूदेव भगवान (दादा गुरु) पर भी पड़ा। कबीर, रत्नाकर की तरह वे भी पार्थिव शरीर से पढ़े लिखे नहीं थे लेकिन जब उनकी वाणी निकलती थी तो बड़े से बड़े वेदान्ती प्रोफेसर उनके सामने अपनी विद्वत्ता के हथियार डाल देते थे। प्रयागराज विश्वविद्यालय के प्रख्यात हिंदी के प्रोफेसर डाक्टर राम कुमार वर्मा जिनका कबीर पर कमांड था जब दादा गुरु के सामने पड़ते थे और कुछ सुनाना चाहते थे तो कुछ ही देर बाद निरुत्रित हो जाते थे और निवेदन करने लगते थे कि महाराज हम सुनाने नहीं सुनने आयें हैं तब दादा गुरु कहें हो रहिमन अगम बात कहन सुनन के नाहिं।
जिन्ह देखा सो कहा नहीं, कहा सो देखा नाहिं।।
अगम बात न वाणी से कहने में आती है और न लिखने में आती है सद्गुरु कृपा से अनुरागी अधिकारी के हृदय में जाग्रत हो जाया करती है । दादा गुरु भजन में बैठे बैठे अकस्मात शिष्यों से बोल पड़ते थे आकाश बोल रहा है स्मृति में रख लो दादा गुरु बोलते और शिष्य स्मृति में धारण कर लेते और आज बारहमासी सरीखे भवसागर को पार कराने वाली पवित्र धार्मिक पुस्तकें संसार के सामने है। खुद उन्हीं के अधिकारी शिष्य पूज्य गुरुदेव भगवान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज जिन्होंने भगवान अत्रि के तपोभूमि चित्रकूट के घनघोर जंगल के अनुसुइया आश्रम में दादा गुरु के शरण सानिध्य में हिंसक पशुओं के बीच अपना सत्यान्वेशण का कोर्स पूरा किया वे खुद पार्थिव शरीर से ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं लेकिन उनमें वह क्षमता है कि संसार को जो जिस भाषा में चाहे उसको उसी की भाषा में संकल्प पकड़ कर अध्यात्मिक ज्ञान प्रदत्त कर सकते हैं । यथार्थ गीता, शंका समाधान, अमृतवाणी, एकलव्य का अंगूठा, आत्मानुभूति एवं जीवनादर्श, भजन किसका करें? इत्यादि जैसी मोक्षप्रद दर्जनों पवित्र धार्मिक पुस्तकों को लिपिबद्ध किया है जिन पर आने वाली शोध छात्रों की पीढ़ियां रिसर्च करने को तैयार बैठी हैं । पूज्य गुरुदेव भगवान का शरण सानिध्य, उनके विराट आध्यात्मिक आभा में यंत्रवत चलने वाले अनगिनत सत्यान्वेशी परमात्मपथ के पथिक परमात्मपर्यंत की दूरी तय करने में लगे हैं। कुछेक विरक्त उनकी शरण में हैं कुछेक विरक्त उनके आदेश से विचरण में हैं और अधिसंख्य गृहस्थ जीवन में रहकर लौकिक जिम्मेदारियों को निर्वहन करते हुए पारलौकिक जीवन को सुखमय बनाने में लगे हैं। गुरु पूर्णिमा पर्व पर पूज्य गुरुदेव भगवान के जो विचरणशील शिष्य हैं या जो उनके आदेश से धरा धाम में कहीं भी एकान्त में भजन कर रहे हैं वे सभी गुरुदेव भगवान की पूजा-अर्चना के लिए इकट्ठे होते हैं। यहां तक कि जो गृहस्थ हैं वे भी गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुदेव भगवान के दर्शनार्थ देश विदेश से आ जाते हैं। पूज्य गुरुदेव भगवान कहते हैं कि सद्गुरु/गुरु वह शास्वत कालजयी अलमस्त सत्ता है जिसकी खुशबू को पाने के लिए बुद्ध, महावीर, राजा भर्तृहरि, पूरनमल, गोपीचंद आदि चक्रवर्ती सम्राट अपने राज-पाट के सुख का भी परित्याग कर दिया और सद्गुरु की आज्ञा में परमात्मपथ की दूरी तय कर लिया। इतना ही नहीं पूज्य गुरुदेव भगवान कहते हैं कि सद्गुरु/गुरु अपने शिष्य को गुरु ही बना के छोड़ते हैं न कि शिष्य। और सद्गुरु के ज्योतिर्मय निर्झर ज्ञान के प्रकाश से सांसारिक समाज से बहिष्कृत को संत शिरोमणि का दर्जा मिला कबीर, रैदास,माता शबरी, केवट, आदि संत शिरोमणि इसके उदाहरण हैं। रामबोला जिसके जन्म लेते ही मां मर गई पिता मर गये जो पाली वो भी मर गई गांव के लोग उन्हें राक्षस कहते थे कोई उनके पास नहीं बैठता था लेकिन सद्गुरु की ऐसी कृपा हुई कि रामबोला महान तुलसी दास हो गये रामचरित मानस लिखे जो आज संसार के समक्ष है। पूज्य गुरुदेव भगवान कहा करते हैं कि सद्गुरु एक अवस्था है एक रहनी है सद्गुरु साकार रूप में एक जगह विराजमान रहते हैं और अपनी निराकार रहनी से धरा धाम पर रहने वाले शिष्यों भक्तों श्रद्धालुओं संत महात्माओं को संभालते रहते हैं और उनका योग क्षेम करते रहते हैं। इसीलिए कहा गया है कि

गुरु बसे बनारसी शिष्य लगावे नेह। एक पल बिसरे नहीं एक हंस दो देह।।

बिनु पग चलै सुनै बिनु काना। कर बिन कर्म करै विधि नाना।।
आनन रहित सकल रस भोगी

बिनु बानी बकता बड़ जोगी।।*ध्यान मूलं गुरु मूर्ति
पूजा मूलं गुरु पदम।
मंत्र मूलं गुरु वाक्यं मोक्ष मूलम गुरु पदम

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Author: NM News live

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24 घंटे में घर चोरी का खुलासा, चार लाख के आभूषण व तीन स्मार्टफोन बरामद नशे की लत पूरी करने के लिए चोरी करने वाला आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने शत-प्रतिशत माल बरामद किया सहसपुर। कोतवाली सहसपुर पुलिस ने घर में हुई चोरी की घटना का 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब चार लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण और तीन स्मार्टफोन बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, महमूदनगर रामपुर निवासी आकाश कुमार ने 17 सितंबर को कोतवाली सहसपुर में तहरीर देकर बताया था कि अज्ञात व्यक्ति ने रात के समय उसके घर से सोने-चांदी के आभूषण और स्मार्टफोन चोरी कर लिए। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक देहात और क्षेत्राधिकारी सहसपुर के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम गठित की गई। टीम ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तथा संदिग्ध की तलाश के लिए मुखबिर तंत्र सक्रिय किया। 18 सितंबर को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घटना में शामिल आशिक पुत्र सलीम, निवासी महमूद नगर शंकरपुर, थाना सहसपुर, उम्र 27 वर्ष को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी किए गए आभूषण और तीन स्मार्टफोन बरामद किए। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी की गई। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह नशे का आदी है और नशे की पूर्ति के लिए उसने चोरी की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया। बरामद सामान: एक पीली धातु का मंगलसूत्र, एक जोड़ी पीली धातु के कानों के टॉप्स, चार जोड़ी सफेद धातु के बिछुए और तीन स्मार्टफोन। आरोपी का आपराधिक इतिहास: पुलिस के अनुसार आरोपी के विरुद्ध वर्ष 2022 से 2026 तक चोरी, आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में पांच मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक जावेद हसन, कांस्टेबल नवबहार और कांस्टेबल अनुराग शामिल रहे।