National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

March 23, 2026 6:49 pm

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भगवान के यहां स्त्री पुरुष का भेद नहीं है — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 

मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद प्रणव

भगवान के यहां स्त्री पुरुष का भेद नहीं है — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज 

भगवान भाव के बस में रहते हैं — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज

अनादिकाल से महापुरुषों की श्रृंखलाओं में अद्भुत कृतियों का वाणियों का उपदेशों का समावेश है परन्तु भक्ति, ज्ञान,देवता, कर्म, यज्ञ, वर्ण आदि ईश्वरीय संदेशों की जितनी, सर्वग्राह्य , सरल स्पष्ट व्याख्या समय के महापुरुष यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज द्वारा की गयी है शायद उतनी स्पष्ट व्याख्या अन्य कृतियों में देखने को नहीं मिलती। पूज्य गुरुदेव भगवान की वाणी में कहीं धार्मिक भ्रांतियों की गुंजाइश नहीं है। इसी क्रम में आज गुरुदेव भगवान ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भगवान के यहां स्त्री पुरुष का भेद नहीं है। भगवान सबके लिए हैं और सब भगवान के हैं । पूज्य गुरुदेव भगवान कहते हैं कि श्रद्धा से उनको मनाओ सुबह-शाम श्रद्धा से उन्हें जब याद करोगे तब भगवान बोलेंगे बतियायेंगे उठायेंगे बैठायेंगे । इसलिए एक प्रभू में श्रद्धा रखिए और उनके प्रति समर्पित रहिए

राम नाम उर में गहियो जा के सम नहिं कोई । जिह सिमरत संकट मिटै दरसु तुम्हारे होई।।

दो घंटे सुबह दो घंटे शाम भगवान को याद करो भगवान को भजो तो भगवान खुद पूछेंगे कि क्या चाहिए? भगवान बातें करते हैं रास्ता बताते हैं और ले चलते हैं हमारी केवल श्रद्धा चाहिए वे हमारी श्रद्धा के भूखे हैं। *श्रद्वावान् लभते ज्ञानं तत्पर: संयतेन्द्रिय: ज्ञानं लब्ध्वा परां शान्तिमचिरेणाधिगचछति।। “*भाव बस्य भगवान”* भगवान भाव के बस में रहते हैं वे शुख के निधान है करूणा के सागर हैं । वे सबके हृदय में निवास करते हैं *सबके उर अंदर बसै जानत भाव कुभाव*। भगवान सबके हृदय में बसते हैं। आपके मन में क्या चल रहा है वे,सब जानते हैं क्या संकल्प मन में उठने वाला है भगवान को पहले ही पता चल जाता है। *मन बस होई तबै जब प्रेरक प्रभु बरजैं* । मन की गति बहुत स्पीडी है यह तभी नियंत्रण में होता है जब भगवान प्रेरक के रूप में हृदय से खड़े हो जायें। भगवान कहे इधर चल उधर चल यंत्रवत चलते रहो।भगवान को पाने का सबको हक है स्त्री हो या पुरुष या अन्य। हमारे सामने हजारों महापुरुष हुए। तालाब के किनारे पड़ा बच्चा कबीर को नीमा और नीरु नामक जुलाहे ने पाला बच्चा कबीर बड़ा हुआ भगवान को भजा कबीर कबीर हो गया कर्मकांडी ब्राह्मण उनके पीछे पड़े रहे लेकिन कबीर की वाणी के आगे सब शरणागत हो गये। भगवान जैसे बच्चों को पढ़ाया जाता है वैसे ही पढ़ाते हैं उठते बैठते सोते जागते श्रद्धा से ओम् राम अथवा शिव को जपों जहां श्रद्धा से लव लगी तहां भगवान जानते हैं कि मुझे पुकार रहा है वे हृदय से रथी हो कर खड़े हो जायेंगे संभालने लगेगें । पूज्य गुरुदेव भगवान ने कहा कि भगवान के यहां स्त्री पुरुष समान है । इतिहास उठा के देखा जाए तो माताऐं भगगवतपथ में पुरुष की अपेक्षा सर्वाधिक रहीं हैं।

NM News live
Author: NM News live

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