संपादकीय द्वारा वरिष्ठ पत्रकार बांकेलाल निषाद “प्रणव”
नीतीश- नायडू के लिए कभी भी फीलबैड बन सकता है मोदी – शाह का फीलगुड

गोदी मीडिया संवैधानिक संस्थाओं को हथियार बनाकर विपक्ष को घुटने टेकने को मजबूर कर 2024 लोकसभा के महासंग्राम में मोदी- शाह को जनता ने ऐसी सिक्स्थ देकर देश के सामने एक ऐसा जनादेश रखा कि हर एक सांसद की हर छोटी-बड़ी पार्टी की पूछ बढ़ गयी है । विशेषकर नीतिश बाबू चंद्रबाबू नायडू की पूछ और बढ़ गई है। मोदी शाह के तानाशाही से भाजपा और आरएसएस के कद्दावर नेताओं की जिनका कद दस साल में बौना हो गया था आज इस देश की जनता के जनादेश से उनकी भी पूछ बढ़ गयी है। राहुल गांधी जिनको मोदी- शाह की जोड़ी ने पप्पू साबित करने में अरबों खरबों रुपए खर्च किए उन्हें अब सम्मान से राहुल गांधी कहा जाने लगा है उनकी भी पूछ बढ़ गयी। चारो तरफ पूछ ही पूछ है हर कोई फीलगुड महसूस कर रहा है पक्ष हो या विपक्ष हर कोई पूछ के पीछे भाग रहा है और उन पूछ को फीलगुड की गारंटी दे रहा है। यूं तो पूछ मूंछ और पूंछ में बहुत अंतर है तीनों का महत्व है पूछ इंसान का कद बढाता है मूंछ चेहरे की शोभा बढाता है और पूंछ हमारे पूर्वज बंदरों की शोभा बढाता है। अगर आज नीतीश नायडू की पूछ में दम है तो त्रेता में अंगद और हनुमान की पूंछ में दम था। जैसे आज नीतीश नायडू की पूछ की डिमांड बढ़ी है त्रेता में वैसे अंगद और हनुमान के पूंछ की डिमांड बढ़ी थी। भगवान राम के दूत अंगद ने रावण से बात करने के लिए अपनी पूंछ की कुर्सी बनाकर रावण के सिंहासन से भी ऊपर बैठ कर उसे उसी की दरबार में सिक्स्थ दी थी। भगवान राम के दूसरे सेवक
हनुमान जी ने अपनी पूंछ से सोने की लंका जलाकर रावण को भगवान राम के ताकत का पूर्वाभास करा दिया था द्वापर में हनुमान जी ने ही भीम के अहंकार को चूर करने के लिए अपनी पूंछ को ही माध्यम बनाया था। रावण हो या सोने की लंका हो या फिर भीम सभी के फीलगुड को अंगद और हनुमान ने फीलबैड में बदल दिया था लेकिन आज यहां न तो द्वापर है और न ही त्रेता है और न ही हनुमान और न ही अंगद। आज कलयुग है मोदी और शाह न तो अंगद है और न ही हनुमान है और न ही रावण और कंस हैं। एक दशक से पूरे देश पर इनका कब्जा रहा है गोदी मीडिया संवैधानिक संस्थाएं इनके सामने घुटने टेके खड़ी रहती थी। इनके बल पर जब चाहे विपक्ष के किसी भी नेता को मोदी शाह घुटने टेकने को मजबूर कर दिया करते थे। घुटने टेकाने वाली यही मुद्रा इन्हें पसंद है। इतना ही नहीं जितना इन्हें घुटने टेकाने की मुद्रा पसंद है उतना ही नीतीश बाबू को पलटने की मुद्रा पसंद है काउंटिंग के दिन ही संकेत नीतिश बाबू ने दे दिया था कि “हम सबके हैं” और नायडू को अपने एटीट्यूड में रहने की मुद्रा पसंद है। अब चारो आमने-सामने एक दूसरे को फीलगुड की दृष्टि से देख रहे हैं लेकिन अंदर ही अंदर चारों यह अंदाजा लगा रहे हैं कि फीलगुड कभी भी फीलबैड में बदल सकता है। मोदी और शाह को दुल्हा और शहबाला बनने की बड़ी जल्दी है जैसे ही ये दोनों शपथ लिये तैसे ही ये दोनों नीतीश – नायडू के एक -एक सांसदों को साम,दाम,दण्ड, और भेद के जरिए तोड़कर नीतीश नायडू को किनारे करने का भगीरथ प्रयास करेंगे । नीतीश नायडू मोदी शाह के जोड़ तोड़ नीति से खूब परिचित हैं महाराष्ट्र मध्यप्रदेश आदि राज्य में विपक्षी पार्टी की दुर्दशा देख चुके हैं। यह अवसर मोदी शाह को बाबू की जोड़ी देने के लिए सौ बार सोच रही है। इसीलिए वे इंडिया गठबंधन से भी किसी न किसी माध्यम से बात कर रहे हैं । क्योंकि कि एनडीए की अपेक्षा इंडिया गठबंधन के पास नीतीश नायडू को देने के लिए बहुत कुछ है । एनडीए नीतीश को प्रधानमंत्री और नायडू को गृहमंत्री नहीं बना सकता जब कि इंडिया गठबंधन ये दोनों पद बाबू ग्रूप को दे सकता है और बाबू ग्रूप की पार्टी भी इंडिया गठबंधन में एनडीए की अपेक्षा सुरक्षित रह सकती है। चूंकि मोदी जी की गारंटी पर शक है उनकी बीबी समेत पूरा देश उनकी कभी न पूरी होने वाली गारंटी को देख चुका है। मजे की बात यह है कि नायडू और नीतीश भी मोदी और शाह के हर दांव से वाकिब हैं इसीलिए यही दोनों भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के लिए सबसे पहले पहल करके विपक्ष को इकट्ठा किये थे। नायडू तो 2019 से ही मोदी का विरोध कर रहे थे जब 2019 की लोकसभा चुनाव में नायडू को प्रधानमंत्री मोदी ने आंध्र प्रदेश के कुरनूल में यू-टर्न बाबू नाम दिया था और इसके जबाब में नायडू ने “मोदी एक ग़लती है” कहकर तंज कसा था। तभी से नायडू विपक्ष को इकट्ठा होने के लिए कह रहे थे। फिलहाल राजनीति में कोई न तो स्थायी दोस्त होता है और न ही स्थायी दुश्मन। मौके पर चौके लगाने का प्रयास सब करते हैं। इंडिया गठबंधन और एनडीए दोनों में कौन नीतीश नायडू को फीलगुड करायेगा कौन फीलबैड यह अभी समय के गर्भ में है। फिलहाल इंडिया गठबंधन मोदी शाह के आतंक से मुक्ति पाने के लिए ही एक मंच पर आये हैं उन्हें अगर नीतीश नायडू को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री लोकसभा अध्यक्ष पद बिहार तेलंगाना को विशेष राज्य का दर्जा विशेष पैकेज या कोई और अन्य मांग सभी इंडिया गठबंधन देने को तैयार हो जायेगा चूंकि इंडिया गठबंधन के पास देने के लिए बहुत कुछ है लेकिन एनडीए गठबंधन के पास देने के लिए बहुत कुछ नहीं है। इसीलिए नीतिश बाबू और चंद्रबाबू बाबू नायडू एनडीए के साथ साथ इंडिया गठबंधन के भी संपर्क में हैं। अब देखना है कि नीतीश नायडू की पूछ से इंडिया गठबंधन व एनडीए गठबंधन में किसकी लंका जलेगी या किसकी अयोध्या बसेगी दोनों जोड़ी किसके लिए फीलगुड होंगे और किसके लिए फीलबैड होंगे या खुद जल जायेंगे या खुद फीलबैड से कोमां में चलें जायेंगे समय बताएगा। देश अपनी कलम से इतिहास के पन्नों में एक और अध्याय लिखने को तैयार है।






