संपादकीय द्वारा अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
बेरोजगार युवाओं का लगा श्राप ,यूपी में भाजपा का सूपड़ा साफ़।

देश के अन्य राज्यों के ब्रांड एंबेसडर के रूप में और सोशल मीडिया में भावी प्रधानमंत्री की दावेदारी के रुप में बुल्डोजर बाबा अपने ही स्टेट में गच्चा खा गये। यूपी से योगी और मोदी दोनों को बड़ी उम्मीद थी लेकिन यूपी का यह भाजपा के खिलाफ क्रांतिकारी जनादेश योगी और मोदी को चारों खाने चित्त कर दिया है। अयोध्या मुद्दे से भी उन्हें बड़ी उम्मीद थी इसीलिए लोकसभा २०२४ के चुनाव को देखते हुए राम लला मंदिर पूर्ण होने के पहले ही 22 जनवरी को उद्घाटन करा दिया था। उन्होंने अयोध्या का चुनावी लाभ में भुनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ा। अयोध्या की ब्रांडिंग और माफियाओं पर नकेल, ये दोनों मुद्दे बेरोजगारी और सरकारी कर्मचारियों द्वारा की गयी लूट को दबा नहीं पाया। बेरोजगारी का आलम ये रहा कि चट्टी चौराहे पर आम लोग यह चर्चा करने लगे कि बच्चों को नौकरी नहीं मिल रही है आखिर बच्चों को इलाहाबाद लखनऊ दिल्ली कानपुर पढ़ा कर क्या किया जायेगा? यहां तक कि बच्चे इलाहाबाद लखनऊ दिल्ली कानपुर आदि जगहों से फोन करने लगे अपने अभिभावकों के पास कि भाजपा को वोट नहीं देना है। बुल्डोजर सरकार का नौकरी के प्रति उदासीनता का आलम यह रहा कि बच्चे यूपी सरकार से नौकरी का आशा छोड़ दिए और ज्यादा फोकस बिहार एमपी राजस्थान उत्तराखंड व अन्य राज्यों पर नोकरी के लिए कंपटीशन देना आरंभ कर दिये। र पिछड़ा दलित आदिवासी व सामान्य हर वर्ग के बच्चे यूपी सरकार से नौकरी के मामले में निराश हो चूके हैं। यूपी के सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को स्वतंत्र छोड़ देना भी एक हार का कारण बना । इन सरकारी तंत्रों पर भाजपा के कार्यकर्ताओं मंत्रियों विधायकों का कोई नकेल नहीं लगा। परिणाम यह हुआ कि ये सरकारी तंत्र जनता से उनके काम कराने के नाम पर मनमानी वसूली की जो काम सपा बसपा सरकार में पांच सौ में होता था वह सीधे पचास हजार में होने लगा। जिससे जनता आक्रोशित हो गयी। मंहगा बिजली बिल भी ग्रामीणों में सरकार के प्रति खौफ पैदा किया। गरीब हो या अमीर जिसका बिल महीने में दो सौ से तीन सौ आता था उसके हाथ में जब चालीस हजार पजास हजार का बिल आने लगा तो उस गरीब किसान को बिल जमा करने में पसीना छूटने लगा। हारने में केंद्र सरकार की नीतियां भी जिम्मेदार रही । महंगाई निजीकरण के नाम पर आरक्षण पर प्रहार से दलित और पिछड़ों को लगा कि कहीं उन्हें अपने परंपरागत काम पर न लौटना पड़े। मंहगाई किचन तक पहुंच गई सिलेंडर 1200 हो गया । शिक्षा जो भारत जैसे गरीब देश में फ्री मिलनी चाहिए उस पर १८% जीएसटी लगा दिया। क्रांति की शुरुआत यूपी से शुरू हुआ क्योंकि उत्तर प्रदेश क्रांति का स्टेट्स रहा है 1857 की क्रांति यहीं से शुरू हुआ था। और आज आरएसएस और भाजपा के पतन का लहर भी यूपी से ही शुरू हुआ और पूरे देश को चपेट में लेकर मोदी और अमित शाह के अहंकार को चूर कर दिया। यूपी की यह चिनगारी इतना असर डाला कि भाजपा की चार सौ पार के दावे पर न केवल पानी फेरा बल्कि उसे बहुमत भी नहीं लाने दिया। बुल्डोजर बाबा के माफियाओं पर नकेल पर भी प्रश्न उठने लगे थे उसमें विपक्ष स्वजातीय माफियाओं को बचाने का आरोप भी लगता रहा। बड़ी चौंकाने वाली बात यह रहा कि अखिलेश का पीडिए फार्मूला काफी कारगर रहा। दलित वोट बसपा से मोह भंग कर भाजपा के बजाय सपा का दामन थामा। ज्यादा वोट इंडिया गठबंधन में दलितों का स्थानांतरण हुआ। फिलहाल 2024 में भाजपा यदि बेरोजगार युवाओं पर ध्यान नहीं दिया तो फिर 2027 का परिणाम भी इसी तरह चौंकाने वाला हो सकता है ।






