जल विद्युत परियोजना क्षेत्र लोहारी गांव के यमुना नदी तट पर चल रहा है अवैध खनन का खेल
डूब क्षेत्र लोहारी गांव के नजदीक सरकारी स्कूल के सामने खनन माफिया सरकार के नियमों को ठेंगा दिखाकर रात दिन कर रहे हैं अवैध खनन
गौर तलब है कि इन दिनों लखवाड व्यासी जल विद्युत परियोजना का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसकी आड़ में स्थानीय खनन माफिया जमकर यमुना नदी का सीना चीर कर मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में सरकार को लाखों रुपए का राजस्व की हानि पहुंचा रहे है, सूत्रों से पता चला है कि उक्त अवैध खनन का खेल स्थानीय प्रशासन, चकराता वन प्रभाग रिवर रेंज डाकपत्थर, कालसी पुलिस, तहसील कालसी के अधिकारियों की मिली भगत से चल रहा है, बताया जा रहा है कि उक्त खनन माफिया रात के समय में जेसीबी के माध्यम से यमुना नदी तट पर जल विद्युत निगम के बनाई पानी के झील के किनारे से रेत बजरी निकालकर लोहारी गांव के संपर्क मार्ग के किनारे इकट्ठा कर मसूरी से डंपर बुलाकर भरवा रहे हैं ,उक्त खनन सामग्री स्थानीय ठेकेदार जल विद्युत निगम और एलएनटी कंपनी के ठेकेदार उक्त खनन माफिया से खरीद कर अपने कार्य में लगा रहे हैं ,बताया जा रहा है कि मसूरी से आने वाली गाड़ियों को ₹15000 के रेट से खनन सामग्री बेचा जा रहा है, उक्त खनन माफिया पर ना तो कोई सरकारी रवान्ना है, न हीं उनके पास कोई बिल रहता है, रात के समय में 20 से 25 डंपर रोजाना लोहारी गांव के नदी तट पर बनी प्रोजेक्ट झील से अवैध खनन सामग्री भरकर मसूरी के लिए रवाना हो जाते हैं, इन अवैध खनन के वाहनों को कोई रोकने टोकने वाला नहीं है, सूत्रों से पता चला है कि मसूरी का प्रशासन भी इन खनन माफिया से मिला हुआ है ,अब सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर चकराता वन प्रभाग रिवर रेंज डाकपत्थर की रिज़र्व फॉरेस्ट की नदी में किस प्रकार से अवैध खनन हो रहा है और संबंधित वन विभाग के कर्मचारी कहां सोया हुआ है, क्यों इन खनन माफिया पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है इस झील से मात्र 10मीटर की दूरी पर पुल निर्माण कार्य चल रहा है, जबकि पुल की सुरक्षा की दृष्टि से सरकार का नियम है कि पुल से 100मीटर की दूरी पर खनन सामग्री उठाना प्रतिबंधित है,खनन माफिया दिन हो या रात के अंधेरे में नदी का सीना चीर कर सरकार के नियमों को दरकिनार कर ठेंगा दिखाने का काम रहे हैं,वही कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग रीवर रेंज की वन भूमि से वन संपदा को नुकसान पहुंचा कर पत्थर निकालकर ठेकेदारों द्वारा सड़क की सुरक्षा दीवारों का निर्माण इन पत्थरों से किया जा रहा है।ये अवैध रूप से
निकाले गए पत्थरों के भंडार लोहारी संपर्क मार्ग निकट यांत्रिक होटल के सामने भी देखें जा सकते हैं।इससे ऐसा प्रतीत होता है कि रिवर रेंज डाकपत्थर के कर्मचारियों को सुविधा शुल्क खनन माफिया के द्वारा पहुंचाई जा रही है, अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन खनन माफिया पर कार्रवाई करती है या राज्य की उपखनिज संपदा को ऐसे ही लुटाया जाएगा।वहीं जब प्रभागीय वनाधिकारी चकराता मयंक झा से पूछा गया तो उनका कहना था कि अगर वन भूमि से अवैध खनन हो रहा तो इसकी जांच कर कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।






